योगी 2.0 के 100 दिन: दूसरे राज्यों को यूपी से मिल रही कड़ी टक्कर, एक्सप्रेसवे दे रहे विकास को रफ्तार
सरकार इस तथ्य के प्रति संवेदनशील है कि यूपी भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य होने के साथ ही देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
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पूर्व मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता कहते हैं कि विकास एक सतत प्रक्रिया तथा साधन है जिसके लिए राजनीतिक तथा नीतिगत सोच का स्थायित्व जरूरी है। विकास के दूरगामी निर्णयों के क्रियान्वयन के लिए
आवश्यक है कि राजनीतिक नेतृत्व में स्थिरता हो और विकास के प्रति दृष्टिकोण में भी समानता हो। यूपी में हाल में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम दशकों में ऐतिहासिक हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दोबारा बनी सरकार के प्रथम 100 दिन पूरे होने पर इस स्थायित्व और निरंतरता का महत्व प्रदेशवासियों को स्पष्ट रूप से दिख रहा है।
प्रदेश की राजनीतिक पृष्ठभूमि में 37 वर्ष बाद किसी चुनाव में एक सरकार को दोबारा मौका मिलना इस बात का द्योतक है कि प्रदेश के लोगों ने दूरगामी और स्थायी विकास के लिए राजनीतिक स्थिरता को चुना है। सरकार की दूसरी पारी के कार्यकाल के प्रथम 100 दिन की उपलब्धियां इस बात के संकेत हैं कि सुशासन, पक्का इरादा, भेदभाव रहित नीतियां, डबल इंजन (यानी प्रदेश और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार) की गति के आधार पर प्रदेश की कई पहल तथा योजनाएं, कार्यक्रम और परियोजनाएं तेज गति से आगे बढ़ रही हैं। इसके लिए स्थिरता के अलावा योगी की सरकार ने जो दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई वह प्रदेश के सुशासन तथा विकास का नया मानचित्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कारक है।
यूपी जैसे विशाल जनसंख्या तथा विविधता वाले प्रदेश के लिए यह आवश्यक है कि सरकार की नीतियां दीर्घकालीन लाभ तथा आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बनाई जाएं। पिछले कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी द्वारा शुरू की गई औद्योगिक विकास, निवेश प्रोत्साहन तथा रोजगार सृजन की योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव दिखने लगा है। निरंतरता के इस मूलमंत्र के आधार पर मुख्यमंत्री ने हर विभाग को 100 दिन, छह माह और वार्षिक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए, जिससे सरकार के काम में दक्षता और समयबद्धता लगातार बनी रहे।
दूसरे राज्यों को कड़ी टक्कर
सरकार इस तथ्य के प्रति संवेदनशील है कि यूपी भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य होने के साथ ही देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इस राज्य में होने वाला आर्थिक, औद्योगिक और राजनीतिक घटनाक्रम पूरे देश के भविष्य पर दूरगामी प्रभाव डालता है।
देश के पांच सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्था के राज्यों में भी यूपी का विशिष्ट स्थान है। यह राज्य हैं महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, और गुजरात। राष्ट्रीय कृषि उत्पादन के सकल मूल्य वर्धित (ग्रॉस स्टेट वैल्यू-एडेड या जीएसवीए) में उत्तर प्रदेश का योगदान लगातार बढ़ रहा है और वर्ष 2020-21 में यह 26 प्रतिशत था।
एक्सप्रेसवे दे रहे विकास को रफ्तार
यूपी का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 2020 में लगभग 227 बिलियन अमेरिकी डॉलर था और यदि एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य देखा जाए, तो यह 2030 तक प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए प्रति वर्ष 18 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखना जरूरी होगा। इसे ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में पिछले कार्यकाल में योगी सरकार ने यूपी को देश में नंबर एक एक्स्प्रेसवे राज्य बनाने का संकल्प लिया था और इस दिशा में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का लोकार्पण भी किया। चित्रकूट से इटावा को जोड़ने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का काम पूरा हो चुका है। इसे जल्द जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। गंगा एक्सप्रेसवे, जो पश्चिमी यूपी को पूर्वी यूपी से जोड़ेगी, का काम आने वाले दिनों में शुरू होने जा रहा है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और बलिया लिंक एक्सप्रेसवे का काम युद्धस्तर पर जारी है।
हवाई नेटवर्क पर भी फोकस
नोएडा स्थित जेवर में प्रदेश के पांचवें अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण कार्य जारी है। इसी के साथ नोएडा में इंटरनेशनल कार्गो हब बनाने की दिशा में भी काम हो रहा है। राष्ट्रीय परियोजना गतिशक्ति के अंतर्गत परिवहन की योजनाओं पर भी काम शुरू हो चुका है।
औद्योगिक निवेश के लिए सरकार द्वारा विगत तीन जून को तीसरी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का आयोजन किया गया, जिसमे देश के प्रख्यात उद्योग समूहों द्वारा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में 1406 प्रस्तावों से लगभग 80,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा।