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प्रेमिका को मारकर प्रेमी ने दी थी जान
Updated Wed, 02 May 2018 10:48 PM IST
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प्रेमिका को मारकर प्रेमी ने दी थी जान
सुल्तानपुर। दोस्तपुर हियाई गांव में मंगलवार सुबह तालाब के पास प्रेमी युगल के शव मिलने की घटना से धीरे-धीरे पर्दा उठ रहा है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि प्रेमी ने पहले प्रेमिका को गोली मारकर मौत के घाट उतारा, इसके बाद खुद को गोली मार ली।
घटना के बाद गायब प्रेमी युगल के मोबाइल फोन को पुलिस ने बरामद करके ये दावा किया है। पुलिस की जांच में ये भी स्पष्ट हो गया है कि घटना में प्रयुक्त तमंचे में फायर के बाद फंसा कारतूस का खोखा एक ग्रामीण ने निकाला था।
दोस्तपुर थाना क्षेत्र के हियाई गांव निवासी रामकीरत निषाद की पुत्री रेनू (19) का कादीपुर के अरजानीपुर गांव निवासी मोहन निषाद (21) के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। मंगलवार सुबह हियाई गांव में तालाब के पास रेनू व मोहन का खून से लथपथ शव पड़ा मिला था।
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दोनों की कनपटी पर गोली लगी थी। पुलिस को घटनास्थल से 315 बोर का एक तमंचा, दो कारतूस व दो खोखे मिले थे। मोहन की मां मनभावती ने बेटे की हत्या का आरोप युवती के पिता पर लगाया था। मगर 48 घंटे बीतने के बाद भी दोस्तपुर थाने में मोहन के परिवारीजनों ने कोई तहरीर नहीं दी है।
प्रभारी थानाध्यक्ष जीतलाल सरोज की मानें तो मोबाइल की कॉल डिटेल से इस बात की पुख्ता जानकारी मिली है कि मोहन और रेनू में प्रेम प्रसंग था। मोहन सोमवार देर रात रेनू से मिलने गांव पहुंचा था, चूंकि रेनू की शादी छह मई को तय थी। मोहन को ये कुबूल नहीं था।
घटना के बाद मौके पर मिले रेनू और मोहन के तीन मोबाइल फोन को रेनू का पिता रामकीरत उठा ले गया था। पूछताछ में रामकीरत ने बताया कि उसने इसलिए फोन उठा लिए थे कि उसकी बदनामी न हो। इसके साथ ही पुलिस को एक और संदेह था कि यदि रेनू व मोहन ने खुदकुशी की थी तो भला तमंचे में फंसा खोखा कैसे बाहर निकला।
पूछताछ में पता चला कि गांव के ही एक व्यक्ति ने ग्रामीणों की मौजूदगी में तमंचे को खोला था तभी खोखा बाहर निकल गया था। पुलिस की मानें तो पूछताछ में ये साफ हो गया कि रेनू और मोहन को किसी और ने नहीं मारा है। प्रभारी थानाध्यक्ष का दावा है कि मोहन ने पहले रेनू को गोली मारी फिर खुद को गोली मारकर जान दे दी।
रेनू और मोहन के शव का बुधवार को पोस्टमॉर्टम से पहले एक्सरे कराया गया। इसके बाद दोनों का पोस्टमॉर्टम हुआ। रेनू के घरवालों ने सुल्तानपुर शहर में गोलाघाट के पास उसे दफना दिया। जबकि मोहन के शव को कादीपुर के अल्देमऊ के समीप सत्यनाथ मठ के पास गोमती के किनारे दफनाया गया।
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सुल्तानपुर। दोस्तपुर हियाई गांव में मंगलवार सुबह तालाब के पास प्रेमी युगल के शव मिलने की घटना से धीरे-धीरे पर्दा उठ रहा है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि प्रेमी ने पहले प्रेमिका को गोली मारकर मौत के घाट उतारा, इसके बाद खुद को गोली मार ली।
घटना के बाद गायब प्रेमी युगल के मोबाइल फोन को पुलिस ने बरामद करके ये दावा किया है। पुलिस की जांच में ये भी स्पष्ट हो गया है कि घटना में प्रयुक्त तमंचे में फायर के बाद फंसा कारतूस का खोखा एक ग्रामीण ने निकाला था।
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दोस्तपुर थाना क्षेत्र के हियाई गांव निवासी रामकीरत निषाद की पुत्री रेनू (19) का कादीपुर के अरजानीपुर गांव निवासी मोहन निषाद (21) के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। मंगलवार सुबह हियाई गांव में तालाब के पास रेनू व मोहन का खून से लथपथ शव पड़ा मिला था।
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दोनों की कनपटी पर गोली लगी थी। पुलिस को घटनास्थल से 315 बोर का एक तमंचा, दो कारतूस व दो खोखे मिले थे। मोहन की मां मनभावती ने बेटे की हत्या का आरोप युवती के पिता पर लगाया था। मगर 48 घंटे बीतने के बाद भी दोस्तपुर थाने में मोहन के परिवारीजनों ने कोई तहरीर नहीं दी है।
प्रभारी थानाध्यक्ष जीतलाल सरोज की मानें तो मोबाइल की कॉल डिटेल से इस बात की पुख्ता जानकारी मिली है कि मोहन और रेनू में प्रेम प्रसंग था। मोहन सोमवार देर रात रेनू से मिलने गांव पहुंचा था, चूंकि रेनू की शादी छह मई को तय थी। मोहन को ये कुबूल नहीं था।
घटना के बाद मौके पर मिले रेनू और मोहन के तीन मोबाइल फोन को रेनू का पिता रामकीरत उठा ले गया था। पूछताछ में रामकीरत ने बताया कि उसने इसलिए फोन उठा लिए थे कि उसकी बदनामी न हो। इसके साथ ही पुलिस को एक और संदेह था कि यदि रेनू व मोहन ने खुदकुशी की थी तो भला तमंचे में फंसा खोखा कैसे बाहर निकला।
पूछताछ में पता चला कि गांव के ही एक व्यक्ति ने ग्रामीणों की मौजूदगी में तमंचे को खोला था तभी खोखा बाहर निकल गया था। पुलिस की मानें तो पूछताछ में ये साफ हो गया कि रेनू और मोहन को किसी और ने नहीं मारा है। प्रभारी थानाध्यक्ष का दावा है कि मोहन ने पहले रेनू को गोली मारी फिर खुद को गोली मारकर जान दे दी।
रेनू और मोहन के शव का बुधवार को पोस्टमॉर्टम से पहले एक्सरे कराया गया। इसके बाद दोनों का पोस्टमॉर्टम हुआ। रेनू के घरवालों ने सुल्तानपुर शहर में गोलाघाट के पास उसे दफना दिया। जबकि मोहन के शव को कादीपुर के अल्देमऊ के समीप सत्यनाथ मठ के पास गोमती के किनारे दफनाया गया।