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Jammu News: पति की मारपीट और ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग पत्नी को मिला न्याय
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। फैमिली कोर्ट ने पति की मारपीट और लापरवाही भरे रवैये से तंग पत्नी को पांच साल बाद न्याय दिया है।
अदालत ने पति के खिलाफ फैसला सुनाते हुए पत्नी और उसके नाबालिग बेटे को हर महीने 18 हजार रुपये का गुजारा भत्ता देने का भी आदेश दिया है।
मामला जम्मू के नारायणा मोहल्ला निवासी एक महिला का है, जिनकी शादी तीन सितंबर 2015 को न्यू प्लॉट जम्मू के जहीर अब्बास से हुई थी। पीड़िता के अनुसार शादी के बाद कुछ ही महीनों में ससुराल वालों ने दहेज की मांग शुरू कर दी।
गर्भावस्था के दौरान उसे प्रताड़ित किया गया और इलाज के खर्च से बचने के लिए मायके भेज दिया गया। तीन सितंबर 2016 को शाजिया ने एक बेटे को जन्म दिया। कुछ समय बाद पति ने गलती मानते हुए फिर से साथ रखने की बात कही और शाजिया को अपने साथ ले गया, लेकिन वहां भी हालात नहीं बदले।
दहेज की मांग बढ़ती गई और मारपीट भी होती रही। एक बार तो लोहे की रॉड से भी पीटा गया। कई बार शिकायत पुलिस में की गई, लेकिन पति और उसके परिवार वालों ने समझौते के बहाने धोखा दिया। पति की बहन ने विदेश भेजने के लिए भी पांच लाख रुपये की मांग की। जब शाजिया मायके गई थी, उस दौरान उसकी अलमारी का ताला तोड़कर गहने और कीमती सामान भी निकाल लिया गया।
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इन सबसे परेशान होकर पीड़िता ने 2019 में अदालत में गुजारा भत्ते की याचिका दायर की। पति को अदालत में बुलाया गया, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने एकतरफा कार्यवाही करते हुए फैसला सुनाया।
अदालत ने माना कि पति की मासिक आमदनी 40 हजार रुपये से अधिक है और वह ऑस्ट्रेलिया में मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहा है। इसके अलावा उसके पास जम्मू में संपत्ति भी है। ऐसे में पत्नी और बेटे को भरण-पोषण का अधिकार है।
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जम्मू। फैमिली कोर्ट ने पति की मारपीट और लापरवाही भरे रवैये से तंग पत्नी को पांच साल बाद न्याय दिया है।
अदालत ने पति के खिलाफ फैसला सुनाते हुए पत्नी और उसके नाबालिग बेटे को हर महीने 18 हजार रुपये का गुजारा भत्ता देने का भी आदेश दिया है।
मामला जम्मू के नारायणा मोहल्ला निवासी एक महिला का है, जिनकी शादी तीन सितंबर 2015 को न्यू प्लॉट जम्मू के जहीर अब्बास से हुई थी। पीड़िता के अनुसार शादी के बाद कुछ ही महीनों में ससुराल वालों ने दहेज की मांग शुरू कर दी।
गर्भावस्था के दौरान उसे प्रताड़ित किया गया और इलाज के खर्च से बचने के लिए मायके भेज दिया गया। तीन सितंबर 2016 को शाजिया ने एक बेटे को जन्म दिया। कुछ समय बाद पति ने गलती मानते हुए फिर से साथ रखने की बात कही और शाजिया को अपने साथ ले गया, लेकिन वहां भी हालात नहीं बदले।
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दहेज की मांग बढ़ती गई और मारपीट भी होती रही। एक बार तो लोहे की रॉड से भी पीटा गया। कई बार शिकायत पुलिस में की गई, लेकिन पति और उसके परिवार वालों ने समझौते के बहाने धोखा दिया। पति की बहन ने विदेश भेजने के लिए भी पांच लाख रुपये की मांग की। जब शाजिया मायके गई थी, उस दौरान उसकी अलमारी का ताला तोड़कर गहने और कीमती सामान भी निकाल लिया गया।
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इन सबसे परेशान होकर पीड़िता ने 2019 में अदालत में गुजारा भत्ते की याचिका दायर की। पति को अदालत में बुलाया गया, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने एकतरफा कार्यवाही करते हुए फैसला सुनाया।
अदालत ने माना कि पति की मासिक आमदनी 40 हजार रुपये से अधिक है और वह ऑस्ट्रेलिया में मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहा है। इसके अलावा उसके पास जम्मू में संपत्ति भी है। ऐसे में पत्नी और बेटे को भरण-पोषण का अधिकार है।