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यूपी: 16 सहकारी बैंकों को मिलेगी जिंदगी
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 19 Sep 2014 04:24 PM IST
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बंदी के संकट से जूझ रहे प्रदेश के 16 जिला सहकारी बैंकों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। केंद्र सरकार इन बैंकों को मदद पर राजी हो गई है।
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फिलहाल केंद्र सिर्फ 283 करोड़ रुपये ही देने को तैयार है, जबकि राज्य सरकार 1393 करोड़ रुपये की मदद चाहती है। केंद्र सरकार के सकारात्मक रुख को देखते हुए बैंक कर्मचारियों को उम्मीद है कि जल्द ही बीच का कोई रास्ता निकल आएगा।
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सहकारी संस्थाओं के पुनरुत्थान के लिए बैद्यनाथ समिति ने अलग-अलग पैकेज देने की सिफारिश केंद्र सरकार से की थी। इसके तहत यूपी के जिला सहकारी बैंकों को केंद्र सरकार ने 1545.69 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई थी।
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इसमें 623.41 करोड़ रुपया दे भी दिया था। साथ ही यह कहा था कि शेष 922.28 करोड़ रुपया तब मिलेगा जब राज्य सरकार बैद्यनाथन कमेटी के मुताबिक कुछ शर्तें पूरी कर देगी।
इसके तहत बैंकों का स्वतंत्र बोर्ड बनना था। साथ ही निदेशक व्यवस्था खत्म करके बैंकों के संचालन का अधिकार बैंक प्रबंध समिति को देना था।
शर्तें पूरी नहीं हुई तो बढ़ी मुसीबत
इन शर्तो को जून 2011 तक पूरा करना था लेकिन तत्कालीन राज्य सरकार ने इन्हें पूरा नहीं किया। नतीजतन पैकेज का शेष धन अटक गया।
केंद्र सरकार ने इसे देने से मना कर दिया। मोदी सरकार से इन बैंकों के कर्मचारियों ने फिर मदद की गुहार लगाई। कोऑपरेटिव बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेन्द्र मिश्र से 31 जुलाई को मुलाकात की थी।
इसके बाद केंद्र सरकार ने 283 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई। एसोसिएशन के संरक्षक राजेश्वर सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार के पत्र के जवाब में राज्य सरकार ने 28 अगस्त को जवाब भेज दिया है।
इन बैंकों पर मंडरा रहा संकट
जिला सहकारी बैंक फैजाबाद, बहराइच, सुल्तानपुर, गाजीपुर, वाराणसी, हरदोई, आजमगढ़, बस्ती, इलाहाबाद, सीतापुर, बलिया, फतेहपुर, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, जौनपुर व देवरिया।