{"_id":"5b32673e4f1c1bb36e8b9e5e","slug":"131530029886-lucknow-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिछिया बाजार में कभी भी चल सकता है बुलडोजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिछिया बाजार में कभी भी चल सकता है बुलडोजर
Updated Tue, 26 Jun 2018 09:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट रेंज में आठ दशक से स्थापित बिछिया बाजार को वन विभाग ने अतिक्रमण क्षेत्र घोषित कर दिया है। बाजार में कभी भी बुलडोजर चल सकता है।
यहां लगभग 402 लोगों के मकान और दुकानें हैं। घोषणा के बाद सभी की धड़कने बढ़ गई हैं। वनाधिकारी कार्रवाई की बात कह रहे हैं। ऐसे में बाजार के लोग आंदोलन का मूड बना रहे हैं।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र 551 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। क्षेत्र के सात रेंजों में छह वन ग्राम हैं। इनको दशक भर पूर्व राजस्व ग्राम घोषित करने की कवायद शुरू हुईं।
विज्ञापन
लेकिन सरकार बदलने के साथ ही फाइलें अधिकारियों की टेबल पर दफन हो गईं। हालात ये हैं कि वन ग्रामों के लोग नारकीय जिंदगी जी रहे हैं।
हाल ही में वन विभाग की ओर से कतर्नियाघाट रेंज में बिछिया बाजार का सर्वे करवाया गया। इसके बाद वन विभाग की ओर से शासन को जो रिपोर्ट भेजी गई, उसमें बिछिया बाजार अतिक्रमण क्षेत्र घोषित कर दिया गया।
तत्कालीन वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक जब बिछिया बाजार की स्थापना हुई थी, उस समय 103 दुकानें थीं। लेकिन इस समय दुकानों की संख्या 150 व मकान 252 के आसपास है।
आवासीय भवन भी बने हुए हैं, जो अतिक्रमण कर बनाए गए हैं। ऐसे में वन विभाग ने अतिक्रमण को हटाने की अनुमति देने की भी रिपोर्ट लगाई है। अभी तक वन निदेशालय ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की है।
लेकिन यह तय है कि स्थानीय रिपोर्ट के आधार पर कभी भी बिछिया बाजार में बुलडोजर चल सकता है। इससे बाजारवासियों की तो धड़कनें तो बढ़ ही गई हैं, लोग आंदोलन का भी मूड बना रहे हैं।
आधे से अधिक क्षेत्र में है अतिक्रमण
डीएफओ जीपी सिंह का कहना है कि बिछिया बाजार में आधे से अधिक क्षेत्र में अतिक्रमण है। इसकी पुष्टि सर्वे से हो चुकी है। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। शासन के निर्देश के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
...तो कहां जाएंगे 300 परिवार
बिछिया बाजार को अतिक्रमण क्षेत्र घोषित किया गया तो सिर्फ 103 दुकानें बचेंगी। ऐसे में 300 परिवारों के लोग कहां जाएंगे, यह सवाल सभी को साल रहा है।
न सिर्फ उनकी रोजी-रोटी छिनेगी, बल्कि आवास भी छिन जाएगा। दरअसल, जंगल की जमीन को आवंटित करने की प्रक्रिया 1977 तक जारी रही। इसी दौरान कतर्नियाघाट को सेंक्चुरी क्षेत्र घोषित कर दिया गया।
फिर आवंटन की प्रक्रिया वन विभाग ने खत्म कर दी। लेकिन आबादी बढ़ती रही, जिसका नतीजा है कि मकान और दुकानें बढ़ी हैं।
राजस्व ग्राम घोषित करने की नहीं हुई कवायद
जंगल में बसे गांवों को राजस्व ग्राम घोषित करने के लिए आधे दशक पूर्व कवायद शुरू हुई थी। 592 फार्म जमा हुए थे। लेकिन इन आवेदनों को एसडीएम स्तर पर खारिज कर दिया गया था।
इनमें से 551 लोगों ने तत्कालीन जिलाधिकारी किंजल सिंह को पत्र सौंपकर अपील की थी। लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
आधे दशक पूर्व भवनियापुर के 17, बिछिया बाजार के दो और गोकुलपुर के 53 लोगों को पट्टा प्रदान किया गया था। लेकिन आज तक राजस्व ग्राम घोषित करने की कवायद नहीं हुई।
विज्ञापन
यहां लगभग 402 लोगों के मकान और दुकानें हैं। घोषणा के बाद सभी की धड़कने बढ़ गई हैं। वनाधिकारी कार्रवाई की बात कह रहे हैं। ऐसे में बाजार के लोग आंदोलन का मूड बना रहे हैं।
विज्ञापन
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र 551 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। क्षेत्र के सात रेंजों में छह वन ग्राम हैं। इनको दशक भर पूर्व राजस्व ग्राम घोषित करने की कवायद शुरू हुईं।
विज्ञापन
लेकिन सरकार बदलने के साथ ही फाइलें अधिकारियों की टेबल पर दफन हो गईं। हालात ये हैं कि वन ग्रामों के लोग नारकीय जिंदगी जी रहे हैं।
हाल ही में वन विभाग की ओर से कतर्नियाघाट रेंज में बिछिया बाजार का सर्वे करवाया गया। इसके बाद वन विभाग की ओर से शासन को जो रिपोर्ट भेजी गई, उसमें बिछिया बाजार अतिक्रमण क्षेत्र घोषित कर दिया गया।
तत्कालीन वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक जब बिछिया बाजार की स्थापना हुई थी, उस समय 103 दुकानें थीं। लेकिन इस समय दुकानों की संख्या 150 व मकान 252 के आसपास है।
आवासीय भवन भी बने हुए हैं, जो अतिक्रमण कर बनाए गए हैं। ऐसे में वन विभाग ने अतिक्रमण को हटाने की अनुमति देने की भी रिपोर्ट लगाई है। अभी तक वन निदेशालय ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की है।
लेकिन यह तय है कि स्थानीय रिपोर्ट के आधार पर कभी भी बिछिया बाजार में बुलडोजर चल सकता है। इससे बाजारवासियों की तो धड़कनें तो बढ़ ही गई हैं, लोग आंदोलन का भी मूड बना रहे हैं।
आधे से अधिक क्षेत्र में है अतिक्रमण
डीएफओ जीपी सिंह का कहना है कि बिछिया बाजार में आधे से अधिक क्षेत्र में अतिक्रमण है। इसकी पुष्टि सर्वे से हो चुकी है। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। शासन के निर्देश के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
...तो कहां जाएंगे 300 परिवार
बिछिया बाजार को अतिक्रमण क्षेत्र घोषित किया गया तो सिर्फ 103 दुकानें बचेंगी। ऐसे में 300 परिवारों के लोग कहां जाएंगे, यह सवाल सभी को साल रहा है।
न सिर्फ उनकी रोजी-रोटी छिनेगी, बल्कि आवास भी छिन जाएगा। दरअसल, जंगल की जमीन को आवंटित करने की प्रक्रिया 1977 तक जारी रही। इसी दौरान कतर्नियाघाट को सेंक्चुरी क्षेत्र घोषित कर दिया गया।
फिर आवंटन की प्रक्रिया वन विभाग ने खत्म कर दी। लेकिन आबादी बढ़ती रही, जिसका नतीजा है कि मकान और दुकानें बढ़ी हैं।
राजस्व ग्राम घोषित करने की नहीं हुई कवायद
जंगल में बसे गांवों को राजस्व ग्राम घोषित करने के लिए आधे दशक पूर्व कवायद शुरू हुई थी। 592 फार्म जमा हुए थे। लेकिन इन आवेदनों को एसडीएम स्तर पर खारिज कर दिया गया था।
इनमें से 551 लोगों ने तत्कालीन जिलाधिकारी किंजल सिंह को पत्र सौंपकर अपील की थी। लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
आधे दशक पूर्व भवनियापुर के 17, बिछिया बाजार के दो और गोकुलपुर के 53 लोगों को पट्टा प्रदान किया गया था। लेकिन आज तक राजस्व ग्राम घोषित करने की कवायद नहीं हुई।