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92 साल से लोगों को ‘रोशनी’ दे रहा सीतापुर आंख अस्पताल
Updated Mon, 23 Apr 2018 11:04 PM IST
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92 साल से लोगों को ‘रोशनी’ दे रहा सीतापुर आंख अस्पताल
सीतापुर। एक छोटे से कमरे में शुरू हुआ सीतापुर आंख अस्पताल आज वट वृक्ष का रूप ले चुका है। इसकी शाखाएं सीतापुर ही नहीं बल्कि यूपी व उत्तराखंड तक फैली हैं। जिनमें आंख संबंधी हर बीमारी का सस्ती दर पर बेहतरीन इलाज होता है।
सीतापुर में आसपास के जिले ही नहीं बल्कि कई प्रांतों के मरीज यहां इलाज कराने आते हैं। इसकी सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले बरस में यहां आंखों के 27 हजार ऑपरेशन हुए थे। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को विधायक सुरेश राही से संवाद करते हुए सीतापुर आंख अस्पताल की तारीफ की थी।
सन 1926 में डॉ. एमपी मेहरे ने एक छोटे से कमरे में इस अस्पताल की नींव डाली थी। उस समय केवल डॉ. एमपी मेहरे ही मरीजों को देखकर सामान्य तरीके से इलाज करते थे। तब यहां जांच की कोई सुविधा नहीं थी। धीरे-धीरे अस्पताल चलता रहा।
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1955 आते-आते इस अस्पताल का विस्तार होने लगा। अस्पताल में जांच की सुविधा सहित कई प्रतिष्ठित चिकित्सक आ गए। 1955 में ये अस्पताल सीतापुर ही नहीं बल्कि एशिया में आंख का नंबर वन अस्पताल बन गया। इसके चलते यहां पूरे देश ही नहीं विदेशों तक से मरीज आने लगे।
1980 तक दिन प्रतिदिन अस्पताल ऊंचाइयां छूता रहा। अस्पताल में जांच के साथ ही बेहतर तकनीक से ऑपरेशन होने लगे। साथ ही भवन बनने लगा। मगर 1980 के बाद अस्पताल में कुछ गिरावट आई। कई चिकित्सक यहां से नौकरी छोड़कर बाहर चले गए।
मगर 2009 से अस्पताल ने फिर रफ्तार पकड़ी। यहां कई अत्याधुनिक जांचों की व्यवस्था शुरू हो गई। भवन का विस्तार भी हुआ। अब आंख संबंधी इलाज की ऐसी कोई सुविधा नहीं बची जो इस अस्पताल में न हो। अत्याधुनिक मशीनों से सुसज्जित अस्पताल हर ओर अपनी छटा बिखेर रहा है।
इस समय अस्पताल में करीब 40 डॉक्टर काम कर रहे हैं। यहां अब इलाज के साथ ही पढ़ाई व रिसर्च भी होती है। यहां प्रतिवर्ष सेमिनार आयोजित होते हैं, जिनमें देश के सर्वश्रेष्ठ आंख के चिकित्सक शामिल होते हैं। इस समय यूपी व उत्तराखंड में इस अस्पताल की 32 शाखाएं हैं।
सीतापुर आंख अस्पताल को राय साहेब अवार्ड, राय बहादुर अवार्ड, कैसर-ए-हिंदी अवार्ड, राज्य विधानसभा सदस्य अवार्ड, पद्मश्री अवार्ड, पद्मभूषण अवार्ड, डॉ. बीसी राय अवार्ड समेत कई अवार्ड मिल चुके हैं।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, इस समय यहां रेटिना, ग्लूकोमा, भेंगापन, प्लास्टिक सर्जरी, ट्रांसप्लांट, बच्चों की आंख, मोतियाबिंद आदि के ऑपरेशन की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। जिसमें गरीब तबके के लोगों का इलाज व ऑपरेशन निशुल्क किया जाता है। अन्य लोगों को भी कम पैसे में ही बेहतर सुविधाएं मिलती हैं।
कर्नल डॉ. मधु भदौरिया ने बताया कि, सीतापुर आंख अस्पताल में अब तक राष्ट्रपति सहित कई प्रधानमंत्री आ चुके हैं। इनमें पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी सहित कई अन्य प्रधानमंत्री शामिल हैं। इसके अलावा इंदिरा गांधी ने तो इसी अस्पताल में अपनी आंखों का ऑपरेशन भी कराया था। इसके अलावा नेपाल नरेश भी यहां इलाज कराने आए थे। वहीं, देश का प्रतिष्ठित मफतलाल परिवार के सदस्य भी इस अस्पताल में इलाज करा चुके हैं।
कर्नल डॉ. मधु भदौरिया ने बताया कि, इस समय अस्पताल में आंख संबंधी हर मर्ज का इलाज उपलब्ध है। कई प्रांतों तक से मरीज आते हैं। रोजाना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। आने वाले दिनों में इसमें और इजाफा होगा।
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सीतापुर। एक छोटे से कमरे में शुरू हुआ सीतापुर आंख अस्पताल आज वट वृक्ष का रूप ले चुका है। इसकी शाखाएं सीतापुर ही नहीं बल्कि यूपी व उत्तराखंड तक फैली हैं। जिनमें आंख संबंधी हर बीमारी का सस्ती दर पर बेहतरीन इलाज होता है।
सीतापुर में आसपास के जिले ही नहीं बल्कि कई प्रांतों के मरीज यहां इलाज कराने आते हैं। इसकी सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले बरस में यहां आंखों के 27 हजार ऑपरेशन हुए थे। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को विधायक सुरेश राही से संवाद करते हुए सीतापुर आंख अस्पताल की तारीफ की थी।
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सन 1926 में डॉ. एमपी मेहरे ने एक छोटे से कमरे में इस अस्पताल की नींव डाली थी। उस समय केवल डॉ. एमपी मेहरे ही मरीजों को देखकर सामान्य तरीके से इलाज करते थे। तब यहां जांच की कोई सुविधा नहीं थी। धीरे-धीरे अस्पताल चलता रहा।
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1955 आते-आते इस अस्पताल का विस्तार होने लगा। अस्पताल में जांच की सुविधा सहित कई प्रतिष्ठित चिकित्सक आ गए। 1955 में ये अस्पताल सीतापुर ही नहीं बल्कि एशिया में आंख का नंबर वन अस्पताल बन गया। इसके चलते यहां पूरे देश ही नहीं विदेशों तक से मरीज आने लगे।
1980 तक दिन प्रतिदिन अस्पताल ऊंचाइयां छूता रहा। अस्पताल में जांच के साथ ही बेहतर तकनीक से ऑपरेशन होने लगे। साथ ही भवन बनने लगा। मगर 1980 के बाद अस्पताल में कुछ गिरावट आई। कई चिकित्सक यहां से नौकरी छोड़कर बाहर चले गए।
मगर 2009 से अस्पताल ने फिर रफ्तार पकड़ी। यहां कई अत्याधुनिक जांचों की व्यवस्था शुरू हो गई। भवन का विस्तार भी हुआ। अब आंख संबंधी इलाज की ऐसी कोई सुविधा नहीं बची जो इस अस्पताल में न हो। अत्याधुनिक मशीनों से सुसज्जित अस्पताल हर ओर अपनी छटा बिखेर रहा है।
इस समय अस्पताल में करीब 40 डॉक्टर काम कर रहे हैं। यहां अब इलाज के साथ ही पढ़ाई व रिसर्च भी होती है। यहां प्रतिवर्ष सेमिनार आयोजित होते हैं, जिनमें देश के सर्वश्रेष्ठ आंख के चिकित्सक शामिल होते हैं। इस समय यूपी व उत्तराखंड में इस अस्पताल की 32 शाखाएं हैं।
सीतापुर आंख अस्पताल को राय साहेब अवार्ड, राय बहादुर अवार्ड, कैसर-ए-हिंदी अवार्ड, राज्य विधानसभा सदस्य अवार्ड, पद्मश्री अवार्ड, पद्मभूषण अवार्ड, डॉ. बीसी राय अवार्ड समेत कई अवार्ड मिल चुके हैं।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, इस समय यहां रेटिना, ग्लूकोमा, भेंगापन, प्लास्टिक सर्जरी, ट्रांसप्लांट, बच्चों की आंख, मोतियाबिंद आदि के ऑपरेशन की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। जिसमें गरीब तबके के लोगों का इलाज व ऑपरेशन निशुल्क किया जाता है। अन्य लोगों को भी कम पैसे में ही बेहतर सुविधाएं मिलती हैं।
कर्नल डॉ. मधु भदौरिया ने बताया कि, सीतापुर आंख अस्पताल में अब तक राष्ट्रपति सहित कई प्रधानमंत्री आ चुके हैं। इनमें पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी सहित कई अन्य प्रधानमंत्री शामिल हैं। इसके अलावा इंदिरा गांधी ने तो इसी अस्पताल में अपनी आंखों का ऑपरेशन भी कराया था। इसके अलावा नेपाल नरेश भी यहां इलाज कराने आए थे। वहीं, देश का प्रतिष्ठित मफतलाल परिवार के सदस्य भी इस अस्पताल में इलाज करा चुके हैं।
कर्नल डॉ. मधु भदौरिया ने बताया कि, इस समय अस्पताल में आंख संबंधी हर मर्ज का इलाज उपलब्ध है। कई प्रांतों तक से मरीज आते हैं। रोजाना मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। आने वाले दिनों में इसमें और इजाफा होगा।