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Lucknow News: जांच रिपोर्ट के लिए 15 दिन का इंतजार, दीवारों पर चस्पा किया गया बदहाली का नोटिस
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लैब के बाहर चस्पा नोटिस।
लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। अस्पताल की माइक्रोबायोलॉजी लैब में जांच कराने वाले मरीजों को रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। हालत यह है कि हेपेटाइटिस व सी वायरल लोड जैसी गंभीर बीमारियों की रिपोर्ट मिलने में 10 से 15 दिन का समय लग रहा है, जिससे मरीजों का इलाज बीच में ही अटका हुआ है।
हैरानी की बात यह है कि लैब प्रशासन ने अपनी सुस्ती को छिपाने के बजाय दीवार पर बाकायदा नोटिस चस्पा कर दिया है कि रिपोर्ट 10 से 15 दिन बाद मिलेगी, जबकि अन्य सरकारी चिकित्सा संस्थानों में हेपेटाइटिस-बी और सी वायरल लोड की जांच रिपोर्ट तीन से चार दिन में मिल जाती है।
इस बारे में अस्पताल के सीएमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने कहा कि संबंधित विभाग को निर्देश दिए जाएंगे कि जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
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इन जांच के लिए भी भटक रहे मरीज
कल्चर रिपोर्ट: ब्लड कल्चर और सेंसिविटी की रिपोर्ट के लिए 5 से 7 दिन, जबकि यूरिन व स्टूल कल्चर के लिए 3 से 4 दिन का समय लग रहा है।
ओपीडी जांच ठप: ओपीडी में आने वाले मरीजों की पीटीसी आईएनआर जांच पूरी तरह बंद है। यह सुविधा केवल भर्ती और इमरजेंसी मरीजों तक सीमित कर दी गई है। इसके चलते साधारण मरीजों को निजी केंद्रों पर महंगी जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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हैरानी की बात यह है कि लैब प्रशासन ने अपनी सुस्ती को छिपाने के बजाय दीवार पर बाकायदा नोटिस चस्पा कर दिया है कि रिपोर्ट 10 से 15 दिन बाद मिलेगी, जबकि अन्य सरकारी चिकित्सा संस्थानों में हेपेटाइटिस-बी और सी वायरल लोड की जांच रिपोर्ट तीन से चार दिन में मिल जाती है।
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इस बारे में अस्पताल के सीएमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने कहा कि संबंधित विभाग को निर्देश दिए जाएंगे कि जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
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इन जांच के लिए भी भटक रहे मरीज
कल्चर रिपोर्ट: ब्लड कल्चर और सेंसिविटी की रिपोर्ट के लिए 5 से 7 दिन, जबकि यूरिन व स्टूल कल्चर के लिए 3 से 4 दिन का समय लग रहा है।
ओपीडी जांच ठप: ओपीडी में आने वाले मरीजों की पीटीसी आईएनआर जांच पूरी तरह बंद है। यह सुविधा केवल भर्ती और इमरजेंसी मरीजों तक सीमित कर दी गई है। इसके चलते साधारण मरीजों को निजी केंद्रों पर महंगी जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।