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Jammu News: टूटते रिश्तों की डोर जोड़ रहा जम्मू के गांधीनगर का महिला पुलिस थाना
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अंकित कुमार मिश्रा
जम्मू। जम्मू शहर में एक महिला पुलिस थाना है। इसका पूरा नाम महिला पुलिस थाना गांधीनगर है। महिलाओं को समर्पित यह थाना सिर्फ मामला दर्ज करने के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि यहां रिश्तों की डोर टूटने से बचाई जाती है। घरेलू हिंसा, अनबन और सास-बहू में टकराव को यहां प्रेम की डोर में बांधा जा रहा है।
गांधीनगर में महिला पुलिस थाने को महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सहज वातावरण प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है। जिन उम्मीदों से पुलिस विभाग ने इसे खोला था, वह अब फलीभूत होने लगी हैं। आंकड़े गवाह हैं कि बीते तीन वर्षों में दो हजार से अधिक परिवार टूटने से बचाए गए हैं। उदास, रोती हुईं और चोट खाईं महिलाएं यहां आने के बाद मुस्कुराते हुए बाहर निकलती और घर लौटती देखी जाती हैं। यह उम्मीदों से कहीं अधिक है कि उजड़ने की कगार पर खड़े परिवारों की नींव इस पुलिस थाने के प्रयासों से और मजबूत हो रही है।
महिला पुलिस थाने में घरेलू हिंसा, पति-पत्नी, सास-बहू की अनबन समेत महिलाओं से जुड़े घरेलू विवादों को सुलझाने और अदालत चक्कर से बचाने के लिए काउंसलिंग सेल खोला गया है। यहां आने वाली महिलाओं की शिकायत सुनकर केस फाइल करने से पहले काउंसलिंग की जाती है। वजह को अपनों की तरह सुना जाता है। महिला पुलिस कर्मी और अधिकारी पीड़ितों के मन की गहराई में जाकर उनकी टीस को जानने का प्रयास करते हैं। जिनसे शिकायत है, उन्हें भी बुलाया जाता है और शिकायत की वजह समझी व समझाई जाती है।
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महिला पुलिस थाने का प्रयास है कि हर पीड़िता को सकारात्मक सोच के साथ घर भेजा जाए। उन्हें मुकदमेबाजी से बचाया जाए। काउंसलिंग सेल अपने इस मकसद में कामयाब हो रहा है। बीते तीन वर्षों में अब तक 2660 में से 2392 शिकायतों का निस्तारण किया गया। ये परिवार आए तो थे रिश्ते तोड़ने की जिद लेकर, लेकिन काउंसलिंग का असर दिखा और रिश्तों की उलझी हुई डोर सुलझ गई।
ये मामले लेकर आती हैं महिलाएं
महिला पुलिस थाने में आने वाली शिकायतों में घरेलू हिंसा के मामले सर्वाधिक हैं। इसके अलावा ससुराल वालों के साथ अनबन, सास और पति की प्रताड़ना व उनकी रोकटोक से परेशान होकर महिलाएं यहां आती हैं।
ये दो मामले तो बानगी हैं
केस- 1
जम्मू जिले के आरएस पुरा निवासी एक दंपती विवाह के पांच महीने बाद पारिवारिक झगड़ों को लेकर महिला थाने पहुंचे। काउंसलिंग में पता चला कि झगड़े की वजह सिर्फ एक-दूसरे की बात की उपेक्षा करना और इसे न मानना है। इसके बाद पति-पत्नी को दोबारा बुलाकर समझाया गया और फिर से काउंसलिंग की गई। इसमें दोनों की राय ली गई। अंतत: दोनों एक-दूसरे की बात पर सहमत होकर खुशी-खुशी घर लौट गए।
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केस- 2
जम्मू शहर के एक इलाके की निवासी सास-बहू में झगड़ा इतना बढ़ा कि यह महिला थाने की चौखट तक पहुंच गया। इस मामले में भी तीन से चार बार दोनों पक्षों के साथ काउंसलिंग कराई गई। प्रयास सफल रहा और वर्तमान में वह खुशी से साथ रह रही हैं।
महिला पुलिस थाने की काउंसलिंग में आने वाली शिकायतों को धैर्यपूर्वक सुना जाता है। परिवार के रिश्ते को टूटने से बचाने की पूरी कोशिश की जाती है और हम इसमें सफल भी हो रहे हैं।
-आरती ठाकुर, एसएचओ, महिला पुलिस थाना, गांधीनगर
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जम्मू। जम्मू शहर में एक महिला पुलिस थाना है। इसका पूरा नाम महिला पुलिस थाना गांधीनगर है। महिलाओं को समर्पित यह थाना सिर्फ मामला दर्ज करने के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि यहां रिश्तों की डोर टूटने से बचाई जाती है। घरेलू हिंसा, अनबन और सास-बहू में टकराव को यहां प्रेम की डोर में बांधा जा रहा है।
गांधीनगर में महिला पुलिस थाने को महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सहज वातावरण प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है। जिन उम्मीदों से पुलिस विभाग ने इसे खोला था, वह अब फलीभूत होने लगी हैं। आंकड़े गवाह हैं कि बीते तीन वर्षों में दो हजार से अधिक परिवार टूटने से बचाए गए हैं। उदास, रोती हुईं और चोट खाईं महिलाएं यहां आने के बाद मुस्कुराते हुए बाहर निकलती और घर लौटती देखी जाती हैं। यह उम्मीदों से कहीं अधिक है कि उजड़ने की कगार पर खड़े परिवारों की नींव इस पुलिस थाने के प्रयासों से और मजबूत हो रही है।
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महिला पुलिस थाने में घरेलू हिंसा, पति-पत्नी, सास-बहू की अनबन समेत महिलाओं से जुड़े घरेलू विवादों को सुलझाने और अदालत चक्कर से बचाने के लिए काउंसलिंग सेल खोला गया है। यहां आने वाली महिलाओं की शिकायत सुनकर केस फाइल करने से पहले काउंसलिंग की जाती है। वजह को अपनों की तरह सुना जाता है। महिला पुलिस कर्मी और अधिकारी पीड़ितों के मन की गहराई में जाकर उनकी टीस को जानने का प्रयास करते हैं। जिनसे शिकायत है, उन्हें भी बुलाया जाता है और शिकायत की वजह समझी व समझाई जाती है।
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महिला पुलिस थाने का प्रयास है कि हर पीड़िता को सकारात्मक सोच के साथ घर भेजा जाए। उन्हें मुकदमेबाजी से बचाया जाए। काउंसलिंग सेल अपने इस मकसद में कामयाब हो रहा है। बीते तीन वर्षों में अब तक 2660 में से 2392 शिकायतों का निस्तारण किया गया। ये परिवार आए तो थे रिश्ते तोड़ने की जिद लेकर, लेकिन काउंसलिंग का असर दिखा और रिश्तों की उलझी हुई डोर सुलझ गई।
ये मामले लेकर आती हैं महिलाएं
महिला पुलिस थाने में आने वाली शिकायतों में घरेलू हिंसा के मामले सर्वाधिक हैं। इसके अलावा ससुराल वालों के साथ अनबन, सास और पति की प्रताड़ना व उनकी रोकटोक से परेशान होकर महिलाएं यहां आती हैं।
ये दो मामले तो बानगी हैं
केस- 1
जम्मू जिले के आरएस पुरा निवासी एक दंपती विवाह के पांच महीने बाद पारिवारिक झगड़ों को लेकर महिला थाने पहुंचे। काउंसलिंग में पता चला कि झगड़े की वजह सिर्फ एक-दूसरे की बात की उपेक्षा करना और इसे न मानना है। इसके बाद पति-पत्नी को दोबारा बुलाकर समझाया गया और फिर से काउंसलिंग की गई। इसमें दोनों की राय ली गई। अंतत: दोनों एक-दूसरे की बात पर सहमत होकर खुशी-खुशी घर लौट गए।
केस- 2
जम्मू शहर के एक इलाके की निवासी सास-बहू में झगड़ा इतना बढ़ा कि यह महिला थाने की चौखट तक पहुंच गया। इस मामले में भी तीन से चार बार दोनों पक्षों के साथ काउंसलिंग कराई गई। प्रयास सफल रहा और वर्तमान में वह खुशी से साथ रह रही हैं।
महिला पुलिस थाने की काउंसलिंग में आने वाली शिकायतों को धैर्यपूर्वक सुना जाता है। परिवार के रिश्ते को टूटने से बचाने की पूरी कोशिश की जाती है और हम इसमें सफल भी हो रहे हैं।
-आरती ठाकुर, एसएचओ, महिला पुलिस थाना, गांधीनगर