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Lucknow News: एलडीए के 108 भूखंडों के मालिक लापता, गोमतीनगर विस्तार में दस साल पहले खरीदे भूखंडों की अभी तक नहीं कराई गई रजिस्ट्री
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लखनऊ। करीब दस साल पहले एलडीए की गोमतीनगर विस्तार योजना में बेचे गए 108 भूखंडों के खरीदार लापता हो गए हैं। प्राधिकरण के संपत्ति अधिकारी अब खोजबीन करने जा रहे हैं कि आखिर इन भूखंडों के मालिक हैं कहां।
एलडीए इन भूखंडों को विवादित के खाते में डालकर बैठा रहा। मामला तब सामने आया, जब गोमतीनगर विस्तार, गोमतीनगर, कानपुर रोड योजना आदि के विवादित भूखंडों की जांच शुरू की गई। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि गोमतीनगर विस्तार के 108 भूखंड लगभग दस साल पहले बिके थे। खरीदार एक भूखंड की औसतन 4.50 लाख रुपये कीमत भी जमा कर चुके हैं, लेकिन अब तक इनकी रजिस्ट्री नहीं कराई है। 1200 वर्गफीट के इन भूखंडों के खरीदारों का पता लगाने के लिए जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। यह एक-एक फाइल की जांच करके भूखंड खरीदने वालों का पता लगाएगी। इसके बाद इन्हें नोटिस जारी कर रजिस्ट्री कराने का आदेश देगी। तय तारीख पर खरीदार रजिस्ट्री नहीं कराएंगे तो आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।
बाबुओं ने फर्जीवाड़ा तो नहीं किया...
एलडीए अधिकारियों को अंदेशा है कि इन भूखंडों की इतने सालों से रजिस्ट्री न कराए जाने के पीछे बाबुओं की ओर से किया गया कोई फर्जीवाड़ा तो नहीं है। आशंका है कि इन बाबुओं ने अपने नाते-रिश्तेदारों के नाम से भूखंड खरीदकर कीमत जमा कर दी। मोटी कीमत मिलने पर ये भूखंड दूसरे को बेच कर एलडीए से रजिस्ट्री करा देंगे। इसका भी अंदेशा है कि काली कमाई से खरीदे गए ये भूखंड फर्जी नाम पर लिए गए हों। इसमें एलडीए कर्मचारियों की मिलीभगत की भी संलिप्तता है।
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4.50 लाख का प्लॉट हो गया 45 लाख का
एलडीए ने दस साल पहले इन 108 भूखंडों को 4.50 करोड़ रुपये (कुल कीमत) से अधिक में बेचा था। इनकी वर्तमान अनुमानित कीमत 45 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। इसके मुताबिक दस साल पहले जो भूखंड 4.50 लाख रुपये में बिका, उसकी एलडीए में ही कीमत लगभग 45 लाख रुपये हो चुकी है। इतना ही नहीं खरीदार के दोबारा बेचे जाने पर एक प्लॉट के 60 लाख रुपये तक मिल सकते हैं।
किस्त देने के तीन माह में रजिस्ट्री का है प्रावधान
एलडीए भूखंड की कीमत की किस्त पूरी जमा होने के तीन महीने के भीतर उसकी रजिस्ट्री कराने का प्रावधान है। वर्ष 1995 से आवंटियों को फ्रीहोल्ड के रूप में जमीन का आवंटन किया जा रहा है। ऐसे में भूखंड पर निर्माण शुरू करने अवधि तय नहीं है।
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एलडीए इन भूखंडों को विवादित के खाते में डालकर बैठा रहा। मामला तब सामने आया, जब गोमतीनगर विस्तार, गोमतीनगर, कानपुर रोड योजना आदि के विवादित भूखंडों की जांच शुरू की गई। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि गोमतीनगर विस्तार के 108 भूखंड लगभग दस साल पहले बिके थे। खरीदार एक भूखंड की औसतन 4.50 लाख रुपये कीमत भी जमा कर चुके हैं, लेकिन अब तक इनकी रजिस्ट्री नहीं कराई है। 1200 वर्गफीट के इन भूखंडों के खरीदारों का पता लगाने के लिए जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। यह एक-एक फाइल की जांच करके भूखंड खरीदने वालों का पता लगाएगी। इसके बाद इन्हें नोटिस जारी कर रजिस्ट्री कराने का आदेश देगी। तय तारीख पर खरीदार रजिस्ट्री नहीं कराएंगे तो आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।
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बाबुओं ने फर्जीवाड़ा तो नहीं किया...
एलडीए अधिकारियों को अंदेशा है कि इन भूखंडों की इतने सालों से रजिस्ट्री न कराए जाने के पीछे बाबुओं की ओर से किया गया कोई फर्जीवाड़ा तो नहीं है। आशंका है कि इन बाबुओं ने अपने नाते-रिश्तेदारों के नाम से भूखंड खरीदकर कीमत जमा कर दी। मोटी कीमत मिलने पर ये भूखंड दूसरे को बेच कर एलडीए से रजिस्ट्री करा देंगे। इसका भी अंदेशा है कि काली कमाई से खरीदे गए ये भूखंड फर्जी नाम पर लिए गए हों। इसमें एलडीए कर्मचारियों की मिलीभगत की भी संलिप्तता है।
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4.50 लाख का प्लॉट हो गया 45 लाख का
एलडीए ने दस साल पहले इन 108 भूखंडों को 4.50 करोड़ रुपये (कुल कीमत) से अधिक में बेचा था। इनकी वर्तमान अनुमानित कीमत 45 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। इसके मुताबिक दस साल पहले जो भूखंड 4.50 लाख रुपये में बिका, उसकी एलडीए में ही कीमत लगभग 45 लाख रुपये हो चुकी है। इतना ही नहीं खरीदार के दोबारा बेचे जाने पर एक प्लॉट के 60 लाख रुपये तक मिल सकते हैं।
किस्त देने के तीन माह में रजिस्ट्री का है प्रावधान
एलडीए भूखंड की कीमत की किस्त पूरी जमा होने के तीन महीने के भीतर उसकी रजिस्ट्री कराने का प्रावधान है। वर्ष 1995 से आवंटियों को फ्रीहोल्ड के रूप में जमीन का आवंटन किया जा रहा है। ऐसे में भूखंड पर निर्माण शुरू करने अवधि तय नहीं है।