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जान हथेली पर रख स्कूल जाना मजबूरी

Wed, 11 Apr 2018 12:05 AM IST
Updated Wed, 11 Apr 2018 12:05 AM IST
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जान हथेली पर रख स्कूल जाना मजबूरी
जान हथेली पर रख स्कूल जाना मजबूरी
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रायबरेली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र के डीह ब्लॉक क्षेत्र में आज तक विकास की किरण नहीं पहुंची है। आजादी के 70 साल बीतने के बाद भी डीह के गांवों की स्थिति बेहद खराब है। एक ग्रामसभा के दो पुरवों के बच्चों को तालीम हासिल करने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

सिर पर बस्ता रखकर नहर का पानी मंझाकर स्कूल जाना पड़ता है। वजह यहां ड्रेन पर आज तक पुल नहीं बन सका है। पुल निर्माण के लिए सीमेंट व पत्थर का ढांचा तैयार किया गया था, जिससे से होकर बच्चे आते-जाते थे।
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मगर अफसोस कि दो महीने पहले पानी के बहाव में ये ढांचा भी बह गया। इसकी सुधि न तो जिला प्रशासन के अफसरों को है और न ही चुनाव के वक्त बड़ी-बड़ी बातें करने वाले जनप्रतिनिधियों को। इसी वजह से अधिकतर बच्चे तो स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं।
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डीह ब्लॉक की ग्रामसभा कंचनावां के अंतर्गत पूरे गोड़ियन व पूरे पासिन पुरवे आते हैं। दोनों पुरवों की कुल आबादी 500 के आसपास है। गांव के पास से महराजगंज ड्रेन निकली है। इस ड्रेन के पार दोनों पुरवे बसे हैं।

कचनावां गांव के किसानों की 800 बीघा जमीन भी ड्रेन के उस पार ही है। ग्राम प्रधान मेवालाल के मुताबिक, 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रयास से ड्रेन पर पुल निर्माण के लिए सीमेंट व पत्थर आए थे।

ढांचा भी तैयार किया गया था, मगर फिर कार्य बंद हो गया। ढांचा तैयार होने से कुछ हद तक लोगों को आने-जाने में आसानी हो गई थी। मगर दो माह पहले पानी के बहाव में ढांचा बह गया है।

इस गांव के 120 बच्चे प्राथमिक विद्यालय कचनावां, राजकीय इंटर कॉलेज डीह व बालिका इंटर कॉलेज डीह में पढ़ने जाते हैं। इन बच्चों को जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। सुबह ड्रेन के पास ये नजारा देखा जा सकता है।

बच्चे सिर पर बस्ता रखते हैं और फिर नहर का पानी मंझाकर स्कूल जाते हैं। पानी अधिक होने से बच्चों के डूबने का खतरा भी रहता है। मगर शिक्षा हासिल करने के लिए बच्चे जोखिम उठाने को मजबूर होते हैं।

बरसात के दिनों में ड्रेन उफान पर होने से छात्र-छात्राओं को घर में बैठना पड़ता है। ड्र्रेन में उफान से किसानों की फसल भी बर्बाद हो जाती है। आजादी के बाद से लगातार ये समस्या चली आ रही है। मगर इस गांव के लोगों की कहीं सुनवाई ही नहीं हो रही है।

ग्रामीण रोहित चौरसिया, रामदेव, शशांक सिंह, रमेश मौर्या, रामविलास का कहना है कि, बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं। ये समस्या अरसे से चली आ रही है।

अफसरों से लेकर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है, मगर हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता। जल्द इस समस्या को लेकर पीएम और मुख्यमंत्री से गुहार लगाई जाएगी।


वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी हौसिला प्रसाद का कहना है कि, बच्चों के पानी मंझाकर स्कूल आने-जाने की जानकारी हुई है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। यदि ड्रेन पर पुल बन जाए तो बच्चों को शिक्षा हासिल करने में और आसानी हो जाए।
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