क्षीर भवानी के कुंड ने पहले ही दे दिए थे तबाही के संकेत
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रियासत में आई विनाशकारी बाढ़ के संकेत पहले ही मिल गए थे। ठीक एक साल पहले क्षीर भवानी के कुंड के जल का रंग लाल हो गया था जिसे कश्मीरी मान्यता में किसी विनाशकारी घटना का संकेत माना जाता है।
क्षीर भवानी स्थित रागिनी कुंड के जल ने जब अपना रंग बदला था तब लोगों को किसी बड़ी अप्रिय घटना का अंदेशा हुआ था लेकिन किसी ने ऐसे भयावह सैलाब की कल्पना नहीं की थी।
लोगबाग अब मान रहे हैं कि रागिनी कुंड के जल के रंग परिवर्तन शायद इसी जल प्रलय की पूर्व सूचना थी। अमर उजाला ने 15 सितम्बर 2013 को कुंड के जल का रंग बदलने से संबंधित खबर प्रकाशित की थी।
कोई नहीं पहचान पाया कुदरत के इस संकेत को
गौरतलब है कि कुंड के जल का रंग बदलने की घटना के एक साल बाद आई बाढ़ में अब तक 220 लोगों की जान गई हैं। लगभग चालीस हजार घर जमींदोज हुए हैं। चालीस लाख से अधिक की आबादी प्रभावित है और छह लाख लोग अब भी जल प्रलय में फंसे हैं।
पूरी रियासत का बुनियादी ढ़ांचा तहस हो गया है। इस त्रासदी के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में बरसों लग सकते हैं। क्षीर भवानी में कश्मीरी पंडितों की गहरी आस्था है। यह शक्ति पीठ श्रीनगर से 25 किलोमीटर दूर गांदरबल के तुलामुला इलाके में स्थित है।
स्वामी विवेकानंद ने अमरनाथ की यात्रा के बाद यहां साधना की थी। इस अतिप्राचीन मंदिर के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। श्रीलंका में इस माता का पूजन राजलक्ष्मी के रूप में होता है।
माता क्षीर भवानी को हनुमान ने कश्मीर में स्थापित किया था
एक कथा के अनुसार माता क्षीर भवानी श्रीलंका की कुलदेवी थी। रावण वध के बाद हनुमान ने भगवान राम के आदेश पर माता को लंका से लाकर कश्मीर में स्थापित किया था। कश्मीरी पनुन के प्रधान अश्विनी चुरंगू को श्रीलंका दौरे के क्रम में वहां के एक सांसद ने माता की तस्वीर भी भेंट की थी।
क्षीर भवानी के रंग परिवर्तन का जिक्र आइने अकबरी में भी है। ब्रिटिश सेटेलमेंट अफसर वाल्टर लारेंस ने भी इसका उल्लेख किया है। इतिहासवेत्ता मास्टर संसार चंद कौल और भामजई कौल की पुस्तकों में भी इसका जिक्र है।
कश्मीरी पंडितों की मान्यता के अनुसार जम्मू कश्मीर रियासत में जब कोई बड़ी अशुभ घटना होने वाली होती है तो रागिनी कुंड का जल लाल या काला हो जाता है। जल का रंग आसमानी नीला, मिश्री सफेद और गुलाबी रंग में भी बदलता रहा है।
हर बड़ी घटना से पहले रंग बदलता है कुंड का जल
लाल और काले रंग को छोड़कर अन्य रंगों को शुभ माना जाता है। भारत विभाजन के समय भी इस कुंड का जल लाल हुआ था। फिर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या से पहले कुंड का जल लाल हो गया था। 1990 में आतंकवाद के चरम पर पहुंचने और कश्मीरी पंडितों के घाटी छोडने के पहले कुंड के जल का रंग काला हो गया था।
पिछले साल सितम्बर में जब कुंड के जल का रंग लाल हुआ तो कश्मीरी पंडित उसे किसी अशुभ घटना का संकेत मान रहे थे जो बाढ़ की विभीषिका के रूप में सामने आई है।