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यूपी कैबिनैट के फैसले : इनोवेशन फंड का गठन करेगी प्रदेश सरकार, स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा

Fri, 14 Oct 2022 12:01 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 14 Oct 2022 12:01 AM IST
सार

आईआईटी कानपुर और आईआईटी कानपुर के नोएडा परिसर  में मानवरहित एरियल व्हीकल (यूएवी) ड्रोन तकनीक आधारित उत्कृष्टता केंद्र ( सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) स्थापित किया जाएगा। योगी कैबिनेट की बृस्पतिवार को आयोजित बैठक में 20.30 करोड़ की लागत से सेंटर की स्थापना को मंजूरी दी गई।

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100% exemption in registration and tax for electric vehicles manufactured in UP for five years
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

विस्तार

प्रदेश में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश इनोवेशन फंड का गठन किया जाएगा। इसमें तकनीकी विश्वविद्यालय, शिक्षण संस्थान और उच्च शिक्षण संस्थान आगामी 2 से 3 वर्ष में 400 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। वहीं कुशल इनवेस्टमेंट मैनेजर की ओर से अन्य निवेशकों की सहभागिता से 4000 करोड़ रुपये तक का निवेश स्टार्ट अप्स में कराया जाएगा। योगी कैबिनेट की बृहस्पतिवार को आयोजित बैठक में यूपी इनोवेशन फंड की स्थापना का प्रस्ताव मंजूर किया गया।

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मंत्रिपरिषद ने फंड के संचालन के लिए ट्रस्ट, लॉ-फर्म तथा इनवेस्टमेंट मैनेजर का चयन मुख्य सचिव की  अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति के जरिये किया जाएगा। मैसर्स डिलॉएट चयन की प्रक्त्रिस्या में सलाहकार के रूप में कार्य करेगी। मंत्रिपरिषद ने फंड की स्थापना तथा राज्य सरकार की ओर से अपेक्षित अग्रेत्तर कार्यवाहियों के लिए  प्राविधिक शिक्षा विभाग को नोडल विभाग नियुक्त करने की मंजूरी दी है। साथ ही फंड की सलाहकार  कमेटी में प्राविधिक शिक्षा विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शासन के प्रतिनिधि के रूप में सदस्य रहने के प्रस्ताव भी मंजूर किया है।
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इनवेस्टमेंट मैनेजर की ओर से समय-समय पर यूपी इनोवेशन फंड के कॉर्पस से उपयुक्त समय-सारिणी के अनुसार अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड (एआईएफ) गठित कर सेबी (एसईबीआई) में पंजीकृत कराया जाएगा। एआईएफ की ओर से स्टार्टअप में निवेश किया जाएगा। एआईएफ की ओर से  यूपी इनोवेशन फंड से प्राप्त पूंजी के सापेक्ष 3 से 9 गुना तक की पूंजी निजी निवेशकों (आईपी) से प्राप्त की जाएगी।
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उत्तर प्रदेश के  स्टार्ट अप्स को यूपीआईएफ  के तहत निवेश में वरीयता प्रदान की जाएगी। यह प्रयास भी रहेगा कि यूपीआईएफ  के तहत निवेश प्राप्त करने वाले अन्य स्टार्टअप्स अपना बिजनेस उत्तर प्रदेश में अवश्य स्थापित करें। फंड की एडवाइजरी कमेटी में प्राविधिक शिक्षा विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी शासन के प्रतिनिधि के रूप में सदस्य रहेंगें। एडवाइजरी कमेटी की ओर से इनवेस्टमेंट मैनेजर को अबाध्यकारी सुझाव दिए जा सकेंगे।

यूपी इनोवेशन फंड के तहत राज्य सरकार का हस्तक्षेप कम से कम रहेगा। राज्य सरकार की ओर से आवश्यकतानुसार इनवेस्टमेंट मैनेजर को अबाध्यकारी सुझाव दिए जा सकेंगे। मंत्रिपरिषद के अनुमोदन केबाद शासनादेश वित्त विभाग से किया जाएगा। प्राविधिक शिक्षा विभाग को नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा।
 

 

दुग्ध प्रसंस्करण इकाई लगाने पर मिलेगी 15 करोड़ तक की छूट

कैबिनेट ने उप्र दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति 2022 को मंजूरी दे दी। नई नीति में प्रदेश में दुग्ध प्रसंस्करण की इकाई लगाने पर विभिन्न मदों में 5 करोड़ तक की सब्सिडी और पांच वर्षों के लिए 10 करोड़ रुपए ब्याज पर अनुदान दिया जाएगा। इससे दूध और उससे आधारित उत्पादों की उपलब्धता को बढ़ाया जा सकेगा। इस नीति से अगले पांच वर्षों में 5 हजार करोड़ के पूंजी निवेश का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही इस नीति के तहत सवा लाख रोजगार भी सृजित होगा।

नई नीति में प्रदेश में दुग्ध प्रंसस्करण की मात्रा और क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य दुग्ध प्रसंस्करण के मौजूदा स्तर को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक और दुग्ध प्रसंस्करण की स्थापित क्षमता की बाजार बिक्री योग्य हिस्सेदारी को 44 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। दुग्ध प्रसंस्करण की इकाई लगाने के लिए व उसके विस्तारीकरण के लिए प्लांट, मशीनरी, तकनीकी सिविल कार्य एवं स्पेयर पार्ट्स की लागत का 10 प्रतिशत या अधिकतम 5 करोड़ की सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा पांच वर्षों के कर्ज के ब्याज पर 10 करोड़ रुपए तक का अनुदान भी दिया जाएगा।

दुग्धशाला इकाई की स्थापना में उद्यमियों को मिलेगी छूट
नई नीति में विभिन्न एफपीओ, प्रदेश की सहकारी संस्थाओं व निजी क्षेत्र के उद्यमियों को नवीन दुग्ध प्रसंस्करण एवं दुग्ध उत्पाद विनिर्माण दुग्धशाला इकाई की स्थापना में छूट मिलेगी। इसके  अलावा क्षमता विस्तारीकरण और क्षमता में न्यूनतम 25 प्रतिशत की वृद्धि पर छूट होगी। नवीन पशु आहार और पशु पोषण उत्पाद निर्माणशाला इकाई की स्थापना व क्षमता विस्तारीकरण पर भी इसी तरह से छूट दी जाएगी। 

पिकप कर्मचारियों को मिलेगा एससीपी का लाभ

प्रदेशीय इंडस्ट्रियल और इंवेस्टमेंट कारपोरेशन (पिकप) के कार्मिकों को सुनिश्चित कैरियर प्रगति (एसीपी) का लाभ दिया जाएगा। योगी कैबिनेट की बृहस्पतिवार को आयोजित बैठक में इसका प्रस्ताव मंजूर किया गया। औद्योगिक विकास एवं अवस्थापना विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिकप एसपीसी लागू करने के  लिए निर्धारित मानदंड और पात्रता की शर्तों को पूरा करता है। लेकिन पिकप की ओर से एसीपी व्यवस्था लागू करने के लिए प्रशासनिक विभाग से औपचारिक अनुमति नहीं लेने की प्रतिक्रियात्मक कमी रही है।

पिकप में एसीपी लागू करने की प्रशासनिक विभाग की औपचारिक अनुमति नहीं लेने जाने की कमी को कमी को समाप्त करते हुए पिकप के 27 मार्च 2012 के आदेश के तहत लागू एसीपी व्यवस्था को कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की गई है। पिकप अपने स्रोतों से अर्जित आय से एसीपी के व्यय को वहन करने में सक्षम है। इस व्यय से संस्था के परिचालन में कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। ना ही शासन पर कोई वित्तीय भार होगा।

चना और मसूर की ढाई लाख मिनी किट निशुल्क बांटेगी सरकार

राज्य सरकार ने प्रतिकूल मौसम से प्रभावित किसानों को चना और मसूर के बीजों की ढाई लाख मिनी किट निशुल्क बांटने का निर्णय लिया है। योगी कैबिनेट ने बृहस्पतिवार को इसकी मंजूरी दे दी। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि किसानों के लिए यह निर्णय बेहद महत्वपूर्ण है।

किसानों को मुफ्त में बीजों की किट दी जाएगी। मसूर की प्रत्येक किट 8 किलो की और चने की प्रत्येक किट 16 किलो की होगी। इस तरह किसानों को कुल 12 हजार क्विंटल मसूर बीज और 16 हजार क्विंटल चने के  बीज बांटे जाएंगे। इसके साथ ही 28 हजार क्विंटल अन्य दलहन के बीजों का भी निशुल्क वितरण किया जाएगा। इस पर कुल 32 करोड़ 64 लाख रुपये की लागत आएगी।

उन्होंने कहा कि इसमें प्रदेश की उस दो लाख हेक्टेयर भूमि को प्राथमिकता में रखा गया है, जिसमें किसानों द्वारा खरीफ फसल का आच्छादन नहीं किया जा सका। साथ ही ऐसे किसानों की भूमि जो अल्पवर्षण, अतिवर्षण और बाढ़ से प्रभावित रहे हैं। बता दें किसान पहले सूखे और फिर बारिश की मार से परेशान हैं। वहीं धान की फसल को भारी नुकसान हो रहा है।

मक्का और बाजरा की खरीद का प्रस्ताव मंजूर

योगी कैबिनेट ने प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मक्का और बाजरा खरीदने की मंजूरी दे दी है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के मुताबिक वर्ष 2023 अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। सरकार इसकी तैयारियों में जुट गई है। इसी क्रम में कैबिनेट ने मक्का और बाजरा को भी एमएसपी पर खरीदने का निर्णय लिया है। मक्का के लिए 1962 रुपये प्रति क्विंटल और बाजरा के लिए 2350 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी तय किया गया है। वहीं मक्का के लिए एक लाख मीट्रिक टन और बाजरा के लिए 50 हजार मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के विभिन्न उत्पादन क्षेत्रों में मक्का के लिए 100 और बाजरा के लिए 25 खरीद केंद्र बनाए जाएंगे।

धान खरीद के लिए 4,800 करोड़ की गारंटी मंजूर 

योगी कैबिनेट ने धान खरीद के लिए सहकारिता विभाग के नियंत्रण में आने वाली संस्थाओं को ऋण दिलाने के लिए 4,800 करोड़ रुपये की गारंटी को मंजूरी दे दी है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में सहकारिता विभाग के नियंत्रण में आने वाले उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव फेडरेशन (पीसीएफ) और उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव यूनियन लि. (पीसीयू) को राष्ट्रीयकृत बैंकों से अल्पकालिक ऋण लेने पर साख की गारंटी दी जाएगी। इसके तहत पीसीएफ को 4,000 करोड़ रुपये और पीसीयू को 800 करोड़ रुपये की गारंटी दी जाएगी। हालांकि इसमें यह शर्त लगाई गई है कि इस धन का इस्तेमाल सिर्फ धान खरीद के लिए किया जाएगा। 

उन्होंने बताया कि वर्ष 2022-23 में कॉमन श्रेणी के धान के लिए 2040 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड ए के लिए 2060 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित किया गया है। चार हजार क्रय केंद्रों के माध्यम से दो चरणों में धान खरीदा जाएगा। पहले चरण में एक अक्तूबर से खरीद शुरू हो चुकी है जो 31 जनवरी 2023 तक लखनऊ मंडल के तीन जिलों हरदोई, लखीमपुर व सीतापुर में और बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़ व झांसी मंडलों में होगी। दूसरे चरण में एक नवंबर 2022 से 28 फरवरी 2023 तक लखनऊ मंडल के तीन जिलों लखनऊ, रायबरेली व उन्नाव में धान खरीदा किया जाएगा। इसी चरण में चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, देवीपाटन, बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर व प्रयागराज मंडलों में भी धान क्रय किया जाएगा। वहीं ऐसे एफपीओ जो एक मार्च 2021 से पूर्व पंजीकृत हैं और उनकी कार्यशील पूंजी 50 लाख रुपये है, वे भी शर्तों के अधीन धान खरीद कर सकते हैं। 

प्राकृतिक खेती बोर्ड के गठन को हरी झंडी, मुख्यमंत्री होंगे बोर्ड के अध्यक्ष

योगी कैबिनेट ने बृहस्पतिवार को प्राकृतिक खेती बोर्ड के गठन को हरी झंडी दे दी। बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। प्रदेश में इस योजना पर अब तेजी से काम शुरू हो सकेगा। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश सरकार लगातार प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को जागरूक कर रही है। इसके लिए प्राकृतिक खेती बोर्ड के गठन को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

इस बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री जबकि उपाध्यक्ष कृषि मंत्री तथा वित्त, कृषि विपणन, उद्यान, खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन एवं दुग्ध विकास, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास, सहकारिता, सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग के मंत्री इसके सदस्य होंगे। इन सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव भी इसके सदस्य होंगे। राज्य में प्राकृतिक खेती करने वाले 2 किसानों को मुख्यमंत्री सदस्य के रूप में इस बोर्ड में नामित कर सकेंगे।

सीएम की अध्यक्षता में वर्ष में दो बार बोर्ड की बैठक होगी और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक गवर्निंग बॉडी बनाई जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक गवर्निंग बॉडी बनाई जाएगी। कृषि उत्पादन आयुक्त तथा संबंधित सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव इसके सदस्य होंगे। इसमें राज्य में प्राकृतिक खेती करने वाले 2 किसानों को कृषि मंत्री सदस्य के रूप में इस बोर्ड में नामित कर सकेंगे।

जिला स्तर पर भी गठन
प्राकृतिक खेती बोर्ड के कार्यों को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के लिए जिला स्तर पर प्राकृतिक खेती बोर्ड का गठन किया जाएगा। इसके अध्यक्ष जिलाधिकारी तथा सचिव कृषि उपनिदेशक होंगे। संबंधित अन्य विभागों के अधिकारी भी इसके सदस्य होंगे।

मथुरा के कोकिला वन शनि धाम में परिक्रमा मार्ग निर्माण की बाधा दूर

मथुरा के कोकिला वन शनि धाम में परिक्रमा मार्ग निर्माण के लिए जमीन की बाधा नहीं आएगी। यहां परिक्रमा मार्ग के बीच आ रही वन विभाग की 2.011 हेक्टेयर जमीन को लिया जाएगा। फिर इसके बदले मादौर गांव में ग्राम समाज की इतनी ही जमीन उसे निशुल्क दी जाएगी। संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा पूरे ब्रज क्षेत्र में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में मथुरा में कोसीकलां के पास स्थित कोकिला वन में प्रसिद्ध शनिधाम मंदिर के आसपास भी विकास कार्य हो रहे हैं। मंदिर में लाखों श्रद्धालु आते हैं और परिक्रमा करते हैं। 

विक्रमादित्य मार्ग पर बनेगा नया राज्य अतिथि गृह

सरकार ने लखनऊ में विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित पुराने अतिथि गृह को ध्वस्त करके उसके स्थान पर नया और बढ़ा अतिथि गृह बनाने का निर्णय किया है। राज्य संपत्ति विभाग द्वारा तैयार किए गए इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। जल्द ही नए अतिथि गृह का निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

अब तक एक बंगले के रूप में स्थित यह भवन सीबीसीआईडी का गेस्ट हाउस था। खाली होने के बाद राज्य संपत्ति विभाग इसे अतिथि गृह के रुप में इस्तेमाल कर रहा था। 2194 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले इस बंगले में काफी जमीन खाली थी। नये प्रस्ताव के मुताबिक अब इसमें भूमिगत पार्किंग के अलावा तीन मंजिला अतिथि गृह के निर्माण का फैसला किया जाएगा। इसमें करीब 46 कमरे होंगे।

मथुरा में एनएच-19 पर बनेगा पर्यटन सुविधा केंद्र

मथुरा में नेशनल हाईवे-19 पर अकबरपुर जैत गांव में सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस में पर्यटन सुविधा केंद्र बनाया जाएगा। इसके लिए सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस की 2.03 हेक्टेयर भूमि पर्यटन विभाग को निशुल्क दी जाएगी। योगी कैबिनेट ने बृहस्पतिवार को संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

सहकारी ग्राम विकास बैंक को दो सौ करोड़ के ऋण की गारंटी प्रदेश सरकार देगी

उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की ओर से किसानों को वितरित दीर्घकालिक ऋण के सापेक्ष बैंक को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफ डीसी) और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी) से मिलने वाले 100-100 करोड़ रुपये के ऋण की गारंटी प्रदेश सरकार देगी। योगी कैबिनेट की बैठक में बृहस्पतिवार को बैंक के लिए कुल दो सौ करोड़ देने और नाबार्ड के पक्ष में पूर्व जारी 1,000 करोड़ रुपये की गारंटी निरस्त करते हुए उसके स्थान पर 800 करोड़ रुपये की गारन्टी वित्त विभाग की सहमति से जारी करने का प्रस्ताव पारित किया गया।

सहकारिता राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जेपीएस राठौर ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने यह निर्णय भी लिया है कि शासकीय गारंटी के सापेक्ष एनबीसीएफ डीसी और एनएसएफडीसी से लिए गए ऋण का उपयोग किसी अन्य कार्य में नहीं किया जाएगा। इस संबंध में भविष्य में किसी परिवर्तन या संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है। राठौर ने बताया कि उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लि. की ओर से  प्रदेश के लघु एवं सीमांत कृषकाें को विभिन्न रोजगार परक एवं आय अर्जक योजनाओं में दीर्घकालीन, मध्य कालीन ऋण वितरण कर कृषकों की सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान किया जाता है।

 

पिछडे़ वर्ग एवं अनुसूचित जाति वर्गों के कल्याण के लिए भारत सरकार के उपक्रम राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम जैसी संस्थाओं की स्थापना की गयी है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में सरकार की ओर से नाबार्ड को 1000 करोड़ रुपये की शासकीय गारं जारी की गई थी। जिसकी अवधि 30 जून 2023 को समाप्त हो रही है। एनबीसीएफ डीसी और एनएसएफडीसी से बैंक को अधिकतम 3 प्रतिशत की ब्याजदर पर ऋण उपलब्ध होगा। जिस पर दोनों निगमों की शर्तों के अनुसार लाभार्थी को बैंक की ओर से अधिकतम 6 प्रतिशत की ब्याजदर पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। बैंक की ओर से एनबीसीएफ डीसी और एनएसएफडीसी की संचालित योजनाओं में न्यूनतम 5 वर्ष से 7 वर्ष की अवधि के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।  जिसकी वसूली योजनाओं के अनुसार मासिक एवं तिमाही आधार पर की जाएगी।

लघु एवं सीमांत किसानों को सिंचाई सुविधा के लिए 90 प्रतिशत तक अनुदान

लघु एवं सीमांत कृषकों अतिरिक्त सिंचन सुविधा प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना में किसानों को 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इसके कार्य विस्तार एवं क्रय व्यवस्था में भी संशोधन किया गया है। बृहस्पतिवार को यूपी कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी।

प्रदेश सरकार के संकल्प पत्र- 2022 में इस योजना का उल्लेख प्रमुखता से किया गया है। लघु सिंचाई विभाग में पूर्व से संचालित इस योजना में उथले नलकूप (गहराई 30 मीटर तक) मध्यम गहरे नलकूप (31.60 मीटर तक) व गहरे नलकूप (61.90 मीटर तक) का निर्माण लाभार्थी कृषकों की भूमि पर सिंचाई के लिए किया जाता है। अब इसमें 50 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।

नवीन कार्यों में पूर्व निर्मित उथले नलकूपों पर पंपसेट, हौज, वॉटर टैंक, व जल वितरण प्रणाली तथा उथले मध्यम व  गहरे नलकूपों पर सोलर पंप सेट लगाने,  पठारी क्षेत्रों में ब्लास्टवेल, चेकडैम मरम्मत कार्य, चेकडैम तालाबों पर भूस्तरीय सिंचाई के लिए सोलर पंप सेट एवं रूफ टॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग आदि कार्यों पर यह योजना लागू होगी। इस योजना का असर यह भी आएगा कि नियंत्रित सिंचाई के कारण भूगर्भीय जल का दुरुपयोग नहीं होगा तथा कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी। इससे प्रति वर्ष 02 लाख से अधिक लघु सीमांत कृषकों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

इसके अलावा विभाग में क्रय प्रक्रिया का भी केंद्रीकरण किया गया है। जैम पोर्टल के जरिए खरीद की जाएगी। साथ ही पिछड़े वर्ग सहित सामान्य श्रेणी व अनुसूचित जाति के कृषकों को प्राप्त होने वाली अनुदान सीमा में वृद्धि की गयी है। विंध्य व बुंदेलखड के पठारी क्षेत्र को इस योजना में अब विशेष लाभ मिलेगा। यहां नए ब्लास्टवेल का निर्माण,  चेकडैम तालाबों पर भूस्तरीय सिंचाई सुविधा के रूप में ट्रॉली माउंटेड देने तथा  भूगर्भीय जल संरक्षण आदि कार्यों का क्रियान्वयन किया जायेगा।

यूपी में निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण और टैक्स में पांच वर्ष तक शत प्रतिशत छूट

उत्तर प्रदेश में बनने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति लागू होने के बाद से पांच वर्ष तक पंजीकरण और रोडटैक्स में शत प्रतिशत छूट दी जाएगी। वहीं प्रदेश से बाहर बनने वाले ईवी को नीति लागू होने के बाद पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष तक छूट दी जाएगी। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर फैक्ट्री मूल्य पर 15 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाएगी।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन निनिर्माण एवं गतिशीलता नीति-2022 सहित कुल 30 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। ईवी पॉलिसी के तहत 500 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली पहली पांच मेगा ईवी परियोजना और 300 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली पहली 6 मेगा ईवी बैटरी परियोजना को निवेश पर 20 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। नीति के तहत पांच वर्ष में 30 हजार करोड़ का निवेश आकर्षित करने और दस लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रुप से रोजगार देने का लक्ष्य रखा है।

 

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने लोक भवन स्थित मीडिया सेंटर में कैबिनेट निर्णय की जानकारी देते बताया कि प्रदेश में प्रदूषण रहित परिवहन के संसाधनों की त्वरित स्वीकार्यता को बढ़ावा देने और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अनुकूल परिस्थितियां विकसित करने के लिए नीति लागू की गई है। नीति के तहत उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए प्रोत्साहित करने, इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माणकर्ताओं को यूपी में निवेश के लिए प्रोत्साहन देने और बैटरी स्वैपिंग सेवाओं को बढ़ावा देने पर फोकस किया है।

ई-गुड्स कैरियर वाहनों को भी मिलेगी सब्सिडी
नीति लागू होने के बाद पहले एक हजार ई-गुड्स कैरियर वाहन की खरीद पर प्रत्येक वाहन पर एक लाख रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। प्रदेश में ईवी वाहनों को फैक्ट्री मूल्य पर 15 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाएगी। इसमें पहले दो लाख दो पहिया ईवी को पांच हजार रुपये प्रति वाहन, पहले 50 हजार तीन पहिया ईवी को 12 हजार रुपये प्रति वाहन, पहले 25 हजार चार पहिया ईवी को प्रति वाहन एक लाख रुपये और पहली चार सौ ईवी बसों की खरीद पर प्रति बस 20 लाख रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। सरकारी कर्मचारियों को ईवी खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, उन्हें ईवी खरीद के लिए सरकार अग्रिम राशि भी देगी।

मेगा बैटरी परियोजना पर मिलेगी 30 प्रतिशत सब्सिडी
प्रदेश में 500 करोड़ या इससे अधिक के निवेश से न्यूनतम 1 जीडब्ल्यूएच बैटरी उत्पादन क्षमता का प्लांट लगाने वाली पहली दो अल्ट्रा मेगा बैटरी परियोजनाओं के निवेश पर 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी। ईवी, ईवी बैटरी एवं अनुसंधान एवं विकास, परीक्षण सुविधाओं से संबंधित कंपोनेंट्स के निर्माण पर 3 हजार करोड़ या इससे अधिक का निवेश करने वाली पहली दो एकीकृत ईवी परियोजनाओं को निवेश के 20 प्रतिशत की दर से पंजीगत सब्सिडी दी जाएगी।

चार्जिंग स्टेशन पर मिलेगी दस लाख सब्सिडी
पहले दो हजार चार्जिंग स्टेशन के सेवा प्रदाताओं को प्रदेश में चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग सुविधाएं विकसित करने के लिए अधिकत दस लाख रुपये प्रति चार्जिंग स्टेशन तक सब्सिडी दी जाएगी। राज्य में स्थापित किए जाने वाले पहले एक हजार स्वैपिंग स्टेशनों को पांच लाख रुपये प्रति स्वैपिंग स्टेशन की दर से  सब्सिडी दी जाएगी।

बैटरी निर्माण प्लांट लगाने पर मिलेगी 30 प्रतिशत सब्सिडी
प्रदेश में एक गीगावॉट की न्यूनतम क्षमता वाला बैटरी निर्माण प्लांट लगाने के लिए 1500 करोड़ रुपये या इससे अधिक का निवेश करने वाली पहली दो अल्ट्रा मेगा बैटरी परियोजनाओं को अधिकतम एक हजार करोड़ रुपये प्रति परियोजना के निवेश पर 30 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाएगी।


प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन, ईवी बैटरी और उससे संबंधित कंपोनेंट के निर्माण के लिए तीन हजार करोड़ रुपये का निवेश करने वाली पहले दो एकीकृत ईवी परियोजनाओं को अधिकतम एक हजार करोड़ रुपये प्रति परियोजना पर 30 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। वहीं पांच सौ करोड़ या इससे अधिक का निवेश करने वाली 5 मेगा ईवी परियोजनाओं, 300 क रोड़ रुपये या इससे अधिक का निवेश करने वाली पहली 4 मेगा ईवी बैटरी परियोजनाओं को निवेश पर 20 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी।


स्टांप ड्यूटी में शत प्रतिशत छूट मिलेगी
प्रदेश में एकीकृत ईवी परियोजना और अल्ट्रा मेगा बैटरी परियोजना स्थापित करने पर स्टांप ड्यूटी में शत प्रतिशत छूट दी जाएगी। मेगा, वृहद, एमएमएसई परियोजना के लिए पूर्वांचल व बुंदेलखंड में 100 प्रतिशत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर को छोड़कर मध्यांचल व पश्चिमांचल में 75 प्रतिशत छूट दी जाएगी। गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में स्टांप ड्यूटी पर 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी। प्रति परियोजना अधिकतम दस लाख रुपये गुणवत्ता प्रमाणन शुल्क प्रतिपूर्ति दी जाएगी। पेटेंट पंजीकरण शुल्क घरेलू पेटेंट पंजीकरण पर 50 हजार रुपये और अंतर्राष्ट्रीय पेेटेंट पंजीकरण शुल्क पर दो लाख रुपये तक प्रतिपूर्ति की जाएगी। 

आईआईटी कानपुर में स्थापित होगा ड्रोन टेक्नोलाजी का उत्कृष्टता केंद्र 

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर और आईआईटी कानपुर के नोएडा परिसर  में मानवरहित एरियल व्हीकल (यूएवी) ड्रोन तकनीक आधारित उत्कृष्टता केंद्र ( सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) स्थापित किया जाएगा। योगी कैबिनेट की बृस्पतिवार को आयोजित बैठक में 20.30 करोड़ की लागत से सेंटर की स्थापना को मंजूरी दी गई।

आईटी एवं इलेक्ट्रोनिक्स मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि स्टार्टअप नीति-2020 के तहत प्रदेश में तीन स्टेट ऑफ आर्ट उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना का लक्ष्य है। इसके तहत आईआईटी कानपुर और आईआईटी कानपुर के नोएडा परिसर में ड्रोन तकनीकी के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जाएगी। उत्कृष्टता केंद्र में प्रति वर्ष 20 नव उद्यमियों को सहयोग दिया जाएगा। प्रति वर्ष 100 ड्रोन पायलट को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रदेश में नवाचार, उद्यमिता, प्रौद्योगिकी सुविधा और व्यवसायिकरण पर सर्वोत्तम प्रथा को लाना है। स्टार्टअप्स के परिपक्व होने पर उनकी ओर से प्रदेश के विभिन्न इलाकों में उद्योग स्थापित किए जाएंगे। इससे प्रत्यक्ष और परोक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे। 

डलमऊ पंप नहर प्रणाली की पुनरुद्घार परियोजना को मंजूरी

जिला उन्नाव में गंगा नदी के बाएं तट पर स्थित चौ. चरण सिंह डलमऊ बी पंप नहर प्रणाली की क्षमता पुनरुद्धार की पुनरीक्षित परियोजना के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया गया। कैबिनेट ने इसके लिए 7294.96 लाख रुपये को स्वीकृति प्रदान की गई है। साथ ही मंत्रिपरिषद ने  4357.08 लाख रुपये के कार्यों को 03 कार्यदायी संस्थाओं सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के नियंत्रणाधीन उप्र प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन लि. से 2344.48 लाख रुपये के कार्यों सिंचाई विभाग (सिविल) से 71.67 लाख रुपये के कार्यों तथा सिंचाई विभाग (यांत्रिक) से 1940.93 लाख रुपये के कार्यों को कराये जाने की अनुमति प्रदान की है।

प्रमुख सचिव सिंचाई अनिल गर्ग के मुताबिक इस योजना की स्वीकृति से उन्नाव एवं रायबरेली के 40 हजार से ज्यादा किसानों को लाभ मिलेगा। 26107 हेक्टेयर जमीन की सिंचन क्षमता इस योजना में बढ़ेगी।  उन्नाव की तहसील बीघापुर एवं रायबरेली की तहसील लालगंज के किसानों को इस योजना का विशेष लाभ मिलेगा। अब नए प्रस्ताव में यहां अप्रोच मार्ग एवं अप्रोच ब्रिज, सुपर स्ट्रक्चर, नदी सुरक्षा, विद्युत यांत्रिक आदि सभी कार्य होंगे। अतिरिक्त जल से 198 किलोमीटर की लंबाई में कृषकों को सिंचाई के लिए जल उपलब्ध  होगा। 

220 गांवों को लाभ
परियोजना पूर्ण होने पर 220 गांवों को इसका लाभ मिलेगा। जनपद उन्नाव के 100 तथा रायबरेली के 120 ग्रामों किसान इससे लाभान्वित होंगे। इसमें उन्नाव शाखा के 61 किलोमीटर की चैनेज पर अतिरिक्त जलापूर्ति की जाएगी। मूल परियोजना में लागत 3059.29 लाख रुपये के सापेक्ष अवमुक्त की जा चुकी धनराशि 2937.88 रुपये से सबस्ट्रक्चर तक कार्य पूर्ण किया जा चुका है।

फिल्म सिटी का फिर से होगा टेंडर

योगी कैबिनेट ने नोएडा के युमना प्राधिकरण क्षेत्र के सेक्टर 21 में बनने वाली फिल्म सिटी का दोबारा टेंडर कराने की मंजूरी दी है। नोएडा फिल्म सिटी का जून में भी टेंडर आमंत्रित किया गया था।लेकिन केवल एक ही कंपनी की ओर से निविदा दाखिल करने के कारण टेंडर निरस्त किया गया। युमना प्राधिकरण के प्रस्ताव पर शासन ने टेंडर की शर्तों में कुथ शिथिलता दी है। उसके बाद अब नए सिरे से टेंडर जारी करने के लिए कैबिनेट ने मंजूरी दी है।

बहराइच का मिहींपुरवा बनेगा नगर पंचायत, तीन नगर पालिका परिषद व तीन नगर पंचायतों का होगा सीमा विस्तार

प्रदेश सरकार ने बहराइच के मिहींपुरवा बाजार को नई नगर पंचायत का दर्जा देते हुए कुल 7 नगर निकायों के सीमा विस्तार का फैसला किया है। इसके लिए नगर विकास विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। जिन 7 नगर निकायों के सीमा विस्तार किया जाएगा, उनमें तीन नगर पालिका परिषद मई और बरेली आंवला व नवाबगंज के अलावा तीन नगर पंचायत बरसाना (मथुरा), भरतकुंड भदरसा व बीकापुर (अयोध्या) व सुबेहा (बाराबंकी) शामिल हैं।


प्रस्ताव के मुताबिक मिहींपुरवा नगर पंचायत का गठन महींपुरवा कस्बा के अलावा ग्राम मोतीपुर का आंशिक क्षेत्र (मोतीपुर, तुलसीराम पुरवा, सिंचाई कॉलोनी), परवानीगौढ़ी का आंशिक क्षेत्र (मिहींपुरवा पूर्वी भाग, नया पुरवा कलोनी, ब्लॉक के आसपास, सुक्खापुरवा, तमोलिन पुरवा आंशिक) तथा ग्राम कुड़वा का आंशिक क्षेत्र (टीचर्स कालेनी, गुलालपुरवा, चमारनपुरवा, पाण्डेयपुरवा, टेपरा, बोटनपुरवा) को मिला कर किया गया है। जबकि अयोध्या की बीकापुर और भरतकुंड भदरसा नगर पंचायत का सीमा क्षेत्र में आसपास के  एक दर्जन से अधिक गांवों को शामिल किया जाएगा। जबकि बाराबंकी की सुबेहा नगर पंचायत की सीमा में आसपास के 4 ग्रामों मोहिद्दीन सराय, थलवारा, खानपुर व पलिया को शामिल किया जाएगा।


इसी प्रकार मथुरा के बरसाना नगर पंचायत की सीमा में आसपास के 11 राजस्व ग्रामाें मानपुर, ऊचागॉव, रूपनगर, चिकसौली, बरसाना देहात, गाजीपुर, संकेत, डभाला, खोर, करहला और आजनौंख को शामिल किए जाने का फैसला किया गया है।

इन नगर पालिका परिषदों के सीमा का भी होगा विस्तार
मऊ:
 इस नगर पालिका परिषद की सीमा में कुल 54 गांवों को शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। इनमें मुहम्मद मुतलके, भटकुंडल, रेवरी डीह, मेघई, सहरोज, डोडापुर, डाड़ीखास, सैदोपुर, भुजौटी, सरायलखंसी, चक इनायतुल्लाह खैरुल्लाह, खालसा उत्तर दक्षिण टोला, भूतबराड़, बख्तावरगंज, सिकटिया, दर्पन रायनपुर, छपरा, नियामुपुर, चकरामजी, चकजीयन, चकखुदाद, सरायमक्खन, मानपुर, राघोपट्टी, नसोपुर, मुसरदह, रस्तीपुर, चकाकिल, इन्दरपुर, परसपुरा, हरदसपुर, बहरीपुर, सुल्तानपुर, बेलचौरा, इनायतुल्ला उर्फ चकिया, अछार, ठकुरमनपुर, बरलाई, बड़ा गांव, काझा खुर्द, खेवसीपुर, दनियालपुर, सुल्तानपुर उर्फ बनौरा, सनेगपुर, रामपुर, बढुआ गोदाम, इमिलियाडीह, कटरा, ओड़हरा, ताजोपुर, जमीन हाथीपुर, हाथीपुर, परदहां. भीखमपुर और सलाहाबाद शामिल हैं।
आंवला (बरेली)- नगर पालिका परिषद आंवला की सीमा में ग्राम अबादानपुर, ग्राम बेहटा जुनू और ग्राम नगरिया सतन  को शामिल किए जाने का फैसला किया गया है।
नवाबगंज (बरेली)- नगर पालिका परिषदए नवाबगंज की सीमा में दो गांव को शामिल किया जाएगा। इनमें ग्राम याकूबपुर, बहोर नगला शामिल हैं।  

बुनकरों की आय 50 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य 

उप्र. वस्त्र एवं गारमेंट्स पॉलिसी 2022 के तहत इससे संबंधित उद्योग की सभी प्रकार की इकाइयों का विकास किया जाएगा। इससे हैंडलूम, पावरलूम, स्पिनिंग, वीविंग, प्रोसेसिंग, गारमेंटिंग आदि का विकास होगा। निजी क्षेत्र के पांच वस्त्र एवं परिधान पार्कों को विकसित किया जाएगा। इससे हथकरघा और पावरलूम बुनकरों की आय में 50 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। 

यह पॉलिसी प्रख्यापन की तिथि से पांच वर्ष तक प्रभावी रहेगी। इससे वस्त्र एवं गारमेंट्स इकाइयों को प्लांट और मशीनरी खरीद पर 25 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी मिलेगी। मध्यांचल क्षेत्र में स्थापित होने वाली इकाइयों को पांच प्रतिशत, पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड में 10 प्रतिशत की दर से अतिरिक्त पूंजीगत सब्सिडी जाएगी। इसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपये प्रति यूनिट रखी गई है। इसी तरह यूनिट स्थापित करने के लिए सड़क, पानी, जल निकासी बिजली आदि के विकास के लिए परियोजना लागत का 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा, जो अधिकतम 3 करोड़ रुपये होगा। 
विपणन प्रोत्साहन के लिए प्रदेश के बाहर देश के बड़े शहरों में प्रति वर्ष चार विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाएगा। 

प्रदर्शनी पर अनुमानित व्यय 50 लाख रुपये होगा। डेवलपर को बिजली की खुली पहुंच के लिए विद्युत रेग्यूलेशन एक्ट के अनुरूप अनुमति दी जाएगी। ऊर्जा टैरिफ  सब्सिडी लाइसेंसी यूटिलिटी से बिजली की खरीद पर वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने की तारीख से 5 साल के लिए प्रति बिल यूनिट (किलोवॉट) के लिए 2 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। इसी तरह स्टाम्प शुल्क की 100 प्रतिशत छूट बैंक गारंटी के विरुद्ध दी जाएगी। अपना रोजगार शुरू करने वालों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। मार्केटिंग कंपनी के पंजीकरण कराने एवं उसे स्थापित करने के लिए सुविधाओं पर आने वाली लागत का 75 प्रतिशत अनुदान अधिकतम रुपये 50 लाख प्रति कंपनी देय होगा। इस कार्य में प्रोत्साहन के लिए बुनकरों के बच्चों को वरीयता दी जाएगी। 

वस्त्र एवं गारमेंट्स नीति से 10 हजार करोड़ 

उप्र. वस्त्र एवं गारमेंट्स पॉलिसी 2022 को मंजूरी मिल गई है। इससे 10 हजार करोड़ के निजी निवेश की उम्मीद है, जो पांच लाख लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करेगा। इस पॉलिसी में किसी प्रकार के संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है। इस पॉलिसी के लागू होने से प्रदेश को वैश्विक स्तर के वस्त्र निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकेगा। 

पौने दो सौ करोड़ से अमेठी में बनेगा नया जिला कारागार

लोकनिर्माण विभाग अमेठी में 176.12 करोड़ रुपये से नया जिला कारागार बनाएगा। इसकी क्षमता 990 कैदियों की होगी। अभी यहां कोई जेल नहीं है। यहां के कैदी सुल्तानपुर की जेलों में बंद किए जाते हैं। 

एनएचएलएमएल को दी गई वाराणसी में रोपवे के निर्माण की जिम्मेदारी
प्रदेश ने वाराणसी में रोपवे के निर्माण और उसके संचालन के लिए कार्यदायी संस्था तय कर दिया है। यह जिम्मेदारी नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) को दी गई है। इससे संबंधित आवास विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। आवास विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक वाराणसी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के रूप में रोपवे की पायलट परियोजना के लिए एनएचएलएमएल को प्रमोटर के रूप में अधिकृत किया गया है। निर्माण कार्य से लेकर संचालन तक की जिम्मेदारी इसी संस्था की होगी। वाराणसी में रोपवे परियोजना की कुल लंबाई 3.750 किमी है और इसके निर्माण पर 461 करोड़ रुपये खर्च आएगा। इसमें पांच स्टेशन कैंट, विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरिजाघर क्रासिंग व गोदौलिया बनाए जाएंगे। परियोजना के लिए कुल 30 टॉवर बनाए जाएंगे। परियोजना के लिए सभी स्टेशनों के डिजायन का काम भी एनएचएलएमएल ने ही किया है।

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