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जानिए, किसने की थी वैष्णो देवी की प्राकृतिक गुफा की खोज?

Wed, 01 Oct 2014 03:38 PM IST
Updated Wed, 01 Oct 2014 03:38 PM IST
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who was discovery of natural cave of vaishno devi

वैष्णो देवी के इतिहास पर अगर नजर डाली जाए तो सर्वप्रथम पंडित श्रीधर का नाम सामने आता है। मां वैष्णो देवी ने कन्या रूप में सबसे पहले पंडित श्रीधर को दर्शन देकर प्राकृतिक पिंडियों के बारे में जानकारी दी थी। लंबे समय तक स्थानीय लोग पंडित श्रीधर के नाम को यात्रा से जोड़ने की मांग करती रही। लेकिन हर किसी को इस मामले में निराशा ही मिली। इसके चलते मां के परम भक्त का नाम इतिहास के पन्नों में खो गया है।

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मौजूदा समय में हालात ऐसे हैं कि वैष्णो देवी के परम भक्त और प्राकृतिक गुफा व पिंडियों की खोज करने वाले पंडित श्रीधर के बारे में अगर दर्शन के लिए आने वाले किसी भी श्रद्धालु को पूछा जाए तो जवाब यही मिलेगा कि वह इस नाम के व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं जानता।
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वर्ष 1986 से पहले इस नाम का इतना अधिक महत्व था कि किसी भी नए निर्माण अथवा स्थान के नाम से पंडित श्रीधर जरूर जोड़ा जाता था। जबकि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के गठन के उपरांत पंडित श्रीधर का नाम इतिहास के पन्नों में खोता गया।

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पंडित श्रीधर का नाम हुआ गुमनाम

who was discovery of natural cave of vaishno devi

मौजूदा समय में हालात ऐसे हैं कि वैष्णो देवी के परम भक्त और प्राकृतिक गुफा व पिंडियों की खोज करने वाले पंडित श्रीधर के बारे में अगर दर्शन के लिए आने वाले किसी भी श्रद्धालु को पूछा जाए तो जवाब यही मिलेगा कि वह इस नाम के व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं जानता।

वर्ष 1986 से पहले इस नाम का इतना अधिक महत्व था कि किसी भी नए निर्माण अथवा स्थान के नाम से पंडित श्रीधर जरूर जोड़ा जाता था। जबकि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के गठन के उपरांत पंडित श्रीधर का नाम इतिहास के पन्नों में खोता गया।

श्रीधर विकास मंच के सदस्यों का कहना है कि श्राइन बोर्ड का गठन ही धार्मिक स्थलों के विकास और ऐतिहासिक जानकारी मुहैया करवाना है। लिहाजा बोर्ड का दायित्व बनता है कि वह धार्मिक स्थलों के विकास के साथ प्राचीन प्रथाओं को भी जीवित रखे।

मंच के सदस्यों का कहना है कि मुख्य बस अड्डे पर उनकी प्रतिमा बनाने की लंबे समय से मांग की जा रही है। ताकि दर्शन के लिए आने वाले हर श्रद्धालु को इस परम भक्त की जानकारी मिल सके। इस मामले में बार-बार केवल आश्वासन ही मिला है। कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया है।

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