हंगामे के बाद 14 और जिले सूखाग्रस्त घोषित
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विधानसभा में विपक्ष के जोरदार हंगामे के बाद सरकार ने 14 और जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया। 44 जिले इसके पहले सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं।
इस तरह प्रदेश में सूखा प्रभावित जिलों की संख्या 58 हो गई है। सोमवार को विधानसभा में विपक्ष ने सूखा प्रभावित जिलों में कोई राहत न पहुंचने का मामला उठाया था। राजस्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने सदन को बताया था कि 50 प्रतिशत से कम बरसात वाले 44 जिले सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं।
60 प्रतिशत से कम बारिश वाले 14 और जिलों को भी सूखाग्रस्त घोषित करने की कार्रवाई चल रही है। उन्होंने आपदा प्रभावित जिलों के लिए केंद्र से किसी तरह की मदद न मिलने का आरोप भी लगाया था।
देर शाम राजस्व विभाग ने राजधानी लखनऊ, गोंडा, सुल्तानपुर व रायबरेलीसहित 14 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया।
बताते चलें कि इन 14 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का फैसला करीब 20 दिन पहले ही हो गया था। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने अफसरों को तेजी से इस पर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था। मगर, शासन में लिखापढ़ी के चक्कर में विपक्ष के सवाल की नौबत आ गई।
किसानों को नहीं हो रहा कोई फायदा
किसान साल भर के भीतर सूखा, बाढ़ व ओलावृष्टि की विभीषिका का दंश झेल चुके हैं। प्रदेश के 58 जिलों को अब तक सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है।
मगर इसका कोई ठोस फायदा किसानों को नहीं मिल पाया है। राजस्व वसूली स्थगित होने के अलावा उन्हें राहत के नाम पर किसी तरह की मदद नहीं मिल सकी है।
केंद्र से मदद के आसरे में राज्य सरकार
प्रदेश ने केंद्र से ओलावृष्टि, सूखा और बाढ़ से हुए नुकसान में मदद के लिए करीब 5900 करोड़ रुपये की मांग की है।
प्रदेश सरकार का आरोप है कि केंद्र के मंत्री और अधिकारियों की टीम आपदा का जायजा लेकर लौट गई लेकिन एक पैसे की मदद नहीं दी। उसे केंद्र से मदद का इंतजार है।
केंद्र से जैसे ही मदद मिलेगी राहत पहुंचाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।