दो साल से अस्पताल में नहीं आ रहा है पानी
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नए साइक्रेटरी अस्पताल में पानी का मामला गवर्नर हाउस तक पहुंच गया है। करीब बीस करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में पानी का कनेक्शन ही नहीं दिया गया है। नए भवन में पानी न होने से पुराने असुरक्षित ब्लाक में ही मानसिक रोगियों को इलाज दिया जा रहा है।
पानी के कनेक्शन को लेकर विभागीय अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, मगर निर्माण के दो साल बाद भी नए अस्पताल के शुरू न होने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
अंबफला स्थित पुराने साइक्रेटरी अस्पताल में संभाग के बारह जिलों से रोजाना 200-250 मानसिक रोगी इलाज के लिए पहुंचते हैं। जिला स्तर पर कोई साइक्रेटरी केंद्र न होने से रोगियों के लिए यही एकमात्र अस्पताल सहारा है।
मानसिक रोगियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए रेशमघर में दो साल पहले नए साइक्रेटरी अस्पताल के दो मंजिला भवन का निर्माण किया गया, लेकिन लेटलतीफी से फरवरी 2014 में यहां सिर्फ प्रशासनिक ब्लाक ही शुरू किया जा सका।
बीस करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का मरीजों को लाभ नहीं
नए दो मंजिला भवन में ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी, पहले फ्लोर पर आफिस और दूसरे फ्लोर पर वार्ड स्थापित हैं, लेकिन पानी का कनेक्शन न होने के कारण मानसिक रोगियों को पुराने ब्लाक से शिफ्ट ही नहीं किया जा सका है।
कुछ साल पहले पुराने ब्लाक में पांच वार्डों में एक की दीवार गिर जाने से अभी चार वार्डों में 70-80 रोगी भर्ती रहते हैं। इस ब्लाक में 75 बेड की क्षमता है, जबकि नए साइक्रेटरी अस्पताल में 150 बेड की क्षमता है।
नए ब्लाक में डीएडिक्शन केंद्र भी सिर्फ बुधवार और शुक्रवार को ही चलाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार नए ब्लाक में पानी के कनेक्शन के लिए पीएचई ने करीब छह लाख रुपये का प्रस्ताव बनाया था। जिसे प्लान में मंजूर भी किया गया, लेकिन इस राशि से अभी तक कनेक्शन लगाने पर काम नहीं हो पाया है।