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Lucknow News: बुज़ुर्ग दंपति के संयुक्त खातों से निकाले 10.66 लाख, 110 बार ट्रांजेक्शन
Sun, 18 May 2025 01:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 18 May 2025 01:39 AM IST
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बुज़ुर्ग दंपति के संयुक्त खातों से निकाले 10.66 लाख, 110 बार ट्रांजेक्शन
लखनऊ। इंदिरानगर के सेक्टर-21 में रहने वाले बुज़ुर्ग दंपति और उनकी बेटी के साथ लाखों की ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि आईसीआईसीआई बैंक की इंदिरानगर शाखा की कर्मचारी जया श्रीवास्तव ने गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग करते हुए दो संयुक्त खातों से कुल 10.66 लाख रुपये निकाल लिए।
यह राशि नए डेबिट कार्ड बनवाकर 110 बार में निकाली गई। आरोपी ने पंजीकृत मोबाइल नंबर भी बदल दिया। इस कारण खाताधारकों को निकासी की जानकारी तक नहीं हो सकी। इस मामले ने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा, गोपनीयता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वीना श्रीवास्तव, उनके पति राकेश चंद्र श्रीवास्तव और बेटी निधि के नाम से दो संयुक्त खाते बैंक में संचालित हैं। पीड़ितों के अनुसार, 25 मई 2024 से 5 नवंबर 2024 के बीच दंपती के संयुक्त खाते से 75 बार में 7.26 लाख रुपये और 22 जुलाई से 17 अगस्त के बीच पिता-पुत्री के संयुक्त खाते से 35 बार में 3.40 लाख रुपये निकाले गए।
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जांच में सामने आया कि खातों से जुड़ा रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदल दिया गया था, जिससे किसी भी लेनदेन का मैसेज पीड़ितों तक नहीं पहुंचा। आरोप है कि महिला कर्मचारी जया श्रीवास्तव ने खातों की गोपनीय जानकारी हासिल कर नए डेबिट कार्ड जारी करवाए और धोखाधड़ी को अंजाम दिया। जानकारी पर पता चला कि खाते में दर्ज नंबर बैंककर्मी जया का है।
एसीपी गाजीपुर ए. विक्रम सिंह के आदेश पर गाजीपुर थाने में महिला बैंककर्मी और अन्य अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ धारा 420 समेत गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। बैंक प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
बुज़ुर्ग की हालत बिगड़ी
वीना का कहना है कि जया उनके पति से योजनाओं के बहाने संपर्क में रहती थी। उसी दौरान उसने निजी जानकारी हासिल करली। पीड़ित परिवार ने बैंक से कई बार संपर्क किया, लेकिन अब तक कोई मदद नहीं मिली। ठगी की जानकारी मिलने के बाद राकेश चंद्र की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा।
बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल
- क्या बैंक में बिना ग्राहक की सहमति के मोबाइल नंबर और डेबिट कार्ड जारी किए जा सकते हैं?
- क्या बैंककर्मी के पास इतना अधिकार होना चाहिए कि वह ग्राहक के खाते से छेड़छाड़ कर सके?
- क्या ऐसी घटनाओं में बैंक की जवाबदेही तय होगी?
ग्राहकों के लिए सावधानियां:
- बैंक से जुड़े हर मैसेज पर तुरंत ध्यान दें।
- नेट बैंकिंग से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर समय-समय पर जांचते रहें।
- किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर तुरंत ब्रांच या साइबर सेल को सूचना दें।
- मोबाइल नंबर में कोई भी बदलाव बैंक ब्रांच जाकर स्वयं करें, वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) वेरिफिकेशन के बिना कोई भी बदलाव न मानें।
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यह राशि नए डेबिट कार्ड बनवाकर 110 बार में निकाली गई। आरोपी ने पंजीकृत मोबाइल नंबर भी बदल दिया। इस कारण खाताधारकों को निकासी की जानकारी तक नहीं हो सकी। इस मामले ने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा, गोपनीयता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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वीना श्रीवास्तव, उनके पति राकेश चंद्र श्रीवास्तव और बेटी निधि के नाम से दो संयुक्त खाते बैंक में संचालित हैं। पीड़ितों के अनुसार, 25 मई 2024 से 5 नवंबर 2024 के बीच दंपती के संयुक्त खाते से 75 बार में 7.26 लाख रुपये और 22 जुलाई से 17 अगस्त के बीच पिता-पुत्री के संयुक्त खाते से 35 बार में 3.40 लाख रुपये निकाले गए।
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जांच में सामने आया कि खातों से जुड़ा रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदल दिया गया था, जिससे किसी भी लेनदेन का मैसेज पीड़ितों तक नहीं पहुंचा। आरोप है कि महिला कर्मचारी जया श्रीवास्तव ने खातों की गोपनीय जानकारी हासिल कर नए डेबिट कार्ड जारी करवाए और धोखाधड़ी को अंजाम दिया। जानकारी पर पता चला कि खाते में दर्ज नंबर बैंककर्मी जया का है।
एसीपी गाजीपुर ए. विक्रम सिंह के आदेश पर गाजीपुर थाने में महिला बैंककर्मी और अन्य अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ धारा 420 समेत गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। बैंक प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
बुज़ुर्ग की हालत बिगड़ी
वीना का कहना है कि जया उनके पति से योजनाओं के बहाने संपर्क में रहती थी। उसी दौरान उसने निजी जानकारी हासिल करली। पीड़ित परिवार ने बैंक से कई बार संपर्क किया, लेकिन अब तक कोई मदद नहीं मिली। ठगी की जानकारी मिलने के बाद राकेश चंद्र की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा।
बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल
- क्या बैंक में बिना ग्राहक की सहमति के मोबाइल नंबर और डेबिट कार्ड जारी किए जा सकते हैं?
- क्या बैंककर्मी के पास इतना अधिकार होना चाहिए कि वह ग्राहक के खाते से छेड़छाड़ कर सके?
- क्या ऐसी घटनाओं में बैंक की जवाबदेही तय होगी?
ग्राहकों के लिए सावधानियां:
- बैंक से जुड़े हर मैसेज पर तुरंत ध्यान दें।
- नेट बैंकिंग से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर समय-समय पर जांचते रहें।
- किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर तुरंत ब्रांच या साइबर सेल को सूचना दें।
- मोबाइल नंबर में कोई भी बदलाव बैंक ब्रांच जाकर स्वयं करें, वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) वेरिफिकेशन के बिना कोई भी बदलाव न मानें।