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नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ डाला छठ पर्व
Updated Tue, 24 Oct 2017 11:02 PM IST
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अंबेडकरनगर। नहाय-खाय परंपरा के साथ ही मंगलवार से जिले में डाला छठ पर्व की शुरुआत हुई। महिलाओं ने रोटी, चने की दाल व लौकी की सब्जी का सेवन किया। बुधवार से महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी। इसके बाद शुक्रवार को वे उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी। इस बीच डाला छठ पर्व को लेकर शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
पूर्वांचल में तेजी से बढ़ रहे डाला छठ पर्व की शुरुआत 24 अक्तूबर को नहाय-खाय की परंपरा के साथ हुई। पर्व को लेकर यूं तो एक दिन पहले ही महिलाओं ने आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली थीं। बाजारों में खासी रौनक देखने को मिली। जरूरी सामानों की खरीदारी ज्यादातर महिलाओं ने सोमवार को ही कर ली थी, जबकि कुछ महिलाओं ने शेष रह गई खरीदारी मंगलवार को पूरी की। इस बीच चार दिनी डाला छठ पर्व की शुरुआत का उल्लास मंगलवार को महिलाओं के बीच देखने को मिला। दिनभर आवश्यक काम निपटाने के बाद सायं स्नान आदि के बाद महिलाओं ने खासतौर पर चने की दाल व लौकी की सब्जी बनाई और रोटी के साथ उसका सेवन किया। महत्वपूर्ण पर्व में से एक माने जाने वाले इस त्योहार में महिलाओं ने आमतौर पर सामान्य बिस्तर का त्याग कर चटाई या तख्त पर ही सोने का क्रम शुरू कर दिया। कई घरों में तो लहसुन व प्याज का प्रयोग भी चार दिन तक वर्जित रहेगा।
अकबरपुर नगर की नूतन श्रीवास्तव ने बताया कि वे लंबे समय से इस पर्व को मनाती आ रही हैं। इससे उन्हें व्यापक सुकून व शांति का अहसास होता है। पति की दीर्घायु व पुत्र की प्राप्ति और सलामती के लिए मनाए जाने वाले इस पर्व के बारे में बताते हुए नूतन ने कहा कि बुधवार को खरना परंपरा का निर्वाह होगा। इसके बाद निर्जला व्रत की शुरुआत होगी, जो शुक्रवार सुबह तक चलेगी। जलालपुर की रेखा ने बताया कि बुधवार शाम से शुरू होने वाले निर्जला व्रत के अगले दिन डूबते सूरज को कमर भर पानी में खड़े होकर अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद शुक्रवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण होगा। इसी तरह कई अन्य महिलाओं ने भी बताया कि व्रत को लेकर उन्होंने खास तैयारियां की हैं, जिसमें परिवारीजनों का भी सहयोग शामिल है।
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पूर्वांचल में तेजी से बढ़ रहे डाला छठ पर्व की शुरुआत 24 अक्तूबर को नहाय-खाय की परंपरा के साथ हुई। पर्व को लेकर यूं तो एक दिन पहले ही महिलाओं ने आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली थीं। बाजारों में खासी रौनक देखने को मिली। जरूरी सामानों की खरीदारी ज्यादातर महिलाओं ने सोमवार को ही कर ली थी, जबकि कुछ महिलाओं ने शेष रह गई खरीदारी मंगलवार को पूरी की। इस बीच चार दिनी डाला छठ पर्व की शुरुआत का उल्लास मंगलवार को महिलाओं के बीच देखने को मिला। दिनभर आवश्यक काम निपटाने के बाद सायं स्नान आदि के बाद महिलाओं ने खासतौर पर चने की दाल व लौकी की सब्जी बनाई और रोटी के साथ उसका सेवन किया। महत्वपूर्ण पर्व में से एक माने जाने वाले इस त्योहार में महिलाओं ने आमतौर पर सामान्य बिस्तर का त्याग कर चटाई या तख्त पर ही सोने का क्रम शुरू कर दिया। कई घरों में तो लहसुन व प्याज का प्रयोग भी चार दिन तक वर्जित रहेगा।
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अकबरपुर नगर की नूतन श्रीवास्तव ने बताया कि वे लंबे समय से इस पर्व को मनाती आ रही हैं। इससे उन्हें व्यापक सुकून व शांति का अहसास होता है। पति की दीर्घायु व पुत्र की प्राप्ति और सलामती के लिए मनाए जाने वाले इस पर्व के बारे में बताते हुए नूतन ने कहा कि बुधवार को खरना परंपरा का निर्वाह होगा। इसके बाद निर्जला व्रत की शुरुआत होगी, जो शुक्रवार सुबह तक चलेगी। जलालपुर की रेखा ने बताया कि बुधवार शाम से शुरू होने वाले निर्जला व्रत के अगले दिन डूबते सूरज को कमर भर पानी में खड़े होकर अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद शुक्रवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण होगा। इसी तरह कई अन्य महिलाओं ने भी बताया कि व्रत को लेकर उन्होंने खास तैयारियां की हैं, जिसमें परिवारीजनों का भी सहयोग शामिल है।
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