यहां हर आशियां पर मौजूद हैं पाकिस्तानी गोलियों के निशां
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हर किसी की चाह होती है कि उसका एक सुंदर सा आशियां हो। आज जिस तरह से महंगाई डायन बन कर लोगों पर मुसीबतों का पहाड़ डाल रही है, ऐसे में वे बड़े खुशकिस्मत होते हैं, जिनके पास एक खुशहाल परिवार के साथ ही अपना घर भी हो।
सीमावर्ती ग्रावों में रह रहे लोगों ने भी बड़ी मुश्किल से अपने परिवार के लिए मकान बनाए, लेकिन आज उनका सुंदर आशियां गोलियों से छलनी हो गया है।
जब वे अपने घरों को देखते हैं, तो ग्रामीणों को लगता है, जैसे उनके घरों पर नहीं, उनके सीनों पर गोलियां दागी गई हों।
हर घर की दीवारें गोलियों से छलनी
सीमांत गांव पिंडी कैंप से लेकर नेकोयाल तक करीब 30 गांव पड़ते हैं। इन गांवों में शायद ही कोई ऐसा घर बचा हो, जो पाक गोलाबारी से छलनी न हुआ हो।
किसी के घर की दीवारें गोलियों से छलनी हो चुकी हैं, तो कई लोगों के घरों के अंदर तक गोलियों के निशान मौजूद हैं।
दर्जनों ग्रामीणों के घर की छत पर गिरे मोर्टार के गोलों से बने सुराख आज भी पाकिस्तानी के दुस्साहस की गवाही देते नजर आ रहे हैं।
'पाई-पाई जोड़कर पक्के घर बनाए थे'
सीमावर्ती गांवों में रहने वाले कृष्णलाल ने बताया कि महंगाई के इस भीषण दौर में हमने पाई-पाई जोड़कर पक्के घर बनाए थे, लेकिन बीते एक वर्ष में हमारे घरों की दीवारें और छत पाक गोलाबारी से छलनी हो गए हैं।
सीमांत पंचायत हल्का पिंडी चाढ़कां कलां के सरपंच राजिन्द्र सिंह का कहना है कि आम लोगों के घरों की तरह ही सोहागपुर में बनाए गए एक सुंदर पैलेस की दीवारें और छत भी पाकिस्तान की ओर से हुई गोलाबारी में छलनी हो चुका है।