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एक माह के मासूमों को अस्पताल में छोड़ कर भागे माता-पिता

Tue, 15 Mar 2016 03:26 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Tue, 15 Mar 2016 03:26 PM IST
सार

  • कुछ दिन पहले अस्पताल के वार्ड नंबर दो में एक बच्ची को अस्पताल कर्मचारियों ने अकेला पाया, जिसे उसके माता पिता छोड़कर चले गए थे।
  • इन बच्चों का कसूर सिर्फ इतना है कि जन्म से ही ये न्यूरोलॉजिकल समस्या से जूझ रहे हैं। 

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unclaimed child found in jb pant hospital
दोनों मासूम एक स‌िंड्रोम से पीड़‌ित हैं। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

आखिर क्या कसूर है इन मासूमों का। श्रीनगर के जीबी पंत अस्पताल में ऐसे दो मासूमों का इलाज अस्पताल प्रबंधन कर रहा है। इन मासूमों को कोई भी अपनाना नहीं चाहता। इनका कसूर सिर्फ इतना है कि जन्म से ही ये न्यूरोलॉजिकल समस्या से जूझ रहे हैं। 
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डाक्टरों के अनुसार उनके ठीक होने की संभावना न के बराबर है। इन्हीं कारणों से उनके माता-पिता ने उनहें लावारिस छोड़ दिया है। जीबी पंत अस्पताल का स्टाफ ही उनके अभिभावकों जैसा फर्ज निभा रहा है।
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अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डाक्टर शफकत खान के अनुसार कुछ दिन पहले अस्पताल के वार्ड नंबर दो में एक बच्ची को अस्पताल कर्मचारियों ने अकेला पाया, जिसे उसके माता पिता छोड़कर चले गए थे। यह बच्ची डाउन सिंड्रोम रोग से जूझ रही है। 
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दो बीमार मासूमों को अपनों का इंतजार

unclaimed child found in jb pant hospital

दूसरा बच्चा, जो पुलिस को कुछ दिन पहले श्रीनगर की एक दरगाह की सीढ़ियों पर मिला था, इस बच्चे को न्यूरोलाजिक की समस्या है। खान के अनुसार उनके विभाग के पास जो प्रावधान है उसके चलते वह तब तक बच्चों का मुफ्त इलाज जारी रखेंगे जब तक वह एक वर्ष के नहीं हो जाते। 

फिलहाल दोनों करीबन एक-एक महीने के हैं। खान ने यह भी कहा कि अब हमें एक ऐसे परिवार की तलाश है जो इन बच्चों को अपनाए ताकि बच्चों को सम्मानजनक जीवन मिल सके। उन्होंने सभी से अपील की कि वह इन बच्चों को सुरक्षित हाथों तक पहुंचाने में सहयोग करें। 

वहीं, घाटी में सरकार के पास भी ऐसे बच्चों के भविष्य के लिए कोई ठोस उपाय नहीं हैं, जिससे उनकी परवरिश हो सके। अस्पताल प्रबंधन भी इन बच्चों को हमेशा के लिए नहीं रख सकता। अब ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि इन मासूमों का आगे क्या होगा।

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