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एंटी डिफेक्शन कानून के तहत कठुआ नगर परिषद अध्यक्ष समेत चार पार्षदों की सदस्यता खत्म
Wed, 12 Jun 2019 12:00 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 12 Jun 2019 12:00 AM IST
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जम्मू-कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी ने जम्मू कश्मीर म्यूनिसिपल एक्ट 2000 के एंटी डिफेक्शन कानून के तहत कार्रवाई करते हुए नगर परिषद कठुआ के अध्यक्ष नरेश शर्मा (वार्ड नौ से पार्षद) समेत चार पार्षदों की सदस्यता को रद्द कर दिया है।
सीईओ शैलेंद्र कुमार ने वार्ड 21 के पार्षद बलजीत सिंह और वार्ड 16 की पार्षद पुष्पा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है। जिन पार्षदों की सदस्यता रद्द हुई है, उनमें वार्ड छह की रेखा कुमारी, वार्ड दस के अजय कुमार और वार्ड 12 की रेणु बाला शामिल हैं। रियासत में पहली बार जम्मू कश्मीर म्यूनिसिपल एक्ट 2000 के एंटी डिफेक्शन कानून के अंतर्गत इस तरह की कार्रवाई की गई है।
फैसले के अनुसार, प्रतिवादियों की ओर से चुनाव के बाद ग्रुप बनाया गया, जिसमें नियत प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। प्रतिवादियों ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा था और नगर परिषद के सदस्य चुने गए। कांग्रेस और भाजपा के बीच कोई विलय नहीं हुआ। ऐसे में प्रतिवादी को एक्ट की धारा 18बी के तहत कोई छूट नहीं मिलती है।
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चुनाव अधिकारी के फैसले में साफ है कि प्रतिवादियों ने माना है कि उन्होंने अपने असली राजनीतिक दल कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए सदस्यता भी त्याग दी है और एक ग्रुप तैयार कर दूसरे राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के साथ विलय किया है। इसके आधार पर डिफेक्शन के प्रावधानों में जम्मू कश्मीर म्यूनिसिपल एक्ट 2000 की धारा 18ए(1)(ए) के तहत उनकी सदस्यता रद्द की जाती है।
उपाध्यक्ष काम करेंगी अध्यक्ष का
नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव गंडोत्रा ने बताया कि फिलहाल नगर परिषद अध्यक्ष की कुर्सी खाली है और प्रावधानों के अनुसार उपाध्यक्ष ही अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगी। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव अधिकारी के फैसले के खिलाफ पार्षद ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं और राहत न मिलने पर हाई कोर्ट में भी जा सकते हैं। बताया कि वार्ड दो के पार्षद चुने गए राजिंद्र सिंह बब्बी पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं और अब आए फैसले के बाद फिलहाल नगर परिषद कठुआ के 21 पार्षदों की सीटों में से 5 पद रिक्त हैं।
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सीईओ शैलेंद्र कुमार ने वार्ड 21 के पार्षद बलजीत सिंह और वार्ड 16 की पार्षद पुष्पा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है। जिन पार्षदों की सदस्यता रद्द हुई है, उनमें वार्ड छह की रेखा कुमारी, वार्ड दस के अजय कुमार और वार्ड 12 की रेणु बाला शामिल हैं। रियासत में पहली बार जम्मू कश्मीर म्यूनिसिपल एक्ट 2000 के एंटी डिफेक्शन कानून के अंतर्गत इस तरह की कार्रवाई की गई है।
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फैसले के अनुसार, प्रतिवादियों की ओर से चुनाव के बाद ग्रुप बनाया गया, जिसमें नियत प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। प्रतिवादियों ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा था और नगर परिषद के सदस्य चुने गए। कांग्रेस और भाजपा के बीच कोई विलय नहीं हुआ। ऐसे में प्रतिवादी को एक्ट की धारा 18बी के तहत कोई छूट नहीं मिलती है।
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चुनाव अधिकारी के फैसले में साफ है कि प्रतिवादियों ने माना है कि उन्होंने अपने असली राजनीतिक दल कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए सदस्यता भी त्याग दी है और एक ग्रुप तैयार कर दूसरे राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के साथ विलय किया है। इसके आधार पर डिफेक्शन के प्रावधानों में जम्मू कश्मीर म्यूनिसिपल एक्ट 2000 की धारा 18ए(1)(ए) के तहत उनकी सदस्यता रद्द की जाती है।
उपाध्यक्ष काम करेंगी अध्यक्ष का
नगर परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव गंडोत्रा ने बताया कि फिलहाल नगर परिषद अध्यक्ष की कुर्सी खाली है और प्रावधानों के अनुसार उपाध्यक्ष ही अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगी। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव अधिकारी के फैसले के खिलाफ पार्षद ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं और राहत न मिलने पर हाई कोर्ट में भी जा सकते हैं। बताया कि वार्ड दो के पार्षद चुने गए राजिंद्र सिंह बब्बी पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं और अब आए फैसले के बाद फिलहाल नगर परिषद कठुआ के 21 पार्षदों की सीटों में से 5 पद रिक्त हैं।