{"_id":"6e0a3a26270fd055f9b7afd3c31c929c","slug":"writ-regarding-chopper-service-in-machail-yatra-dismissed-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मचेल यात्रा: उड़ान भरने के टेंडर पर आपत्ति खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मचेल यात्रा: उड़ान भरने के टेंडर पर आपत्ति खारिज
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 09 Aug 2014 02:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मचेल यात्रा के दौरान हेलीकाप्टर सेवा मुहैया करवाने के लिए आयोजित बोली को चुनौती देते हुए आर्यन एविएशन प्राइवेट लि. की ओर से दायर याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता के अनुसार एक माह की यात्रा के दौरान हेलीकाप्टर सेवा के लिए प्रशासन ने टेंडर खोला था, जिसमें चार पार्टियों ने टेंडर भरे।
विज्ञापन
23 जून 2014 को कमेटी के सदस्यों और बोली लगाने वाली कंपनियों के सामने तकनीकी बोली को खोला गया। चार में से दो कंपनियों, त्रिकुटा ट्रैवल प्लानर और पिनाकेल एयर प्राइवेट लि. के टेंडर तकनीकी आधार पर खारिज कर दिए गए, जबकि याचिकाकर्ता द्वारा टेंडर में खंड 7(एच) के तहत आवश्यक एफिडेविट नहीं भरा गया था। याचिकाकर्ता की दलील थी कि टेंडर खोलने के दौरान डायरेक्टोरेट जनरल आफ सिविल एविएशन, नई दिल्ली के कार्यालय से कोई विशेषज्ञ उपस्थित नहीं था।
विज्ञापन
जबकि वही एकमात्र अथारिटी है, जो तकनीकी बोली को स्वीकार या खारिज कर सकती है। याचिका में आरोप लगाया गया कि चौथी कंपनी कानूनी रूप से अवैध है और उसने टेंडर की शर्तों को पूरा भी नहीं किया है। तमाम दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस ताशी राबस्तन ने कहा कि याचिकाकर्ता को कंपनी के बोर्ड आफ डायरेक्टर के तमाम सदस्यों की बजाए सिर्फ एक सदस्य ने अधिकृत किया है।
विज्ञापन
अदालत ने पूछा कि क्या बोर्ड के अन्य सदस्यों ने याचिका दायर करने की सहमति प्रदान की है। यदि याचिका सिर्फ इसी याचिकाकर्ता की ओर से लगाई गई है, तब इसे खारिज किया जाता है। याचिकाकर्ता कंपनी ने अपनी स्थिति को स्पष्ट करे कि क्या उसके पास याचिका पर हस्ताक्षर करने की अथारिटी है।
वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है कि बोर्ड के तमाम सदस्यों ने याचिकाकर्ता को याचिका दायर करने की अनुमति प्रदान की है। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए याचिका को खारिज किया जाता है।