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जम्मू विश्वविद्यालय: गुज्जर-बक्करवालों के जीवन को जानेंगे शोधार्थी, विशेषज्ञ तैयार करेंगे भाषा लिपि
Sat, 30 Oct 2021 11:24 AM IST
करिश्मा चिब
मंगेश कुमार, जम्मू
मंगेश कुमार, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Sat, 30 Oct 2021 11:24 AM IST
सार
जम्मू विश्वविद्यालय के पुंछ कैंपस में जनजातीय संग्रहालय केंद्र खोलने का काम शुरू। पांच करोड़ की लागत से केंद्र में प्रदर्शित होगा जनजातीय जीवन, शोध को मिलेगा बढ़ावा।
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जम्मू विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चुनौतीपूर्ण और घुमंतू जीवनशैली से अलग पहचान रखने वाले जनजातीय समुदाय गुज्जर-बक्करवाल के जीवन पर अध्ययन होने जा रहा है। शोधार्थी समुदाय के लोगाें के साथ रहकर उनका जीवन-यापन का अनुभव जुटाएंगे, जबकि विशेषज्ञ उनकी भाषा लिपि तैयार करेंगे। जम्मू विश्वविद्यालय के पुंछ कैंपस में पांच करोड़ की लागत से जनजातीय समुदाय के जीवन पर आधारित संग्रहालय भी बनने जा रहा है, जिसमें उनकी दिनचर्या से जुड़ी वस्तुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। अपनी तरह का यह पहला प्रयास है।
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हाल ही में अनुसूचित जनजाति मामले विभाग और जम्मू विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी मंजूरी दी थी, जिसे अब मूर्त रूप दिया जाएगा। पुंछ कैंपस के रेक्टर प्रो. दीपांकर सेन गुप्ता ने बताया कि विवि वीसी प्रो. मनोज कुमार धर और अनुसूचित जनजाति मामले के सचिव शाहिद इकबाल चौधरी की अध्यक्षता में विवि ने बैठक कर यह फैसला लिया था। इस पर सरकार ने वित्तीय सहायता दी है। प्रोे. दीपांकर के अनुसार अनुसूचित जनजाति पर शोध किए जाएंगे।
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शोधार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाएगी। साइंस संकाय के शोधार्थी गुज्जर बक्करवालों के साथ पहाड़ियों पर जाकर औषधियों पर शोध करेंगे। वहीं भाषा विज्ञान के शोधार्थी उनकी भाषा की लिपि तैयार करेंगे। किसी भी समुदाय के सेंटर में अनुसूचित जनजाति समुदाय पर शोध कर सकेंगे। उनकी समस्याओं का समाधान निकाल सकेंगे।
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जम्मू विश्वविद्यालय के संग्रहालय विभाग के प्रो. माले डे ने बताया कि अनुसूचित जनजाति के लोगों के बारे में जानने के लिए विवि ने परियोजना के तहत सराहनीय कदम उठाया है। उनकी लिखाई पढ़ाई पर ध्यान देने के साथ उनके वास्तविक जीवन को भी प्रायोगिक तरीके से दिखाया जाएगा। इससे उनकी समस्याओं का भी समाधान होगा। बजट सत्र शुरू होने से पहले शोध आदि प्रक्रियाओं की व्यवस्था की जा रही है।
बर्तन, वेशभूषा, वाद्य यंत्र होंगे प्रदर्शित
संग्रहालय केंद्र में गुज्जर और बक्करवाल समुदाय की दिनचर्या से जुड़ी चीजें जैसे बर्तन, वेश भूषा, संगीत से संबंधित यंत्र, स्त्री और पुरुष की दो अलग-अलग प्रतिमाएं रखी जाएंगी। सेंटर खोलने का उद्देश्य दोनों संभागों की ऐतिहासिकता और संस्कृति को बढ़ावा देना है। 31 मार्च 2022 से पहले इसका काम पूरा किया जाएगा।