08:59 PM, 08-Sep-2022
आइये, इस नवनिर्मित कर्तव्यपथ को आकर देखिए
पीएम मोदी ने कहा कि मैं देश के हर एक नागरिक का आह्वान करता हूं, आप सभी को आमंत्रण देता हूं। आइये, इस नवनिर्मित कर्तव्यपथ को आकर देखिए। इस निर्माण में आपको भविष्य का भारत नज़र आएगा। यहां की ऊर्जा आपको हमारे विराट राष्ट्र के लिए एक नया विजन देगी, एक नया विश्वास देगी।
08:44 PM, 08-Sep-2022
देश अब अपनी श्रम शक्ति पर गर्व कर रहा
पीएम मोदी बोले- आज के इस अवसर पर, मैं अपने उन श्रमिक साथियों का विशेष आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने कर्तव्यपथ को केवल बनाया ही नहीं है, बल्कि अपने श्रम की पराकाष्ठा से देश को कर्तव्य पथ दिखाया भी है। नए भारत में आज श्रम और श्रमजीवियों के सम्मान की एक संस्कृति बन गई है, एक परंपरा पुनर्जीवित हो रही है। जब नीतियों में संवेदनशीलता आती है, तो निर्णय भी उतने ही संवेदनशील होते चले जाते हैं, इसलिए देश अब अपनी श्रम शक्ति पर गर्व कर रहा है।
08:40 PM, 08-Sep-2022
कर्तव्य पथ केवल ईंट-पत्थरों का रास्ता नहीं
पीएम मोदी बोले- कर्तव्य पथ केवल ईंट-पत्थरों का रास्ता भर नहीं है। ये भारत के लोकतांत्रिक अतीत और सर्वकालिक आदर्शों का जीवंत मार्ग है। अगर पथ ही राजपथ हो, तो यात्रा लोकमुखी कैसे होगी? राजपथ ब्रिटिश राज के लिए था, जिनके लिए भारत के लोग गुलाम थे। राजपथ की भावना भी गुलामी का प्रतीक थी, उसकी संरचना भी गुलामी का प्रतीक थी। आज इसका आर्किटेक्चर भी बदला है, और इसकी आत्मा भी बदली है।
08:33 PM, 08-Sep-2022
गुलामी की मानसिकता के परित्याग ये पहला उदाहरण नहीं
पीएम मोदी ने कहा, आज अगर राजपथ का अस्तित्व समाप्त होकर कर्तव्यपथ बना है, आज अगर जॉर्ज पंचम की मूर्ति के निशान को हटाकर नेताजी की मूर्ति लगी है, तो ये गुलामी की मानसिकता के परित्याग का पहला उदाहरण नहीं है। ये न शुरुआत है, न अंत है। आज देश अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे सैकड़ों कानूनों को बदल चुका है। भारतीय बजट, जो इतने दशकों से ब्रिटिश संसद के समय का अनुसरण कर रहा था, उसका समय और तारीख भी बदली गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए अब विदेशी भाषा की मजबूरी से भी देश के युवाओं को आजाद किया जा रहा है।
08:27 PM, 08-Sep-2022
आज हमारे अपने पथ, अपने प्रतीक
पीएम मोदी ने संबोधन में कहा कि आज भारत के आदर्श अपने हैं, आयाम अपने हैं। आज भारत के संकल्प अपने हैं, लक्ष्य अपने हैं। आज हमारे पथ अपने हैं, प्रतीक अपने हैं।
08:24 PM, 08-Sep-2022
देश ने अपने लिए 'पंच प्रणों' का विजन रखा
आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर देश ने अपने लिए 'पंच प्रणों' का विजन रखा है। इन पंच प्राणों में विकास के बड़े लक्ष्यों का संकल्प है, कर्तव्यों की प्रेरणा है। इसमें गुलामी की मानसिकता के त्याग का आहृवान है। अपनी विरासत पर गर्व का बोध है।
08:21 PM, 08-Sep-2022
नेता जी के पास विचार थे, विजन था
सुभाषचंद्र बोस ऐसे महामानव थे, जो पद और संसाधनों की चुनौती से परे थे। उनकी स्वीकार्यता ऐसी थी कि पूरा विश्व उन्हें नेता मानता था। उनमें साहस था, स्वाभिमान था। उनके पास विचार थे, विजन था। उनमें नेतृत्व की क्षमता थी, नीतियां थीं।
08:19 PM, 08-Sep-2022
नेता जी ने कल्पना की थी लाल किले पर तिरंगा फहराने की
नेता जी ने कल्पना की थी कि लाल किले पर तिरंगा फहराने की क्या अनुभूति होगी। इस अनुभूति का साक्षात्कार मैंने स्वयं किया, जब मुझे आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष होने पर लाल किले पर तिरंगा फहराने का सौभाग्य मिला।
08:16 PM, 08-Sep-2022
नेता जी में नेतृत्व की थी अद्भूत क्षमता
नेता जी में नेतृत्व की अद्भूत क्षमता थी। आजादी के बाद नेता जी के योगदान को भुला दिया गया। देश अगर नेता जी की नीतियों पर चला होता तो आज तस्वीर कुछ और होती।
08:11 PM, 08-Sep-2022
नेता जी को पूरा विश्व मानता था अपना नेता
आज का दिन पूरे देश के लिए ऐतिहासिक है। देश में नया रंग भरने का काम हुआ है। नेता जी को पूरा देश अपना नेता मानता था। दुर्भाग्य से इस नेता को भुला दिया गया।