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सेना के साथ मिलकर आतंकवादियों को ऐसे मुंहतोड़ जवाब दे रही हैं कश्मीर की महिलाएं

Mon, 17 Dec 2018 01:38 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Mon, 17 Dec 2018 01:38 PM IST
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womens of kashmir are giving lead to indian army in surgical operations to kill militants
srinagar - फोटो : अमर उजाला
आतंकवाद का कश्मीरी महिलाएं विरोध कर रही हैं। आए दिन खून-खराबा और घाटी के खराब माहौल से तंग आकर महिलाएं सुरक्षाबलों को आतंकियों का ठिकाना बता रही हैं। दूसरा कारण यह है कि कश्मीरी महिलाओं को आतंकी तंग करते हैं, जिससे परेशान होकर वे सुरक्षा तंत्र का हिस्सा बन कर आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब दे रही हैं। 
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महिलाओं की सूचनाओं और उनके सहयोग से सुरक्षा बलों ने इस साल 250 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराने में कामयाबी हासिल की है। इनमें 90 से अधिक लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में आतंकियों को पहली बार ढेर किया गया। घाटी में सुरक्षा बल अब सीधे आतंकियों को घेर कर मार रहे हैं। पहले सुरक्षा बलों के पहुंचने से पहले आतंकी अपना ठिकाना बदल देते थे।
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अपने बच्चों की सुरक्षित भविष्य चाहती हैं महिलाएं

आतंकी के छिपे होने की सूचना प्राप्त करने के बाद कासो चलाया जाता था, जिसके कारण उन्हें लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ता रहा है। अब आतंकी कमांडरों को योजनाबद्ध तरीके से मुठभेड़ में मारा जा रहा है। सुरक्षाबल अब रात को भी आपरेशन चला रहे हैं। पहले रात को आपरेशन चलाना बंद कर दिया गया था। ढूंढो और मारो की रणनीति के बाद अब सुरक्षा बल महिलाओं और अन्य लोगों के सहयोग से आतंकी को घेरकर मार रहे हैं । 

घाटी में आतंकवाद के शुरुआत से ही कश्मीरी युवतियों को आतंकी तंग करते रहे हैं। पहले जेहाद के नाम पर ओवर ग्राउंड वर्कर बनकर महिलाएं आतंकियों का समर्थन कर रही थीं। जब उन्हें तंग ज्यादा किया जाने लगा और बंदूक की नोक पर हवस का शिकार बनाया जाने लगा तो महिलाओं ने अपना रुख बदला। नतीजा यह हुआ कि कई आतंकी कमांडर तब घेर कर मारे गए, जब वे प्रेमिका से मिलने जा रहे थे। 

स्थानीय युवकों द्वारा बंदूक थामने के बाद महिलाओं की सोच बदली है। वह अपने बच्चों के भविष्य के बारे में चिंतित हैं। उन्हें डर सताने लगा कि कहीं उनका बच्चा भी आतंक की राह न पकड़ ले। इसलिए ज्यादातर कश्मीरी महिलाएं सुरक्षा बलों का सहारा बन रही हैं। वे चाहती हैं कि आतंक का खेल अब बंद हो।

 

सूचना तंत्र मजबूत होने का असर 

रक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता के अनुसार कश्मीर में सुरक्षा तंत्र मजबूत हुआ है। सेना और पुलिस के तालमेल बढ़ा है। राजनीतिक हस्तक्षेप कम होने से सेना अब आतंकियों को सीधा निशाना रही है। महिलाओं की भूमिका इसमें अधिक है। वे आतंकियों के ठिकाने तक सेना को पहुंचा रही हैं। क्योंकि महिलाएं तंग हैं। आतंकी किसी भी समय उनके घरों में घुस रहे हैं। कश्मीर में 40 फीसदी लोग ही अलगाववाद और अलगाववादी विचारधारा के हो सकते हैं। 60 फीसदी लोग न्यूट्रल हैं। उन्होंने कहा कि ओवर ग्राउंड वर्कर, आतंकी फंडिंग और आतंकी समर्थकों पर शिकंजा कसने की जरूरत है।
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