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युवा दिवस 2020: हालात पर भारी हौसले, जम्मू-कश्मीर की इस बेटी ने रचा इतिहास, पेश की अद्भुत नजीर
Sun, 12 Jan 2020 12:47 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sun, 12 Jan 2020 12:47 PM IST
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इरमीम शमीम
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कहते हैं पंखों से नहीं हौसलों से उड़ान भरी जाती है...जम्मू-कश्मीर के हालात अक्सर यहां के युवाओं के सपनों को दबाने का प्रयास करते हैं। लेकिन घाटी की इस धरती पर कुछ ऐसे भी होनहार सामने आते हैं जो हालातों को कुचलकर अपनी मंजिल पा लेते हैं। आज युवा दिवस के मौके पर हम आपको संघर्ष के पथ पर चलकर सफलता पाने वाली एक होनहार लड़की की कहानी से रूबरू कराने जा रहे हैं...
कुछ ऐसी ही कहानी है पहले ही प्रयास में एम्स एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा पास करने वाली इरमीम शमीम की। राजोरी जिले के धनौर गांव की रहने वाली इरमीम शमीम गुर्जर समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने साल 2019 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की प्रवेश परीक्षा पास कर अपनी मंजिल पाई।
बता दें कि इरमीम अपने सपनों को साकार करने के लिए रोजाना 10 किलोमीटर का सफर तय करना होता था। यह दूरी इरमीम पैदल ही तय करती थीं। इसकी वजह थी कि उनके गांव के पास कोई अच्छा स्कूल नहीं था। इरमीम कहती हैं कि सभी के जीवन में कुछ न कुछ समस्या होती है, लेकिन चुनौतियों से लड़ने पर ही सफलता आपके पास आएगी। इरमीम के घरवालों की चाहत है कि बेटी एक सफल डॉक्टर बनें। वह जम्मू-कश्मीर और देश के लोगों की सेवा करें।
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इस सफलता के बाद इरमीम के हौसले की खूब चर्चा हुई। आज इरमीम युवाओं के लिए आदर्श बन चुकी हैं। संघर्ष करने वालों के लिए इरमीम का जुनून पथ-प्रदर्शक का कार्य कर रहा है। वहीं जब इरमीम की इस सफलता के बारे में जिला विकास आयुक्त एजाज असद को जानकारी हुई तो उन्होंने भी इरमीम की उपलब्धि की सराहना की थी। साथ ही उन्होंने हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया था।
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कुछ ऐसी ही कहानी है पहले ही प्रयास में एम्स एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा पास करने वाली इरमीम शमीम की। राजोरी जिले के धनौर गांव की रहने वाली इरमीम शमीम गुर्जर समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने साल 2019 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की प्रवेश परीक्षा पास कर अपनी मंजिल पाई।
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बता दें कि इरमीम अपने सपनों को साकार करने के लिए रोजाना 10 किलोमीटर का सफर तय करना होता था। यह दूरी इरमीम पैदल ही तय करती थीं। इसकी वजह थी कि उनके गांव के पास कोई अच्छा स्कूल नहीं था। इरमीम कहती हैं कि सभी के जीवन में कुछ न कुछ समस्या होती है, लेकिन चुनौतियों से लड़ने पर ही सफलता आपके पास आएगी। इरमीम के घरवालों की चाहत है कि बेटी एक सफल डॉक्टर बनें। वह जम्मू-कश्मीर और देश के लोगों की सेवा करें।
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इस सफलता के बाद इरमीम के हौसले की खूब चर्चा हुई। आज इरमीम युवाओं के लिए आदर्श बन चुकी हैं। संघर्ष करने वालों के लिए इरमीम का जुनून पथ-प्रदर्शक का कार्य कर रहा है। वहीं जब इरमीम की इस सफलता के बारे में जिला विकास आयुक्त एजाज असद को जानकारी हुई तो उन्होंने भी इरमीम की उपलब्धि की सराहना की थी। साथ ही उन्होंने हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया था।