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घाटी में दो साल-दो तस्वीरें: सरगना मारे गए तो टारगेट किलिंग पर उतरे दहशतगर्द

Sun, 31 Oct 2021 01:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 31 Oct 2021 01:05 AM IST
सार

दो साल में आतंकी संगठनों के टॉप कमांडरों के सफाए से सीमा पार बढ़ी बौखलाहट

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When the kingpin was killed, the terrorists landed on the target killing in kashmir valley
जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट लागू होने के दो साल के भीतर कश्मीर में कई बदलाव हुए हैं। विकास कार्यों के रफ्तार पकड़ने के बीच घाटी की सबसे बड़ी समस्या आतंकवाद पर भी कड़ा प्रहार हुआ है। सुरक्षा बलों ने कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकी तंजीमों पर नकेल कसकर टॉप कमांडरों का सफाया कर दिया। बड़े दहशतगर्दों की सूची तैयार कर सुरक्षा बलों ने दो साल में उन्हें चुन-चुन कर ढेर किया। इससे सीमा पार बौखलाहट इतनी बढ़ गई है कि आतंकियों को अब आम नागरिकों पर हमले करवाए जा रहे हैं। हाल ही में टारगेट किलिंग के तहत घाटी के अल्पसंख्यकों और गैर स्थानीयों को निशाना बनाया गया।

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सुरक्षा बलों ने घाटी में आतंकियों के खिलाफ एक के बाद एक कई सफल ऑपरेशन अंजाम दिए। वर्ष 2019 से अब के आंकड़े देखें तो 2019 में 152, वर्ष 2020 में 203 और 2021 में अब तक 138 आतंकियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया। वहीं पांच अगस्त 2019 के बाद से अब तक 361 आतंकियों को ढेर किया गया है। खास बात है कि इनमें से 150 आतंकी ट्रिपल ए और ए श्रेणी के टॉप कमांडर थे। सुरक्षा बलों की ताबड़तोड़ कार्रवाई से आतंकी तंजीमों का नेतृत्व करने के लिए मुखिया ही नहीं बचे। अनुच्छेद 370 हटने के बाद 31 अक्तूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट लागू हुआ था।
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अलगावाद-पत्थरबाजी पर नकेल, नए आतंकी भी कम बने
अनुच्छेद 370 हटने और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट के लागू होने के बाद सुरक्षा परिदृश्य बिल्कुल बदल गया। टेरर फंडिंग पर नकेल से घाटी में अलगाववादियों की गतिविधियों और पत्थरबाजी की घटनाओं में व्यापक कमी देखी गई। आतंक की राह पर जाने वाले कश्मीर के भटके युवकों की संख्या में भी गिरावट आई। वर्ष 2016 में बुरहान वानी के मारे जाने पर 510 कश्मीरी युवा आतंकी तंजीमों में शामिल हो गए थे, जबकि 2019 के बाद अब तक 350 युवाओं के आतंकियों से जुड़ने  की सूचना है। इसी तरह से वर्ष 2019 में पत्थरबाजी की 1999 की घटनाएं हुईं। 2020 में पत्थरबाजी की घटनाओं में 87 फीसदी कमी आई जबकि 2021 में  चार से पांच घटनाएं ही हुई हैं।
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घाटी में मारे गए बड़े आतंकी
हिजबुल का कुख्यात आतंकी रियाज नायकू, जुनैद सेहरई, उमर फ्य्याज उर्फ हमाद खान, जहांगीर, वसीम अहमद वानी, मसूद भट, अंसार गजवात-उल-हिंद का बुरहान कोका, लश्कर का बशीर कोका, इशफाक रशीद, सज्जाद अहमद मीर उर्फ हैदर, नसरुद्दीन लोन, जाहिद नजीर भट, सैफुल्लाह, जैश का सज्जाद अहमद डार, सज्जाद नवाबी, कारी यासिर और पाकिस्तानी आईईडी एक्सपर्ट अबू रहमान, अबू दाशिन, अल बद्र का शकूर पर्रे, पाकिस्तान का ए श्रेणी का जैश आतंकी समीर भाई उर्फ उस्मान और अहमद मीर जैसे आतंकी सरगनों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया। इसके अलावा पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड  और जैश का टॉप आतंकी आईईडी एक्सपर्ट मो. इस्माइल अल्वी उर्फ लंबू, अल बद्र का गनी ख्वाजा, लश्कर का मुदस्सिर पंडित, खुर्शीद मीर और अब्दुल्ला उर्फ अबू असरार, लश्कर कमांडर अबू हुरैरा, इशफाक उर्फ अबू अकरम, टीआरएफ  चीफ  अब्बास शेख और साकिब मंज़ूर, एजीएच चीफ  इम्तियाज़ शाह को भी सुरक्षाबलों ने विभिन्न आतंकवाद विरोधी ऑपेऱशनों    के दौरान मौत के घाट उतार दिया।  

जम्मू-कश्मीर से अलग होकर लद्दाख की बदल रही तस्वीर

जम्मू-कश्मीर से अलग होने के दो साल के भीतर ही लद्दाख की बदलने लगी है। पहले लद्दाख के दो जिलों की तीन लाख की आबादी को बमुश्किल दो सौ करोड़ का सालाना बजट मिलता था। लेकिन केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से लद्दाख को सालाना करीब छह हजार करोड़ की फंडिंग हो रही है। पानी, बिजली, सड़क और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को तरसने वाले लद्दाख में दो साल के भीतर ही बड़ा बदलाव आ गया है।

उच्च शिक्षा के लिए लद्दाख के छात्रों को जम्मू या कश्मीर जाना पड़ता था। वर्तमान में लद्दाख के लिए दो विश्वविद्यालय मंजूर हो चुके हैं। इनमें से एक केंद्रीय विश्वविद्यालय शामिल है। लद्दाख अब देश का पहला कार्बन न्यूट्रल प्रदेश बनने की राह पर है। 2025 तक पूरे लद्दाख को जैविक और कार्बन न्यूट्रल प्रदेश में तब्दील किया जाएगा। इस दिशा में लद्दाख में इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन भी शुरू हो गया है।

एलएसी तक पहुंचने लगा मोबाइल सिगनल
चीन सीमा से सटे इलाकों के अधिकांश गांव संचार सुविधा से वंचित थे। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से इन दूरदराज इलाकों में मोबाइल टॉवर स्थापित किए जा रहे हैं। यह इलाके साल भर कटे रहते थे।

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