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सीएम की सख्ती के बाद कोविड अस्पताल की व्यवस्था में सुधार की कवायद शुरू, लोकबंधु अस्पताल में बढ़े बेड
Tue, 21 Jul 2020 10:58 AM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 21 Jul 2020 10:58 AM IST
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सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद हालांकि अभी कोविड अस्पताल में भर्ती के लिए मरीजों का इंतजार तो नहीं घटा, लेकिन व्यवस्था में सुधार की कवायद जरूर शुरू हो गई है। सोमवार को लोकबंधु अस्पताल में जहां 100 बेड बढ़ा दिए गए वहीं केजीएमयू में भी बेड बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने के लिए बैठक हुई। साथ ही सिविल अस्पताल में कोविड एंबुलेंस सेवा शुरू कर दी गई।
लखनऊ में अभी ये हालात हैं कि कोरोना मरीजों को शिफ्टिंग के लिए तीन से चार दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे नॉन कोविड अस्पताल भी परेशान हैं। यहां दूसरी बीमारी का इलाज कराने के लिए भर्ती मरीजों में कोरोना की पुष्टि के बाद उन्हें कोविड अस्पताल भेजना मुश्किल हो रहा है।
लिवर में दिक्कत के चलते विवेकानंद अस्पताल में 15 जुलाई को भर्ती हुए अशोक की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 16 जुलाई से अस्पताल प्रशासन सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल व कंट्रोल रूम में फोन कर मरीज को कोविड अस्पताल में शिफ्ट करने को कह रहा है, लेकिन सोमवार तक उन्हें शिफ्ट नहीं किया गया।
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इसके अलावा अस्पताल में ऐसे ही दो अन्य मरीज भी चार दिन से पड़े हैं। इसी तरह अन्य निजी अस्पतालों में करीब 10 कोरोना पॉजिटिव मरीज शिफ्टिंग के इंतजार में पड़े हैं। इसी तरह सिविल अस्पताल की इमरजेंसी समेत वार्ड में 36 घंटे से पड़े तीन कोरोना मरीजों को सूचना के बाद भी सीएमओ कार्यालय ने शिफ्ट नहीं कराया है।
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लखनऊ में अभी ये हालात हैं कि कोरोना मरीजों को शिफ्टिंग के लिए तीन से चार दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे नॉन कोविड अस्पताल भी परेशान हैं। यहां दूसरी बीमारी का इलाज कराने के लिए भर्ती मरीजों में कोरोना की पुष्टि के बाद उन्हें कोविड अस्पताल भेजना मुश्किल हो रहा है।
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लिवर में दिक्कत के चलते विवेकानंद अस्पताल में 15 जुलाई को भर्ती हुए अशोक की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 16 जुलाई से अस्पताल प्रशासन सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल व कंट्रोल रूम में फोन कर मरीज को कोविड अस्पताल में शिफ्ट करने को कह रहा है, लेकिन सोमवार तक उन्हें शिफ्ट नहीं किया गया।
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इसके अलावा अस्पताल में ऐसे ही दो अन्य मरीज भी चार दिन से पड़े हैं। इसी तरह अन्य निजी अस्पतालों में करीब 10 कोरोना पॉजिटिव मरीज शिफ्टिंग के इंतजार में पड़े हैं। इसी तरह सिविल अस्पताल की इमरजेंसी समेत वार्ड में 36 घंटे से पड़े तीन कोरोना मरीजों को सूचना के बाद भी सीएमओ कार्यालय ने शिफ्ट नहीं कराया है।
नर्सिंग छात्रा व नर्स के पति को नहीं मिला बेड
सदर के बनिया मुहाल निवासी 80 साल की गुरुवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। बेटे ने सीएमओ कंट्रोल रूम फोन कर एंबुलेंस की मांग की, लेकिन सोमवार तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। हुसैनगंज निवासी प्रभात कुमार के दामाद और बेटी कोरोना पॉजिटिव मिले। दामाद को तो भर्ती करा दिया गया, लेकिन बेटी तीन दिन से घर में एंबुलेंस का इंतजार कर रही है। मरीजों का कहना है कि सीएमओ ने अपना सीयूजी नंबर एक कर्मचारी को दे रखा है, वह सिर्फ आश्वासन ही दे रहा है।
पीजीआई में कार्यरत नर्स के पति और नर्सिंग छात्रा के पॉजिटिव आने पर इनको भी संस्थान के कोविड हॉस्पिटल में बेड नहीं मिला। बेड खाली न होने की बात कह इन्हें लौटा दिया गया। नर्स के पति की रविवार को तो नर्सिंग छात्रा की सोमवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इन्हें भर्ती न करने से नाराज कुछ कर्मचारी डायरेक्टर कार्यालय तक पहुंच गए, लेकिन वह केजीएमयू गए थे। नर्सिंग कर्मचारी संघ की अध्यक्ष सीमा शुक्ला ने कहा कि संस्थान प्रशासन को कर्मचारियों के लिए बेड आरक्षित करना होगा।
जल्द शिफ्ट कराया जाएगा
सूचना आने पर दो घंटे के अंदर मरीजों को अस्पताल में शिफ्ट कराया जा रहा है। जो मरीज नॉन कोविड अस्पताल में बचे हैं, उन्हें भी जल्द शिफ्ट कराया जाएगा। - डॉ. केपी त्रिपाठी, जिला कोरोना नोडल अफसर
पीजीआई में कार्यरत नर्स के पति और नर्सिंग छात्रा के पॉजिटिव आने पर इनको भी संस्थान के कोविड हॉस्पिटल में बेड नहीं मिला। बेड खाली न होने की बात कह इन्हें लौटा दिया गया। नर्स के पति की रविवार को तो नर्सिंग छात्रा की सोमवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इन्हें भर्ती न करने से नाराज कुछ कर्मचारी डायरेक्टर कार्यालय तक पहुंच गए, लेकिन वह केजीएमयू गए थे। नर्सिंग कर्मचारी संघ की अध्यक्ष सीमा शुक्ला ने कहा कि संस्थान प्रशासन को कर्मचारियों के लिए बेड आरक्षित करना होगा।
जल्द शिफ्ट कराया जाएगा
सूचना आने पर दो घंटे के अंदर मरीजों को अस्पताल में शिफ्ट कराया जा रहा है। जो मरीज नॉन कोविड अस्पताल में बचे हैं, उन्हें भी जल्द शिफ्ट कराया जाएगा। - डॉ. केपी त्रिपाठी, जिला कोरोना नोडल अफसर