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बढ़ रहे मरीज, घट गया दवाओं का बजट
Updated Sun, 15 Apr 2018 10:48 PM IST
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फैजाबाद। जनसंख्या में लगातार वृद्धि होने के साथ जिला महिला अस्पताल में प्रति वर्ष मरीजों की संख्या में भी इजाफा होता जा रहा है। ऐसे में यहां संसाधनों की वृद्धि व प्रचुर मात्रा में दवाओं की उपलब्धता के बजाय दवाओं का बजट हर साल कम किया जा रहा है। बीते तीन वर्षों में यहां दवाओं का बजट घटकर तिहाई तक पहुंच गया है। इसकी वजह से प्रसूताओं को बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं प्रदान करने में दिक्कतें आ रही हैं।
जिले की आधी आबादी के इलाज का एक प्रमुख स्थल जिला महिला अस्पताल है। यहां पर कुल 168 बेड स्वीकृत हैं, जिसमें से निजी वार्ड को मिलाकर कुल 138 बेड मौके पर क्रियाशील हैं। इसी में शीघ्र ही निर्मित हुआ 14 बेड का एसएनसीयू भी शामिल है। इसके अतिरिक्त यहां प्रतिदिन ओपीडी में करीब दो से तीन सौ तक मरीज पहुंचते हैं, जबकि रोज 25 से 30 नए मरीज भर्ती होते हैं। प्रत्येक माह औसतन 100 से 120 तक सीजेरियन प्रसव व करीब 300 नार्मल प्रसव भी किए जाते हैं। जिले की 11 सीएचसी व 27 पीएचसी पर संसाधनों व स्त्री रोग विशेषज्ञों का अकाल होने से यहां पर मरीजों का और बोझ है। साल-दर-साल यहां प्रसूताओं व मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है, लेकिन प्रत्येक वित्तीय वर्ष में दवाओं के लिए बजट घटता जा रहा है। बीते 2015 से 2017 के मध्य यह बजट करीब तिहाई तक पहुंच गया है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वर्ष 2015 व इससे पूर्व के वर्षों में जब प्रतिदिन की ओपीडी 150 तक थी और अधिकांश मरीज स्वत: प्रसव करा लेते थे। तब दवाओं के लिए करीब 83 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया जाता था। अब जागरूकता व स्वास्थ्य के प्रति सजगता और आबादी बढ़ने के साथ-साथ मरीजों की तादाद भी बढ़ रही है तो पिछले वर्ष में दवाओं का बजट 34 लाख तक खिसक गया। ऐसे में प्रसूताओं व नवजात शिशुओं के बेहतर इलाज व देखभाल में अड़चनें भी आ रही हैं। गर्भवती महिलाओं के बेहतर प्रसव व स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद प्रमुख दवा आयरन व कैल्शियम तक का अकाल एक माह पहले तक बरकरार रहा। काफी जद्दोजहद के बाद पिछले करीब पांच माह बाद कैल्शियम का प्रबंध हो सका है। मौजूदा समय में 102 टेबलेट व 74 इंजेक्शन से काम चलाया जा रहा है। ऐसे ही अनेक आवश्यक दवाओं व अन्य संसाधनों की कमी से जिला महिला अस्पताल में वर्ष भर मारामारी की स्थिति रहती है। हालांकि इस बार दवाओं की खरीद प्रणाली में शासन की ओर से कुछ फेरबदल किया गया है। इस बार कुल आवश्यक दवाओं की मात्रा के साथ डाटा ऑनलाइन मांगा गया है, जिसमें सभी आवश्यक 224 दवाओं की सूची अपलोड की गई है।
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पिछले तीन वर्ष की दवाओं के बजट पर एक नजर
वर्ष धनराशि (लाख)
2015 83
2016 69
2017 34
प्रतिवर्ष जिला महिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है, लेकिन दवाओं का बजट कम होता जा रहा है। इस बार कुछ परिवर्तन हुआ है। 224 दवाओं की ऑनलाइन डिमांड की गई है। स्वीकृति मिली तो मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा सकती हैं।
-डॉ श्रीकांत शुक्ला, सीएमएस जिला महिला अस्पताल फैजाबाद
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जिले की आधी आबादी के इलाज का एक प्रमुख स्थल जिला महिला अस्पताल है। यहां पर कुल 168 बेड स्वीकृत हैं, जिसमें से निजी वार्ड को मिलाकर कुल 138 बेड मौके पर क्रियाशील हैं। इसी में शीघ्र ही निर्मित हुआ 14 बेड का एसएनसीयू भी शामिल है। इसके अतिरिक्त यहां प्रतिदिन ओपीडी में करीब दो से तीन सौ तक मरीज पहुंचते हैं, जबकि रोज 25 से 30 नए मरीज भर्ती होते हैं। प्रत्येक माह औसतन 100 से 120 तक सीजेरियन प्रसव व करीब 300 नार्मल प्रसव भी किए जाते हैं। जिले की 11 सीएचसी व 27 पीएचसी पर संसाधनों व स्त्री रोग विशेषज्ञों का अकाल होने से यहां पर मरीजों का और बोझ है। साल-दर-साल यहां प्रसूताओं व मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है, लेकिन प्रत्येक वित्तीय वर्ष में दवाओं के लिए बजट घटता जा रहा है। बीते 2015 से 2017 के मध्य यह बजट करीब तिहाई तक पहुंच गया है।
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अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वर्ष 2015 व इससे पूर्व के वर्षों में जब प्रतिदिन की ओपीडी 150 तक थी और अधिकांश मरीज स्वत: प्रसव करा लेते थे। तब दवाओं के लिए करीब 83 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया जाता था। अब जागरूकता व स्वास्थ्य के प्रति सजगता और आबादी बढ़ने के साथ-साथ मरीजों की तादाद भी बढ़ रही है तो पिछले वर्ष में दवाओं का बजट 34 लाख तक खिसक गया। ऐसे में प्रसूताओं व नवजात शिशुओं के बेहतर इलाज व देखभाल में अड़चनें भी आ रही हैं। गर्भवती महिलाओं के बेहतर प्रसव व स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद प्रमुख दवा आयरन व कैल्शियम तक का अकाल एक माह पहले तक बरकरार रहा। काफी जद्दोजहद के बाद पिछले करीब पांच माह बाद कैल्शियम का प्रबंध हो सका है। मौजूदा समय में 102 टेबलेट व 74 इंजेक्शन से काम चलाया जा रहा है। ऐसे ही अनेक आवश्यक दवाओं व अन्य संसाधनों की कमी से जिला महिला अस्पताल में वर्ष भर मारामारी की स्थिति रहती है। हालांकि इस बार दवाओं की खरीद प्रणाली में शासन की ओर से कुछ फेरबदल किया गया है। इस बार कुल आवश्यक दवाओं की मात्रा के साथ डाटा ऑनलाइन मांगा गया है, जिसमें सभी आवश्यक 224 दवाओं की सूची अपलोड की गई है।
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पिछले तीन वर्ष की दवाओं के बजट पर एक नजर
वर्ष धनराशि (लाख)
2015 83
2016 69
2017 34
प्रतिवर्ष जिला महिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है, लेकिन दवाओं का बजट कम होता जा रहा है। इस बार कुछ परिवर्तन हुआ है। 224 दवाओं की ऑनलाइन डिमांड की गई है। स्वीकृति मिली तो मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा सकती हैं।
-डॉ श्रीकांत शुक्ला, सीएमएस जिला महिला अस्पताल फैजाबाद