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मूर्ति की जांच को नहीं पहुंची पुरातत्व विभाग की टीम
Updated Mon, 09 Jul 2018 12:17 AM IST
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जायस (रायबरेली)। अमेठी जिले के जायस कस्बे में शनिवार को खोदाई के दौरान मिलीं सैकड़ों वर्ष पुरानी मूर्ति को देखने के लिए लोगों का तांता लग रहा है।
यहां तक रविवार को भजन-कीर्तन भी हुआ। हालांकि जांच के लिए रविवार को पुरातत्व विभाग की टीम नहीं पहुंच सकी।
हालांकि देर रात एएसपी, सीओ तिलोई ने जायस कोतवाली पहुंचकर बरामद मूर्ति व उसके अवशेषों को देखा। गौैरतलब है कि जायस कस्बा निवासी चंदे सोनकर और जगदीश सोनकर कोतवाली के पास स्थित तालाब में मछली पालन का काम करते हैं।
शनिवार को तालाब को और गहरा करने के लिए खोदाई करा रहे थे। खुदाई के दौरान एक देवी जी की मूर्ति निकली। इसके अलावा कई मूर्तियों के अवशेष भी निकले थे।
कोतवाल रावेंद्र सिंह ने मूर्ति व अवशेष कब्जे में लेकर कोतवाली स्थित मंदिर में रखवा दिया था। साथ ही इसकी सूचना पुरातत्व विभाग के अलावा एसपी, एएसपी को दी थी।
रविवार को मूर्ति देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हुई। साथ ही कोतवाली स्थित मंदिर में कीर्तन-भजन शुरू हो गया।
भाजपा नेता नीरज सिंह, रोमिल, मकसूद अहमद, पूर्व ब्लाक प्रमुख बहादुरपुर रमेश सिंह, नगर पालिकाध्यक्ष महेश प्रताप सोनकर लोग भी कोतवाली पहुंचकर मूर्ति को देखा।
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नीरज सिंह ने बताया कि लगभग 11वी शताब्दी में बलुआ पत्थर से निर्मित दुर्गा जी की अष्टभुजा मूर्ति है। 1190ई0 में मोहम्मद गौरी के सेनापति सैय्यद सालार मसूद ने जब जायस पर आक्रमण किया था, उस समय यहां की प्राचीन मंदिरों को तोड़कर उनमें स्थापित मूर्तियों को एकत्र किया था।
उसके बाद जायस सूफी संतों का केंद्र बन गया, तब से किसी मुस्लिम शासक ने आक्त्रस्मण नहीं किया। इस आधार पर कहा जा सकता है कि यह मूर्तियां 11वीं शताब्दी की है।
अमेठी जिले के अपर पुलिस अधीक्षक बीसी दुबे, क्षेत्राधिकारी तिलोई पीयूष कांत राय ने कोतवाली पहुंचकर मूर्ति व उसके अवशेष को देखा। कोतवाल रविंद्र सिंह ने बताया कि पुरातत्व विभाग की टीम के सोमवार को पहुंचने की संभावना है।
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यहां तक रविवार को भजन-कीर्तन भी हुआ। हालांकि जांच के लिए रविवार को पुरातत्व विभाग की टीम नहीं पहुंच सकी।
हालांकि देर रात एएसपी, सीओ तिलोई ने जायस कोतवाली पहुंचकर बरामद मूर्ति व उसके अवशेषों को देखा। गौैरतलब है कि जायस कस्बा निवासी चंदे सोनकर और जगदीश सोनकर कोतवाली के पास स्थित तालाब में मछली पालन का काम करते हैं।
शनिवार को तालाब को और गहरा करने के लिए खोदाई करा रहे थे। खुदाई के दौरान एक देवी जी की मूर्ति निकली। इसके अलावा कई मूर्तियों के अवशेष भी निकले थे।
कोतवाल रावेंद्र सिंह ने मूर्ति व अवशेष कब्जे में लेकर कोतवाली स्थित मंदिर में रखवा दिया था। साथ ही इसकी सूचना पुरातत्व विभाग के अलावा एसपी, एएसपी को दी थी।
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रविवार को मूर्ति देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हुई। साथ ही कोतवाली स्थित मंदिर में कीर्तन-भजन शुरू हो गया।
भाजपा नेता नीरज सिंह, रोमिल, मकसूद अहमद, पूर्व ब्लाक प्रमुख बहादुरपुर रमेश सिंह, नगर पालिकाध्यक्ष महेश प्रताप सोनकर लोग भी कोतवाली पहुंचकर मूर्ति को देखा।
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नीरज सिंह ने बताया कि लगभग 11वी शताब्दी में बलुआ पत्थर से निर्मित दुर्गा जी की अष्टभुजा मूर्ति है। 1190ई0 में मोहम्मद गौरी के सेनापति सैय्यद सालार मसूद ने जब जायस पर आक्रमण किया था, उस समय यहां की प्राचीन मंदिरों को तोड़कर उनमें स्थापित मूर्तियों को एकत्र किया था।
उसके बाद जायस सूफी संतों का केंद्र बन गया, तब से किसी मुस्लिम शासक ने आक्त्रस्मण नहीं किया। इस आधार पर कहा जा सकता है कि यह मूर्तियां 11वीं शताब्दी की है।
अमेठी जिले के अपर पुलिस अधीक्षक बीसी दुबे, क्षेत्राधिकारी तिलोई पीयूष कांत राय ने कोतवाली पहुंचकर मूर्ति व उसके अवशेष को देखा। कोतवाल रविंद्र सिंह ने बताया कि पुरातत्व विभाग की टीम के सोमवार को पहुंचने की संभावना है।