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नहरों की सिल्ट बेचकर सिंचाई विभाग ने 81 लाख रुपये राजस्व कमाया

Wed, 30 Jan 2019 12:32 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jan 2019 12:32 AM IST
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नहरों की सिल्ट बेचकर सिंचाई विभाग ने 81 लाख रुपये राजस्व कमाया
नहरों की सिल्ट बेचकर सिंचाई विभाग ने 81 लाख रुपये राजस्व कमाया
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बाराबंकी। नहरों की सफाई से निकली सिल्ट बेचकर सिंचाई विभाग ने 81 लाख रुपये का राजस्व जुटाया है। सिल्ट की नीलामी प्रक्रिया अपनाने वाला सिंचाई विभाग प्रदेश का पहला ऐसा विभाग है।

जिलाधिकारी से मिले अनुमोदन के बाद विभाग ने इस प्रक्रिया को अपनाया है। अब इस प्रक्रिया को पूरे प्रदेश में लागू करने पर विचार चल रहा है। इसके लिए शासन ने पूरा विवरण उपलब्ध कराने के आदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दिए हैं।
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नहरों से सिल्ट सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये प्रतिवर्ष खर्च किए जाते हैं। इसके बाद भी नहरें साफ नहीं हो पाती थी और आए दिन नहरों के कटने की वजह से किसानों की सैकड़ों बीघे फसल जलमग्न हो जाती थी।
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आरोप लगते थे कि नहरों की सफाई के बाद सिल्ट नहर पटरियों पर ही डालने की वजह से नहरें फिर से सिल्ट से पटने की वजह से कट जाती हैं और लोगों को आवागमन में भी दिक्कतें होती थी। इससे निजात पाने के लिए सिंचाई विभाग ने एक प्रस्ताव तैयार कर जिलाधिकारी के पास अनुमोदन के लिए भेजा।

जिसमें कहा गया कि नहरों से निकलने वाली सिल्ट की नीलामी करा दी जाए तो इससे विभाग को राजस्व भी मिलेगा और नहरों के कटने तथा लोगों को आवागमन को लेकर जो शिकायतें हैं वह भी दूर हो जाएंगी।

जिलाधिकारी से मिले अनुमोदन के बाद विभाग ने इस प्रक्रिया को अपनाकर जिले की 25 नहरों पर पड़ी सिल्ट की नीलामी कराई। इससे विभाग को करीब 81 लाख रुपये राजस्व प्राप्त हुआ। इस प्रक्रिया को अपनाने वाला सिंचाई विभाग प्रदेश का पहला ऐसा जिला बना है।

इसे अब प्रयोग के तौर पर पूरे प्रदेश में लागू करने पर विचार चल रहा है। शासन ने इसकी विस्तृत रिपोर्ट सिंचाई विभाग को उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। शासन से मिले आदेश के बाद विभाग इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार करने में लगा हुआ है।

सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सुप्रभात सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी से मिले अनुमोदन के बाद इस बार नहरों की सफाई से निकली सिल्ट के नीलामी की प्रक्रिया अपनाई गई। जिले की 25 नहरों से निकली सिल्ट बेचकर अब तक 81 लाख रुपये राजस्व प्राप्त हो चुका है।


इसका लक्ष्य करीब एक करोड़ रुपये रखा गया है। सिल्ट की नीलामी प्रक्रिया अपनाने वाला सिंचाई विभाग प्रदेश का पहला ऐसा विभाग है। अब इसे प्रदेश स्तर पर लागू करने पर विचार चल रहा है।
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