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Jammu News: कश्मीर में राहत तो जम्मू संभाग में किसानों पर पड़ रही दोहरी मार

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While there is relief in Kashmir, farmers in Jammu division are facing double whammy
- आठ बार आया तूफान, एसडीआरएफ से मुआवजा देने की प्रक्रिया कार्रवाई में उलझी
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- संभाग में फल नहीं हो रहे फसल बीमा योजना के तहत कवर
सतीश वालिया
जम्मू। फसल बीमा योजना का लाभ कश्मीर घाटी में किसान और बागवान ले रहे हैं मगर जम्मू संभाग में बागवानी को इस दायरे में नहीं लाया गया है। इस कारण बागवानों को दोहरी मार पड़ रही है।

एक तो वे तूफान आने से बर्बाद हो रहे हैं। दूसरा उन्हें बीमा कवर नहीं मिल रहा है। एसडीआरएफ से मुआवजा राशि मिल रही है, तो नाकाफी या फिर नहीं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीते दो सालों में आठ बार तूफान आया है, लेकिन मुआवजा प्रक्रिया कार्रवाई में उलझी पड़ी है। कहीं पर पूरे जिले में नुकसान की रिपोर्ट नहीं बनी, तो कुछ हिस्सों में नुकसान का मुआवजा देने में सरकारी नियम आड़े आए।
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शनिवार को आए तूफान से फिर किसानों की चिंता बढ़ गई है। बागवानी विभाग के अनुसार बीमा योजना में बागवानी को कवर करने के लिए प्रयास जारी है। मसला सरकार के ध्यान में है। जैसे ही अनुमति मिलेगी तो बागवानों को सुविधा दी जाएगी। मौजूदा समय स्थिति में एसडीआरएफ से मुआवजा दिलाया जा रहा है। फिलहाल बागवानी किसी भी बीमा योजना से कवर नहीं है।
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इतनी होती है बागवानी
- जम्मू संभाग में बागवानी 2.50 लाख हेक्टेयर में। जम्मू, सांबा और कठुआ में लोगों ने बगीचे लगाए हैं। आठ लाख बागवान व्यवसाय से जुड़े हैं। नरवाल फल मंडी में फल बेचे जाते हैं।


बीमा योजना से किया जाए कवर

बागवानी और फलों की खेती को फसल बीमा योजना के तहत कवर किया जाए। तूफान से 70 फीसदी नुकसान हुआ है। योजना शुरू होती तो किसानों को लाभ मिल सकता था। आर्थिक नुकसान कम होता।

- तेजिंद्र सिंह बजीर, अध्यक्ष, किसान काउंसिल

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किसानों-बागवानों को लाभ देने के लिए बीमा कवर होना चाहिए। कश्मीर घाटी में तो शुरू किया गया, मगर जम्मू संभाग में कुछ नहीं हो रहा है। इस कारण किसान-बागवान चिंतित है। खेती का दायरा भी कम हो रहा है।

- कुलभूषण खजूरिया, सदस्य, किसान एडवाइजरी बोर्ड, जेएंडके

मसला सरकार के ध्यान में है। जैसे आदेश होंगे, उस पर काम किया जाएगा। फिलहाल एसडीआरएफ से मुआवजा दिलाया जाएगा।

- चमन लाल, निदेशक, बागवानी विभाग
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