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Jammu News: बिना रेफलेक्टर के कोहरे के बीच दौड़ वाहन
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अरनिया में छाए कोहरे के बीच जाते लोग।
- फोटो : RSPURA
सांबा। घने कोहरे से रविवार को भी जनजीवन प्रभावित रहा। मैदानी क्षेत्रों में सारा दिन कोहरे की चादर छाई रही। इससे ठंड में भी बढ़ोतरी बनी रही। लोगों ने भी घरों में ही दुबके रहना उचित समझा। मार्गों पर वाहन चालक लाइटें जलाकर चलते दिखे।
स्थानीय निवासी विजय सिंह काटल, गणेश दास आदि ने कहा कि घने कोहरे के चलते कई ट्रैक्टर ट्राली चालकों ने पीछे लाल सिगनल (रेफलेक्टर) नहीं लगाए हैं और वह मार्गों पर सरपट दौड़ रहें हैं। ऐसे में किसी बडे़ हादसे को न्योता देते नजर आते हैं। पुलिस की ओर से भी ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। उन्होंने कहा कि पुराने सांबा कठुआ बॉडर मार्ग का जब विकास किया गया था। तब हर चौक, नदी नालों एवं पुलों के पास सिगनल लगाए गए थे। रात्रि एवं धुंध में साफ पता चलता है कि मार्ग कहां है। अब अधिकतर स्थानों पर ऐसे सिगनल नहीं देखे जा रहे हैं। ऐसे में घने कोहरे में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है। उन्होंने मांग उठाई है कि जिन क्षेत्रों में मार्ग पर सिगनल नहीं हैं वहां लाल सिगनल लगाए जाएं। ताकि हादसों से बचा जा सके।
अलाव का सहारा लेते रहे लोग
अरनिया। क्षेत्र में रविवार का सारा दिन कोहरे में लिपटा रहा। इसके चलते राहगीरों के साथ वाहन चालकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सुबह से ही मैदानी क्षेत्रों को कोहरे ने अपनी आगोश में ले लिया। लोग बाजारों में निकलने से भी परहेज कर रहे थे। तापमान में गिरावट के कारण लोग घरों में ही गर्म कपड़ों के साथ बैठे रहे। ठंड के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। अपने गंतव्य की ओर जाते हुए लोग ठिठुरन महसूस कर रहे थे। बड़ी संख्या में कस्बे में लोगों ने ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा लिया और जगह-जगह झुंड बनाकर आग सेकते नजर आए। धुंध और कोहरे के कारण ठंड ज्यादा बढ़ गई, जिसके चलते बाजारों में भी रौनक गायब थी। संवाद
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स्थानीय निवासी विजय सिंह काटल, गणेश दास आदि ने कहा कि घने कोहरे के चलते कई ट्रैक्टर ट्राली चालकों ने पीछे लाल सिगनल (रेफलेक्टर) नहीं लगाए हैं और वह मार्गों पर सरपट दौड़ रहें हैं। ऐसे में किसी बडे़ हादसे को न्योता देते नजर आते हैं। पुलिस की ओर से भी ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। उन्होंने कहा कि पुराने सांबा कठुआ बॉडर मार्ग का जब विकास किया गया था। तब हर चौक, नदी नालों एवं पुलों के पास सिगनल लगाए गए थे। रात्रि एवं धुंध में साफ पता चलता है कि मार्ग कहां है। अब अधिकतर स्थानों पर ऐसे सिगनल नहीं देखे जा रहे हैं। ऐसे में घने कोहरे में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है। उन्होंने मांग उठाई है कि जिन क्षेत्रों में मार्ग पर सिगनल नहीं हैं वहां लाल सिगनल लगाए जाएं। ताकि हादसों से बचा जा सके।
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अलाव का सहारा लेते रहे लोग
अरनिया। क्षेत्र में रविवार का सारा दिन कोहरे में लिपटा रहा। इसके चलते राहगीरों के साथ वाहन चालकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सुबह से ही मैदानी क्षेत्रों को कोहरे ने अपनी आगोश में ले लिया। लोग बाजारों में निकलने से भी परहेज कर रहे थे। तापमान में गिरावट के कारण लोग घरों में ही गर्म कपड़ों के साथ बैठे रहे। ठंड के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। अपने गंतव्य की ओर जाते हुए लोग ठिठुरन महसूस कर रहे थे। बड़ी संख्या में कस्बे में लोगों ने ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा लिया और जगह-जगह झुंड बनाकर आग सेकते नजर आए। धुंध और कोहरे के कारण ठंड ज्यादा बढ़ गई, जिसके चलते बाजारों में भी रौनक गायब थी। संवाद
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