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रियल एस्टेट कंपनी खोलने का झांसा देकर महिला जालसाज ने कारोबारियों से ठगे 1.37 करोड़ रुपये

Mon, 03 Jan 2022 01:36 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 03 Jan 2022 01:36 AM IST
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1.37 crore fraud by lady
लखनऊ। रियल एस्टेट कंपनी खोलने का झांसा देकर महिला जालसाज ने पांच कारोबारियों से 1.37 करोड़ रुपये की ठगी की। ठगी के शिकार पांचों लोग लखीमपुर खीरी के कारोबारी हैं। पीड़ितों को ठगी अहसास होने पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर से शिकायत की। पुलिस कमिश्नर से शिकायत करने के पांच महीने बाद लखनऊ की हसनगंज पुलिस ने ठगी का मुकदमा दर्ज किया है।
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मूलरूप से लखीमपुर खीरी के धौरहरा इलाके के रहने वाले मो. शाबान, मुश्ताक, फैजल किरमानी, मुरसलीन और मो. यूनुस का अपना कारोबार है। शाबान के मुताबिक, उनकी मुलाकात हसनगंज निरालानगर इरादतनगर कदम रसूल के रहने वाले मो. मेराज की पत्नी ऊषा चौधरी से हुई। आरोप है कि इन सभी से ऊषा ने एक रियल एस्टेट कंपनी खोलने का प्रस्ताव रखा। इसके लिए कई जगह जमीन दिखाई। ऊषा ने पांचों कारोबारियों को रियल एस्टेट कंपनी में हिस्सेदारी देने की बात कही। शर्त के मुताबिक सभी ने अपने नाम से पर्सनल व हाउसिंग लोन लेकर रकम ऊषा को सौंपी। ऊषा ने सभी को झांसा दिया कि जो भी मकान व जमीन दिखाई, उसकी रकम का कंपनी के नाम से ही भुगतान किया जाएगा।
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पीड़ितों के मुताबिक, ऊषा ने सभी से अपने खाते में रकम जमा कराई। मो. शाबान से 40 लाख रुपये, मुश्ताक से 31 लाख रुपये, फैजल से 29 लाख, यूनुस से 20 लाख रुपये, मुरसलीन से 17.50 लाख रुपये जमा कराए। सभी ने आधी रकम पर्सनल व आधी रकम हाउसिंग लोन कराकर ऊषा को दिए। आरोप है कि ऊषा ने बैंक कर्मचारियों से मिलीभगत कर कारोबारियों के मोबाइल नंबर न देकर दूसरे मोबाइल नंबर डाले जो उसके पास थे। इससे ओटीपी ऊषा के नंबर पर आता था। कारोबारियों ने आरोप लगाया कि काफी समय बीत जाने के बाद भी कोई मुनाफा नहीं मिला। न ही उनकी पूंजी ही वापस मिली। इस पर सभी ने ऊषा से अपने हिस्सेदारी मांगी। उसने कारोबारियों को झांसा दिया कि वह उनकी ईएमआई की रकम खुद जमा करती रहेगी। कुछ की ईएमआई की रकम जमा करने केबाद बंद कर दी। इसके बाद बैंक ने रिकवरी नोटिस भेजा। वहीं जब ऊषा से रुपये मांगे तो उसने इनकार कर दिया और जान से मारने व फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देने लगी। आरोप है कि उसके खिलाफ लखीमपुर के धौरहरा में भी कई मामले दर्ज हैं।
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पांच महीने लग गए मुकदमा दर्ज में
पीड़ितों के मुताबिक, उन्होंने ऊषा के खिलाफ हसनगंज थाने में तहरीर दी मगर सुनवाई नहीं हुई। 13 अगस्त को पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर से मिले। उनके आदेश पर पांच महीने बाद केस दर्ज हो सका। प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सोनकर के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है।
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