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अर्ध वार्षिक परीक्षा से एक लाख बच्चों ने बनाई दूरी
Updated Wed, 31 Oct 2018 10:16 PM IST
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अर्ध वार्षिक परीक्षा से डेढ़ लाख बच्चों ने बनाई दूरी
गोंडा। परिषदीय स्कूलों की अर्ध वार्षिक परीक्षा से बड़ी संख्या में छात्र दूरी बना रहे हैं। सोमवार से शुरू हुई परीक्षा में पहले दिन तो बच्चों में उत्साह दिखा लेकिन उसके बाद उपस्थिति में गिरावट चौंकाने वाली है।
मंगलवार को ही उपस्थिति में एक लाख 482 बच्चों की कमी पाई गई है। मध्याह्न भोजन योजना की ऑनलाइन निगरानी में रिकार्ड की गई बच्चों की अनुपस्थिति चौंकाने वाली है।
3140 स्कूलों में तीन लाख 37 हजार 52 बच्चे पंजीकृत हैं। मंगलवार की रिपोर्ट बुधवार को जिले को मिली है। जिसमें दो लाख 36 हजार 570 छात्रों की उपस्थिति पाई गई है।
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इस तरह परीक्षा से एक लाख से अधिक बच्चों ने मुंह मोड़ लिया है। परीक्षा में इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की उपस्थिति घटने से विभाग को झटका लगा है।
जिले के 16 ब्लॉकों में विभाग के अधिकारियों की निगरानी में सोमवार को अर्ध वार्षिक परीक्षा शुरू हुई थी। बुधवार को परीक्षा में बच्चों के प्रतिभाग की जानकारी की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
एक लाख 52 बच्चे परीक्षा में भाग ही नहीं ले रहे हैं। इसके कारण और निवारण के लिए विभाग में मंथन हो रहा है।
बताया जा रहा है कि कक्षा एक में बच्चों की उपस्थिति तो अच्छी है लेकिन जैसे-जैसे कक्षाएं बढ़ रही हैं छात्रों की उपस्थिति पर असर दिख रहा है।
बुधवार को मिली जानकारी के मुताबिक, प्राइमरी स्कूल में 2.38 लाख से अधिक बच्चों में से 1.81 लाख बच्चे ही मंगलवार को परीक्षा देने पहुंचे।
इसी तरह जूनियर हाईस्कूलों में 70 हजार से अधिक बच्चों में से 55446 बच्चे ही स्कूल आए। इन्हीं बच्चों ने एमडीएम भी ग्रहण किया। वैसे विभाग की रिपोर्ट के अनुसार करीब 300 स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों की उपस्थिति अच्छी है।
परिषदीय स्कूलों के 3.37 लाख बच्चों को किताबें मुहैया कराने में विभाग को पसीना छूट गया था। शासन स्तर से ही किताबें सितंबर माह तक भेजी जा सकीं है।
इससे अक्तूबर तक वितरण ही होता रहा है और फिर अक्तूबर में ही परीक्षा की तिथि सत्र के आधार पर तय कर दी गई। अप्रैल से शुरू हुए शैक्षिक सत्र में जुलाई तक एक भी किताब नहीं दी जा सकी थी।
अगस्त और सितंबर में किताबें मिलनी शुरू हुईं। इस वजह से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित रही। किताबों को स्कूलों तक पहुंचाने में बहुत तेजी के बाद भी वक्त लगा।
शिक्षक नेता आनंद त्रिपाठी का कहना है कि किताबें समय से नहीं दी गईं थीं। फिर भी परीक्षा में उपस्थिति अच्छी है। एक लाख से कम बच्चों के सवाल पर कहा कि परीक्षा से बच्चों में डर रहता है।
शिक्षक अशोक पांडेय कहते हैं कि परीक्षा में सभी को पास ही करना होता है। ऐसे में बच्चे परीक्षा को भी आम दिनों की तरह ही मानते हैं। गैर हाजिरी स्थानीय कारणों से भी होती है।
बीएसए मनिराम सिंह का कहना है कि बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। उपस्थिति में गिरावट नहीं आई है, बस कमी है।
परीक्षा में जो बच्चे नहीं आ रहे हैं, उनके अभिभावकों से संपर्क करने के लिए शिक्षकों को कहा गया है। कुछ स्कूलों में लापरवाही भी है लेकिन बहुत से स्कूल हैं जहां उपस्थिति बेहतर है।
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गोंडा। परिषदीय स्कूलों की अर्ध वार्षिक परीक्षा से बड़ी संख्या में छात्र दूरी बना रहे हैं। सोमवार से शुरू हुई परीक्षा में पहले दिन तो बच्चों में उत्साह दिखा लेकिन उसके बाद उपस्थिति में गिरावट चौंकाने वाली है।
मंगलवार को ही उपस्थिति में एक लाख 482 बच्चों की कमी पाई गई है। मध्याह्न भोजन योजना की ऑनलाइन निगरानी में रिकार्ड की गई बच्चों की अनुपस्थिति चौंकाने वाली है।
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3140 स्कूलों में तीन लाख 37 हजार 52 बच्चे पंजीकृत हैं। मंगलवार की रिपोर्ट बुधवार को जिले को मिली है। जिसमें दो लाख 36 हजार 570 छात्रों की उपस्थिति पाई गई है।
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इस तरह परीक्षा से एक लाख से अधिक बच्चों ने मुंह मोड़ लिया है। परीक्षा में इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की उपस्थिति घटने से विभाग को झटका लगा है।
जिले के 16 ब्लॉकों में विभाग के अधिकारियों की निगरानी में सोमवार को अर्ध वार्षिक परीक्षा शुरू हुई थी। बुधवार को परीक्षा में बच्चों के प्रतिभाग की जानकारी की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
एक लाख 52 बच्चे परीक्षा में भाग ही नहीं ले रहे हैं। इसके कारण और निवारण के लिए विभाग में मंथन हो रहा है।
बताया जा रहा है कि कक्षा एक में बच्चों की उपस्थिति तो अच्छी है लेकिन जैसे-जैसे कक्षाएं बढ़ रही हैं छात्रों की उपस्थिति पर असर दिख रहा है।
बुधवार को मिली जानकारी के मुताबिक, प्राइमरी स्कूल में 2.38 लाख से अधिक बच्चों में से 1.81 लाख बच्चे ही मंगलवार को परीक्षा देने पहुंचे।
इसी तरह जूनियर हाईस्कूलों में 70 हजार से अधिक बच्चों में से 55446 बच्चे ही स्कूल आए। इन्हीं बच्चों ने एमडीएम भी ग्रहण किया। वैसे विभाग की रिपोर्ट के अनुसार करीब 300 स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों की उपस्थिति अच्छी है।
परिषदीय स्कूलों के 3.37 लाख बच्चों को किताबें मुहैया कराने में विभाग को पसीना छूट गया था। शासन स्तर से ही किताबें सितंबर माह तक भेजी जा सकीं है।
इससे अक्तूबर तक वितरण ही होता रहा है और फिर अक्तूबर में ही परीक्षा की तिथि सत्र के आधार पर तय कर दी गई। अप्रैल से शुरू हुए शैक्षिक सत्र में जुलाई तक एक भी किताब नहीं दी जा सकी थी।
अगस्त और सितंबर में किताबें मिलनी शुरू हुईं। इस वजह से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित रही। किताबों को स्कूलों तक पहुंचाने में बहुत तेजी के बाद भी वक्त लगा।
शिक्षक नेता आनंद त्रिपाठी का कहना है कि किताबें समय से नहीं दी गईं थीं। फिर भी परीक्षा में उपस्थिति अच्छी है। एक लाख से कम बच्चों के सवाल पर कहा कि परीक्षा से बच्चों में डर रहता है।
शिक्षक अशोक पांडेय कहते हैं कि परीक्षा में सभी को पास ही करना होता है। ऐसे में बच्चे परीक्षा को भी आम दिनों की तरह ही मानते हैं। गैर हाजिरी स्थानीय कारणों से भी होती है।
बीएसए मनिराम सिंह का कहना है कि बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। उपस्थिति में गिरावट नहीं आई है, बस कमी है।
परीक्षा में जो बच्चे नहीं आ रहे हैं, उनके अभिभावकों से संपर्क करने के लिए शिक्षकों को कहा गया है। कुछ स्कूलों में लापरवाही भी है लेकिन बहुत से स्कूल हैं जहां उपस्थिति बेहतर है।