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तरक्की का सफर: 'चुनौतियां हिमालय जैसी थीं... पर हमें तो कमाल करना था', इंजीनियर की सफलता की कहानी

Thu, 05 Jun 2025 03:38 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 05 Jun 2025 03:38 PM IST
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Udhampur-Srinagar-Baramulla Link Against Himalayan Odds Engineers Rewrite Railway History
Udhampur-Srinagar-Baramulla Link - फोटो : संवाद
उधमपुर-बारामुला रेलवे लिंक कश्मीर के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा। रेलवे लिंक का शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन करेंगे। यहां ऊंचे-ऊंचे पहाड़ थे। पहाड़ों को काटकर ट्रेन के लिए रास्ता बनाना था। ब्रिज बनाने थे। एफिल टावर से भी ऊंचा। केबल स्टेड रेल ब्रिज बनाने का अनुभव नहीं था। 
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पर, हमारे इंजीनियरों ने कमाल कर दिखाया। कमाल भी ऐसे जिसने भारतीय रेलवे के इतिहास में कई नए रिकाॅर्ड दर्ज कर दिए...मगर यह सब आसान नहीं था। गांव छूटा, परिवार छूटा। महीनों गुजरे। साल बीते...काम पर डटे रहे। जानते हैं इंजीनियरों की सफलता की कहानी उन्हीं की जुबानी...
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मतीन अहमद, डिप्टी चीफ इंजीनियर, अंजी खंड्ड, यूएसबीआरएल प्रोजेक्ट, नॉर्दर्न रेलवे ने बताया कि हवाई पुल बनाने का मुहावरा सुना था, पर हमें हवा में ही पुल बनाना था। यह प्रोजेक्ट हमारे लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड की तरह है। 
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हम मूलतः लेह-लद्दाख के रहने वाले हैं। 2009 में मेरा चयन रेलवे में हुआ था। दिल्ली डिवीजन के तहत जींद में तैनाती मिली थी। वर्ष 2013 में चिनाब ब्रिज पर पोस्टिंग मिली। उस दौरान दो से ढाई साल तक उस प्रोजेक्ट पर काम किया। बहुत ही शुरुआती दौर था वो। वर्ष 2022 में मेरी तैनाती अंजी खड्ड पर हुई। 

आज जिस केबल स्टेड रेल ब्रिज को देश-दुनिया इंजीनियरिंग का बेमिसाल नमूना कह रही है, वहां हमारी शुरुआत थी। केबल डालने का काम शुरू हुआ था। चुनौतियां, डर, आशंकाएं सब थीं...पर इन सबको पीछे छोड़कर हम काम में जुटे रहे। 

इस तरह का पुल भारतीय रेलवे के इतिहास में पहली बार बन रहा था, ऐसे में हमारे लिए तो सबकुछ नया था। आप कह सकते हैं कि ए,बी,सी सीखने जैसी हमारी शुरुआत थी। हर रोज कुछ नया सीखते, पढ़ते और काम करते। पर, सच कहूं तो आज लगता है कितना आसान था वो सब। हवाई पुल बनाने का मुहावरा सुना था, हमने हवा में ही पुल बना दिया। 

 

बेहतरीन प्लानिंग से यह सब संभव हो सका। जहां तक सवाल व्यक्तिगत जीवन का है, तो सबसे पहले मैं यही कहूंगा कि चिनाब ब्रिज से लेकर अंजी खड्ड तक पर काम करना मेरे लिए किसी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से कम नहीं। ये नियति ने तय किया। हां, इस दौरान जिम्मेदारी की वजह से हम अपने शहर और गांव नहीं जा पाए। 
 

हमने परिवार को अपने काम की अहमियत बताई, उन्होंने इसे समझा और हमसे समय की मांग नहीं की। इसके लिए परिवार का धन्यवाद...। कोशिश रहेगी कि आने वाले समय में कुछ वक्त अपने परिवार-गांव में बिताऊं। नई जिम्मेदारी के रूप में मुझे नए रेल डिवीजन जम्मू में सीनियर डिवीजन इंजीनियर का पद संभालना है।

 
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