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दीक्षांत समारोह: चौथी औद्योगिक क्रांति के अनुरूप हो शिक्षा संस्थान का पाठ्यक्रम- उपराष्ट्रपति
Sat, 10 Apr 2021 10:33 AM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sat, 10 Apr 2021 10:33 AM IST
सार
- हम अपनी आतंरिक समस्याओं के समाधान के लिए सक्षम- उपराष्ट्रपति
- आईआईएम, आईआईटी, एनआईटी के दस-दस छात्रों को एलजी छात्रवृत्ति
- जम्मू-कश्मीर उत्तर भारत में शिक्षा का केंद्र बनेगा- डॉ. जितेंद्र सिंह
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उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में पाठ्यक्रमों को उद्योग जगत की मांग के अनरूप करने की जरूरत है। शैक्षिक और उद्योग संस्थाओं के बीच बढ़ती दूरी को कम करने के साथ अब हमें विद्यार्थियों को चौथी औद्योगिक क्रांति के अनुरूप पाठ्यक्रम पढ़ना होगा। नायडू शुक्रवार को इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमैट (आईआईएम) के दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कम समय में यह संस्थान अपनी पहचान बनने के लिए अग्रसर है।
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जम्मू कनाल रोड स्थित कन्वेंशन हॉल में आयोजित आईआईएम के तीसरे और चौथे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा को नई दिशा की ओर उन्मुख करने की आवश्यकता पर जोर दिया। नवाचार और संस्थागत सुधार को प्रोत्साहित करने के साथ रचनात्मकता को बढ़ावा देने को कहा। छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें ऐसा काम करना होगा, जिससे समाज के हर तबके के जवीन में बदलाव आए और वह खुशहाल जीवन बिता सके। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्राचीन काल से ही शिक्षा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में जाना जाता है। इस धरती ने पंतजलि, आनंदवर्धन, हब्बा खातून जैसे महान लोग दिए हैं, जिनकी जीवनी से सीखने की जरूरत है।
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उपराष्ट्रपति ने कहा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और देश अपनी हर समस्या के समाधान के लिए सक्षम और प्रतिबद्ध है। कुछ देश बेवजह दूसरे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते हैं। ऐसे लोगों से मैं कहना चाहता हूं कि भारत देश हर तरह से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सक्षम है। जम्मू-कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है, यहां के लोग यहां की प्रकृति की तरह अनमोल हैं। हमें राष्ट्रीय एकीकरण की भावना से प्रेरित होना चाहिए-राष्ट्र पहले, पार्टी और पेशा दूसरे और स्वयं आत्म अंतिम।
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उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस मौके पर आईआईएम, आईआईटी और एनआईटी के दस-दस छात्रों को एलजी छात्रवृत्ति देने की घोषण की। छात्रों को संबोधित करते हुए आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उपराज्यपाल ने युवाओं के कौशल विकास पर बल दिया और उद्योग मांग के अनुरूप उन्हें तैयार करने को कहा। प्रदेश सरकार ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर रही है, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को उसके अनुरूप कौशल विकास देकर रोजगार दिया जा सके।
राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर उत्तर भारत में शिक्षा का केंद्र बनेगा। सरकार शिक्षा क्षेत्र में विकास को प्राथमिकता दे रही है। युवाओं को कौशल विकास आधारित शिक्षा दी जा रही है। युवा पीढ़ी आकांक्षी है और सरकार उनकी आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें सुविधा प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के विकास को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है।