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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Work on Nyoma airbase will be completed in October, Air Force strength will increase

चीन-पाकिस्तान को जवाब देने को तैयार भारत: अक्तूबर में पूरा होगा न्योमा एयरबेस का काम, बढ़ेगी वायुसेना ताकत

Tue, 22 Jul 2025 12:26 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला, नेटवर्क लेह
अमर उजाला, नेटवर्क लेह Published by: निकिता गुप्ता Updated Tue, 22 Jul 2025 12:26 PM IST
सार

लद्दाख के न्योमा में 13,700 फीट की ऊंचाई पर बन रहा सामरिक एयरबेस अक्तूबर तक पूरा हो जाएगा, जिससे भारत को एलएसी पर रणनीतिक बढ़त मिलेगी। इस एयरबेस से वायुसेना राफेल और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों की तैनाती के साथ चीन और पाकिस्तान दोनों पर नजर रख सकेगी।

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Work on Nyoma airbase will be completed in October, Air Force strength will increase
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

लद्दाख के न्योमा में बन रहा सामरिक रूप से अति महत्वपूर्ण लड़ाकू एयरबेस इसी साल अक्तूबर में पूरा हो जाएगा। इससे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर राष्ट्रीय सुरक्षा और कनेक्टिविटी बढ़ेगी। सैन्य बुनियादी ढांचा मजबूत होगा और वायुसेना की ताकत बढ़ेगी।

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चीन सीमा के पास स्थित यह एयरबेस भारत को एलएसी पर बढ़त देगा। 2.7 किलोमीटर लंबे रनवे का निर्माण पूरा होने से वायुसेना चीन के साथ ही पाकिस्तान पर भी नजर रख सकेगी। यह एयरबेस एलएसी से 50 किमी दूर करीब 13,700 फीट की ऊंचाई पर है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और वायुसेना के नेतृत्व में इसका परियोजना पर काम अंतिम चरण में हैं।

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इस एयरबेस से पूर्वी लद्दाख के उप क्षेत्र उत्तर में हवाई संचालन और रसद पहुंचाना आसान होगा। बमरोधी हैंगर और उन्नत सुविधाओं के साथ राफेल और सुखोई-30 जैसे लड़ाकू विमान आसानी से उड़ान भर सकेंगे। लेह और थोईस एयरबेस की तुलना में विश्वसनीय संचालन होगा।

वायुसेना 2020 के गलवां संघर्ष के दौरान सी-130जे, एएन-32 और अपाचे हेलिकॉप्टरों के लिए न्योमा के एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड का इस्तेमाल कर चुकी है। कर्नल पोनुंग डोमिंग के नेतृत्व में परियोजना न्योमा को प्रमुख कमांड-एंड-कंट्रोल केंद्र बनाएगी। इससे ड्रोन व हमलावर हेलिकॉप्टरों को सहायता मिलेगी।

चीन के आक्रामक सैन्य निर्माण का सीधा जवाब
रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह पूर्वी लद्दाख में भारत की वायु शक्ति को बढ़ाएगा। गलवां संघर्ष के बाद से चीन के साथ चल रहे तनाव से यह चिह्नित क्षेत्र है। लेह की तुलना में न्योमा की समतल घाटी और अधिक स्थिर मौसम लड़ाकू और परिवहन विमानों का परिचालन आसान होगा। ये बुनियादी ढांचा एलएसी पर चीन के आक्रामक सैन्य निर्माण का सीधा जवाब है।

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