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Lucknow News: कई बैंक खातों में ट्रांसफर हुए थे ठगी के 1.31 करोड़
Fri, 30 Jan 2026 02:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 30 Jan 2026 02:11 AM IST
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लखनऊ। जालसाजों ने काॅरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) फंड दिलाने के नाम पर एनजीओ से ठगे गए 1.31 करोड़ रुपये कई बैंक खातों में ट्रांसफर किए थे। यह बात पुलिस की तफ्तीश में सामने आई है।
27 जनवरी को गोमतीनगर थाने में दिशा मानव कल्याण एवं उत्थान के सचिव बृजेश तिवारी ने चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आशंका है कि जालसाज अमरीष मिश्रा, डीपी यादव, राज और मास ने रकम को अपने खातों में लेने के लिए फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल किया था। साथ ही ये खाते अलग-अलग राज्यों में खोले गए थे। ठगी में बैंक कर्मियों की मिलीभगत भी होने की आशंका है। पुलिस ने सचिव बृजेश तिवारी से ठगी से संबंधित दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट मांगे हैं। साथ ही चारों आरोपियों के मोबाइल नंबरों को भी सर्विलांस पर लगाया गया है।
इंस्पेक्टर गोमतीनगर ब्रजेश चंद्र तिवारी के मुताबिक मामले की विवेचना चल रही है। बैंक स्टेटमेंट और दस्तावेज मिलने पर आगे की कार्रवाई होगी।
ये है मामला
करीब एक साल पहले अमरीष मिश्रा, डीपी यादव, राज और मास ने एनजीओ के सचिव से संपर्क किया था। फिर बीते वर्ष 14 सितंबर को आरोपियों ने मिलकर सचिव को एनजीओ को सीएसआर फंड दिलाने का झांसा दिया था। जाल में फंसने पर चारों ने उनसे एनजीओ के खातों की जानकारी, चेकबुक, पासबुक, यूजर आईडी व पासवर्ड हालिस कर लिए थे। फिर रकम पार कर दी थी।
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27 जनवरी को गोमतीनगर थाने में दिशा मानव कल्याण एवं उत्थान के सचिव बृजेश तिवारी ने चार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आशंका है कि जालसाज अमरीष मिश्रा, डीपी यादव, राज और मास ने रकम को अपने खातों में लेने के लिए फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल किया था। साथ ही ये खाते अलग-अलग राज्यों में खोले गए थे। ठगी में बैंक कर्मियों की मिलीभगत भी होने की आशंका है। पुलिस ने सचिव बृजेश तिवारी से ठगी से संबंधित दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट मांगे हैं। साथ ही चारों आरोपियों के मोबाइल नंबरों को भी सर्विलांस पर लगाया गया है।
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इंस्पेक्टर गोमतीनगर ब्रजेश चंद्र तिवारी के मुताबिक मामले की विवेचना चल रही है। बैंक स्टेटमेंट और दस्तावेज मिलने पर आगे की कार्रवाई होगी।
ये है मामला
करीब एक साल पहले अमरीष मिश्रा, डीपी यादव, राज और मास ने एनजीओ के सचिव से संपर्क किया था। फिर बीते वर्ष 14 सितंबर को आरोपियों ने मिलकर सचिव को एनजीओ को सीएसआर फंड दिलाने का झांसा दिया था। जाल में फंसने पर चारों ने उनसे एनजीओ के खातों की जानकारी, चेकबुक, पासबुक, यूजर आईडी व पासवर्ड हालिस कर लिए थे। फिर रकम पार कर दी थी।
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