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तेंदुए से बेटी को बचाने वाली दो माताएं होंगी सम्मानित
Updated Wed, 28 Mar 2018 10:19 PM IST
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बिछिया (बहराइच)। अपनी मासूम बच्चियों को तेंदुए के जबड़े से छुड़ाने वाली दो माताओं को बहादुरी के लिए लखनऊ में सम्मानित किया जाएगा।
दोनों माताओं ने अपनी जान की परवाह न करते हुए तेंदुए से भिड़कर अपने जिगर के टुकड़ों को बचाया। संघर्ष में दोनों महिलाएं घायल भी हुईं।
अब इनकी बहादुरी के लिए गुरुवार को लखनऊ में लोक भवन परिसर में मुख्यमंत्री इन्हें पुरस्कृत करेंगे। अप्रतिम वीरता के लिए सरकार की ओर से रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार योजना चलायी जा रही है।
इसके तहत बहराइच के वन क्षेत्र से दो महिलाओं का चयन किया गया है। उप जिलाधिकारी महसी डॉ. संतोष उपाध्याय ने बताया कि तेंदुए का सामना करते हुए वर्ष 2011 में राजाराम टांड़ा कारीकोट निवासी सुनीता ने 11 वर्षीय बेटी की जान बचायी थी।
तेंदुए के जबड़े से उसे छुड़ाया था। इस संघर्ष में सुनीता भी जख्मी हुई थी। इसी थाना क्षेत्र के मटेही रमपुरवा निवासी रिश्तेदारी में आई मऊ निवासी सिंधू ने 10 वर्षीय बेटी खुशबू को तेंदुए के जबड़े से बचाया था।
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सिंधू और सुनीता का चयन रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार के लिए हुआ है। एसडीएम के आदेश पर सुजौली थानाध्यक्ष अफसर परवेज ने दोनों महिलाओं के घर पहुंचकर उन्हें चयन की सूचना दी। दोनों को लखनऊ के लिए रवाना किया।
बेटी के लिए तो यमराज से भी लड़ जाती...
राजराम टांड़ा करीकोट गांव में रहने वाली सुनीता सफाईकर्मी के पद पर तैनात है। उन्होंने बताया कि 16 अक्तूबर 2011 की शाम घर के बाहर तेंदुए ने बेटी लक्ष्मी पर हमला किया।
उस समय वह 11 वर्ष की थी। बेटी की चीख सुनकर वे दौड़ी तो सामने तेंदुआ था। डंडा लेकर तेंदुए से भिड़ गई। लगभग 20 मिनट तक संघर्ष हुआ। अंत में बेटी को बचा लिया।
सुनीता ने कहा कि लक्ष्मी से छोटा एक बेटा है। घर में बेटा और बेटी को एक ही नजर से देखा जाता है। बेटी के लिए तेंदुआ क्या, यमराज से भी लड़ सकती हूं।
‘बेटी ही जिंदगी है’
मऊ जिले के बनकटी रामपुर जोलीघाट निवासी सिंधू पत्नी कल्पू की रिश्तेदारी सुजौली थाना क्षेत्र के मटेही रमपुरवा गांव में है। वह अपने भाई के घर बीते माह आई हुई थी।
सिंधू ने बताया कि मांगलिक कार्यक्रम के कारण हंसी खुशी का माहौल था। बेटी खुशबू के साथ शाम को खेत जाने के लिए निकली। तभी तेंदुए ने आगे चल रही बेटी पर झपट्टा मारा। पास में ही पड़े गन्ने को उठाकर तेंदुए से संघर्ष किया। बेटी की जान बच गई। सिंधू ने कहा कि बेटी ही उसकी जिंदगी है।
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दोनों माताओं ने अपनी जान की परवाह न करते हुए तेंदुए से भिड़कर अपने जिगर के टुकड़ों को बचाया। संघर्ष में दोनों महिलाएं घायल भी हुईं।
अब इनकी बहादुरी के लिए गुरुवार को लखनऊ में लोक भवन परिसर में मुख्यमंत्री इन्हें पुरस्कृत करेंगे। अप्रतिम वीरता के लिए सरकार की ओर से रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार योजना चलायी जा रही है।
इसके तहत बहराइच के वन क्षेत्र से दो महिलाओं का चयन किया गया है। उप जिलाधिकारी महसी डॉ. संतोष उपाध्याय ने बताया कि तेंदुए का सामना करते हुए वर्ष 2011 में राजाराम टांड़ा कारीकोट निवासी सुनीता ने 11 वर्षीय बेटी की जान बचायी थी।
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तेंदुए के जबड़े से उसे छुड़ाया था। इस संघर्ष में सुनीता भी जख्मी हुई थी। इसी थाना क्षेत्र के मटेही रमपुरवा निवासी रिश्तेदारी में आई मऊ निवासी सिंधू ने 10 वर्षीय बेटी खुशबू को तेंदुए के जबड़े से बचाया था।
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सिंधू और सुनीता का चयन रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार के लिए हुआ है। एसडीएम के आदेश पर सुजौली थानाध्यक्ष अफसर परवेज ने दोनों महिलाओं के घर पहुंचकर उन्हें चयन की सूचना दी। दोनों को लखनऊ के लिए रवाना किया।
बेटी के लिए तो यमराज से भी लड़ जाती...
राजराम टांड़ा करीकोट गांव में रहने वाली सुनीता सफाईकर्मी के पद पर तैनात है। उन्होंने बताया कि 16 अक्तूबर 2011 की शाम घर के बाहर तेंदुए ने बेटी लक्ष्मी पर हमला किया।
उस समय वह 11 वर्ष की थी। बेटी की चीख सुनकर वे दौड़ी तो सामने तेंदुआ था। डंडा लेकर तेंदुए से भिड़ गई। लगभग 20 मिनट तक संघर्ष हुआ। अंत में बेटी को बचा लिया।
सुनीता ने कहा कि लक्ष्मी से छोटा एक बेटा है। घर में बेटा और बेटी को एक ही नजर से देखा जाता है। बेटी के लिए तेंदुआ क्या, यमराज से भी लड़ सकती हूं।
‘बेटी ही जिंदगी है’
मऊ जिले के बनकटी रामपुर जोलीघाट निवासी सिंधू पत्नी कल्पू की रिश्तेदारी सुजौली थाना क्षेत्र के मटेही रमपुरवा गांव में है। वह अपने भाई के घर बीते माह आई हुई थी।
सिंधू ने बताया कि मांगलिक कार्यक्रम के कारण हंसी खुशी का माहौल था। बेटी खुशबू के साथ शाम को खेत जाने के लिए निकली। तभी तेंदुए ने आगे चल रही बेटी पर झपट्टा मारा। पास में ही पड़े गन्ने को उठाकर तेंदुए से संघर्ष किया। बेटी की जान बच गई। सिंधू ने कहा कि बेटी ही उसकी जिंदगी है।