फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   18 loksabha seats in purvanchal

आखिरी चरण में कास्ट कार्ड से ही मिलेगी जीत

Sat, 10 May 2014 11:21 AM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 10 May 2014 11:21 AM IST
विज्ञापन
18 loksabha seats in purvanchal

12 मई को आखिरी चरण में यूपी और बिहार की जिन सीटों पर मतदान होना है, उन पर जातीय राजनीति गर्मा गई है।

विज्ञापन


इन सभी सीटों पर पिछड़े और दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। नरेंद्र मोदी को फर्जी ओबीसी साबित करने की कांग्रेस की कवायद इसी खेल का नतीजा है।

हालांकि इसकी शुरुआत खुद मोदी ने ‘नीच राजनीति’ संबंधी प्रियंका वाड्रा के बयान को नीची जाति से जोड़कर की थी।

भाजपा इस पहल का लाभ उठाने के लिए पूर्वांचल के सामाजिक समीकरणों के मद्देनजर जातिवाद की सवारी कराना चाहती है, तो कांग्रेस ही नहीं सपा और बसपा भी अपने वोटों में सेंधमारी रोकने के लिए हर कोशिश कर रही हैं।

विज्ञापन

सोशल इंजीनियरिंग जनाधार बना

18 loksabha seats in purvanchal

पूर्वांचल की 18 सीटें सियासी दलों के लिए जातिवाद की प्रयोगशाला रही हैं।

पिछड़ों की एकजुटता से ही साठ के दशक में इस इलाके में चौधरी चरण सिंह ने कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी थी।

किसी जमाने में यहां समाजवादी और वामपंथी आंदोलन के विस्तार की प्रमुख वजह भी सामाजिक अंतर्विरोधों को ठीक से समझना और पिछड़ों व दलितों की आवाज को उठाना था।

सोशल इंजीनियरिंग के भरोसे ही सपा और बसपा ने यहां जनाधार बनाया। ये समीकरण कांग्रेस-भाजपा को भी सामाजिक परिस्थितियों को नजरअंदाज न करने का सबक दे चुके है।

कुछ इसी तरह के हालात पड़ोसी बिहार राज्य में भी हैं। मोदी यहां की सामाजिक-राजनीतिक संरचना को भांप चुके हैं।

हर तरीके से साध रहे ‘जाति’

18 loksabha seats in purvanchal

मोदी आठ मई को वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र में चुनावी सभा करते हैं तो क्षेत्रीय विधायक अनुप्रिया पटेल और उनकी मां एवं अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल को न केवल मंच पर बैठाते हैं, वरन पूरी तवज्जो भी देते हैं।

अनुप्रिया के दिवंगत पिता सोने लाल पटेल की तारीफों के पुल बांधते हैं, गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल की सबसे ऊंची और भव्य मूर्ति बनवाने का जिक्र करते हैं।

‘कथित’ मोदी लहर के बावजूद भाजपा समझौते में दो सीटें अपना दल को दे ही चुकी है।

यह सब इसलिए कि कुर्मी वोटों को भाजपा के पक्ष में लाया जा सके। मोदी खुद को छोटी जाति से जुड़ा, चाय बेचने वाला शायद इसीलिए बता रहे हैं कि उनकी नजर पिछड़ों, दलितों पर लगी हुई है।

विज्ञापन

आखिर क्या है मजबूरी

18 loksabha seats in purvanchal

मोदी जानते हैं कि मुस्लिमों की ज्यादा आबादी वाले क्षेत्रों में दलित, पिछड़ों, अति पिछड़ों के बिना उनकी नैया पार नहीं लगेगी।

मोदी के मंसूबों को भांपकर ही बसपा सुप्रीमो मोदी से लगातार उनकी जाति पूछ रही हैं। देर से ही सही कांग्रेस ने भी मोदी की जाति व जातीय राजनीति को लेकर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस के प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल का दावा है कि मोदी जिस मोढ़ घांची जाति से हैं, वह पिछड़ी नहीं, वैश्य वर्ग की संपन्न जाति है। घी के कारोबार से जुड़ी यह जाति गुजरात में पिछड़े वर्ग में शामिल है।

अखिलेश भी पीछे नहीं
यह जातीय गणित की मजबूरी ही है कि आमतौर पर मायावती पर तल्ख टिप्पणियां करने से बचने वाले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी चुनावी सभाओं में मायावती पर आक्रामक नजर आ रहे हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि आने वाले दिनों में वे हाथी की सवारी छोड़कर भैंस पालने लगेंगी।

प्रतिक्रिया भी होती है जातीय ध्रुवीकरण की

18 loksabha seats in purvanchal

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर सतीश राय का कहना है कि पूर्वांचल की राजनीति में जातीय ध्रुवीकरण पहले भी होता रहा है।

मोदी भी पूर्वी यूपी में इसी राह पर चलना चाहते हैं लेकिन इसकी प्रतिक्रिया भी होती है। इस समय कहीं प्रो-मोदी तो कहीं एंटी-मोदी पोलेराइजेशन है।

अति पिछड़ी जातियो के कुछ दल भी बने हैं। वे किससे जुड़े हैं, यह भी मायने रखता है।

पिछड़ों, दलितों के साथ ही पूर्वांचल में मुस्लिमों के ध्रुवीकरण पर नजर है। इसीलिए सभी जातियों की बात को लेकर सामने आ गए हैं। पर, हमेशा इससे फायदा ही मिले, यह जरूरी नही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed