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Jammu News: उमर तेज कदमों से, फारूक ऑटो तो सकीना स्कूटी पर पीछे बैठकर पहुंचीं मजार
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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में सोमवार को अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिले जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता 13 जुलाई, 1931 को डोगरा सेना की गोलीबारी में मारे गए 22 लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए नक्शबंद साहिब कब्रिस्तान जा रहे थे। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला फुर्ती से मजार की दीवार लांघकर अंदर गए। वह इतनी तेजी आगे बढ़ रहे थे कि सुरक्षाकर्मियों को उनके साथ कदमताल मिलाने में मुश्किल हुई। उनके पिता डा. फारूक अब्दुल्ला ने ऑटो लिया और मंत्री सकीना इत्तू स्कूटी पर पीछे बैठकर पहुंचीं।
सुरक्षा कारणों से 13 जुलाई को नेकां समेत अन्य पार्टियों नेता कब्रिस्तान नहीं पहुंचे थे। सोमवार को नेकां नेताओं की रणनीति बनी कि उन्हें भले रोका जाए फिर भी श्रद्धांजलि देने जरूर जाएंगे। इसी क्रम में जब उमर अब्दुल्ला ने खानयार चौक से पुराने शहर के नक्शबंद साहिब तक पैदल जाने का फैसला किया तो सुरक्षा अधिकारियों को उनके साथ कदमताल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
55 वर्षीय मुख्यमंत्री उमर ने फुर्ती से कब्रिस्तान की दीवार पर चढ़कर अंदर चले गए। जब वह अचानक से दीवार पर चढ़ने लगे तो पुलिस हैरान रह गई। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष 87 वर्षीय डा. फारूक पुलिस द्वारा खानयार चौक पर गाड़ी रोके जाने के बाद मजार पर जाने के लिए ऑटो रिक्शा में सवार हुए।
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सुरक्षा कारणों से 13 जुलाई को नेकां समेत अन्य पार्टियों नेता कब्रिस्तान नहीं पहुंचे थे। सोमवार को नेकां नेताओं की रणनीति बनी कि उन्हें भले रोका जाए फिर भी श्रद्धांजलि देने जरूर जाएंगे। इसी क्रम में जब उमर अब्दुल्ला ने खानयार चौक से पुराने शहर के नक्शबंद साहिब तक पैदल जाने का फैसला किया तो सुरक्षा अधिकारियों को उनके साथ कदमताल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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55 वर्षीय मुख्यमंत्री उमर ने फुर्ती से कब्रिस्तान की दीवार पर चढ़कर अंदर चले गए। जब वह अचानक से दीवार पर चढ़ने लगे तो पुलिस हैरान रह गई। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष 87 वर्षीय डा. फारूक पुलिस द्वारा खानयार चौक पर गाड़ी रोके जाने के बाद मजार पर जाने के लिए ऑटो रिक्शा में सवार हुए।
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