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हमारी आवाज को दबाने की कोशिश, चुप नहीं रहेंगे : सोनम
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लेह। लेह प्रशासन की ओर से सोनम वांगचुक के संस्थान की जमीन का आवंटन रद्द करने के बाद वे पूरी तरह आक्रामक अंदाज में हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम हमारी आवाज दबाने की कोशिश है, हम चुप नहीं रहेंगे और कोर्ट जाएंगे।
इससे पहले उन्होंने मीडिया से बातचीत में भूमि आवंटन रद्द किए जाने के लिए आधार बनाए गए तीनों आरोपों का बिंदुवार जवाब दिया। एचआईएएल की सीईओ गीतांजलि के साथ मिलकर उन्होंने विश्वविद्यालयों से जुड़े सभी कागज पेश किए। उन्होंने कहा कि एचआईएएल की स्थापना एक वैकल्पिक विश्वविद्यालय के रूप में की गई,जो औपचारिक विश्वविद्यालयों से अलग होता है। इसके लिए यूजीसी की मान्यता की आवश्यकता नहीं। इसके बावजूद मान्यता के लिए आवेदन किया गया। उन्होंने संस्थान के लिए दी गई जमीन के आवंटन को रद्द किए जाने को हताशा से उपजा कदम बताया।
उन्होंने कहा कि यह लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा और उसे छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग का नतीजा है। गीतांजलि ने प्रशासन पर नई लीज पॉलिसी का हवाला देकर लीज डीड पर साइन किए जाने को लगातार लटकाने का भी आरोप जड़ा। कहा कि यूजीसी के पास उन्होंने मान्यता के लिए 15 लाख रुपये भी जमा कराए थे, लेकिन आज तक इस दिशा में कुछ नहीं हुआ। बीते साल नवंबर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ हुई बैठक का हवाला देते हुए
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उन्होंने कहा कि इसके बाद भी विश्वविद्यालय की मान्यता पर मामला आगे नहीं बढ़ा। फाइल आज तक यूजीसी में लटकी है। उन्होंने साफ कहा कि लीज डीड की शर्तों को पूरा करने की दिशा में देरी प्रशासन की तरफ से हुई। सोनम वांगचुक और गीतांजलि दोनों ने एचआईएएल के लिए भूमि आवंटन को रद्द किए जाने के आदेश को लद्दाखवासियों की आकांक्षाओं को कुचलने की कोशिश करार दिया।
सीईओ गीतांजलि ने विश्वविद्यालय की स्थापना शैक्षिक उद्देश्यों के लिए ही की जाने की बात उठाते हुए कहा कि वर्ष 2023 में तत्कालीन यूजीसी चेयरमैन एम. जगदीश कुमार ने सोनम वांगचुक के साथ उन्हें भी प्रतिष्ठित चेतना टॉक सीरीज में देश भर के कुलपतियों के समक्ष व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया था। संवाद
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इससे पहले उन्होंने मीडिया से बातचीत में भूमि आवंटन रद्द किए जाने के लिए आधार बनाए गए तीनों आरोपों का बिंदुवार जवाब दिया। एचआईएएल की सीईओ गीतांजलि के साथ मिलकर उन्होंने विश्वविद्यालयों से जुड़े सभी कागज पेश किए। उन्होंने कहा कि एचआईएएल की स्थापना एक वैकल्पिक विश्वविद्यालय के रूप में की गई,जो औपचारिक विश्वविद्यालयों से अलग होता है। इसके लिए यूजीसी की मान्यता की आवश्यकता नहीं। इसके बावजूद मान्यता के लिए आवेदन किया गया। उन्होंने संस्थान के लिए दी गई जमीन के आवंटन को रद्द किए जाने को हताशा से उपजा कदम बताया।
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उन्होंने कहा कि यह लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा और उसे छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग का नतीजा है। गीतांजलि ने प्रशासन पर नई लीज पॉलिसी का हवाला देकर लीज डीड पर साइन किए जाने को लगातार लटकाने का भी आरोप जड़ा। कहा कि यूजीसी के पास उन्होंने मान्यता के लिए 15 लाख रुपये भी जमा कराए थे, लेकिन आज तक इस दिशा में कुछ नहीं हुआ। बीते साल नवंबर में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ हुई बैठक का हवाला देते हुए
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उन्होंने कहा कि इसके बाद भी विश्वविद्यालय की मान्यता पर मामला आगे नहीं बढ़ा। फाइल आज तक यूजीसी में लटकी है। उन्होंने साफ कहा कि लीज डीड की शर्तों को पूरा करने की दिशा में देरी प्रशासन की तरफ से हुई। सोनम वांगचुक और गीतांजलि दोनों ने एचआईएएल के लिए भूमि आवंटन को रद्द किए जाने के आदेश को लद्दाखवासियों की आकांक्षाओं को कुचलने की कोशिश करार दिया।
सीईओ गीतांजलि ने विश्वविद्यालय की स्थापना शैक्षिक उद्देश्यों के लिए ही की जाने की बात उठाते हुए कहा कि वर्ष 2023 में तत्कालीन यूजीसी चेयरमैन एम. जगदीश कुमार ने सोनम वांगचुक के साथ उन्हें भी प्रतिष्ठित चेतना टॉक सीरीज में देश भर के कुलपतियों के समक्ष व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया था। संवाद