आतंकवादियों से लोहा लेते हुए ‘मानसी’ ने दे दी जान
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टंगधार सेक्टर से घुसपैठ की कोशिश करने वाले आतंकियों को देखते ही उन पर बरस पड़ने वाली ‘मानसी’ ने बिना झिझके खुद को फर्ज पर कुर्बान कर दिया। वह सेना की ट्रैक्रर डाग यूनिट की सदस्य थी।
आतंकियों ने एलओसी के पास बीते शनिवार को चार साल की लैबराडोर ‘मानसी’ के साथ ही उसके हैंडलर टेरिटोरियल आर्मी के जवान बशीर अहमद वार को भी मौत के घाट उतार दिया था।
सेना की 15वीं कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा ने शहीद जवान बशीर अहमद वार को श्रद्धांजलि देने के साथ ही ‘मानसी’ के अदम्य साहस की भी सराहना की।
सेना की ओर से कहा गया कि युद्धस्थल में चाहे सेना का एक जवान घायल हो या फिर डाग स्क्वायड का कोई सदस्य सेना की ओर से दानों ही मामलों में एक ही तरह की और त्वरित कार्रवाई की जाती है।
मानसी ने तीन आतंकियों को मार गिराया
सेना की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी में बताया गया कि ‘मानसी’ के सेना में शामिल होने के बाद से ही बशीर अहमद हैंडल कर रहा था। दोनों में बहुत गहरा रिश्ता बना चुका था। मानसी को आतंकियों की गोली लगने के बाद बदला लेने के लिए बशीर ने अतिरिक्त जवानों को मदद के लिए बुलाने के साथ ही आतंकियों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी।
कहा गया कि मौत भी दोनों को अलग नहीं कर सकी और अतिरिक्त जवानों के पहुंचने के तुरंत बाद ही बशीर आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया।
सेना के मुताबिक इस साल ‘मानसी’ और बशीर को तीन आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिल चुकी थी। दोनों 25 मई को टंगधार के कैसुरी रिज इलाके में एक आतंकी और 21 जुलाई को दो आतंकियों को मार गिराने के अभियान में शामिल थे।