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राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित हुए शिक्षक सुनील कुमार, बोले- अपना बच्चा समझ कर सभी को दी शिक्षा

Sun, 23 Aug 2020 05:45 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 23 Aug 2020 05:45 PM IST
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udhampur jammu kashmir Teacher Sunil Kumar, who was selected for National Award
छात्र-छात्राओं को पेड़ पौधों के बारे में जानकारी देते शिक्षक सुनील कुमार - फोटो : अमर उजाला

आर्थिक परेशानियों से जूझते हुए सरकारी स्कूल में शिक्षा हासिल की और मुझे पता है कि सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए किस प्रकार की परेशानियां सामने आती हैं। जब शिक्षक बनकर सरकारी स्कूल में पढ़ाने का अवसर मिला तो मेरा स्कूल मेरा घर की सोच रखी और विद्यार्थियों को अपने बच्चों की तरह शिक्षा प्रदान की। इसी का परिणाम है कि मौजूदा समय में सरकारी मिडिल स्कूल जखड़ में निजी स्कूल से भी ज्यादा सुविधाएं हैं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है। ये बातें राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित उधमपुर के शिक्षक सुनील कुमार ने अमर उजाला के साथ बातचीत के दौरान कहीं।

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उन्होंने बताया कि 2003 में उनको प्राइमरी स्कूल जखड़ में आरईटी शिक्षक के तौर पर नियुक्त किया। 2004 में स्कूल की इमारत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई और स्कूल को किराए की इमारत में चलाना पड़ा। किराए की इमारत में विद्यार्थियों को गुणवत्ता भरी शिक्षा प्रदान करना बड़ी चुनौती थी, लेकिन इसके लिए मेहनत जारी रखी।
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2010 तक किराए की इमारत में स्कूल चलाया और 2010 में अपनी इमारत का निर्माण कर लिया। 2013-14 में स्कूल को अपग्रेड कर मिडिल स्कूल बना दिया गया। इस स्कूल में 99 प्रतिशत विद्यार्थी गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के रहे हैं। इनको सुविधाओं के साथ पढ़ाना बहुत मुश्किल था, लेकिन इसके लिए प्रयास जारी रखे। 16 वर्ष के करियर में बच्चों के अभिभावकों के साथ संपर्क रखा और उनकी परेशानियों को समझते हुए शिक्षा प्रदान की। 2008 में आरईटी से स्थायी शिक्षक बनने के बाद वेतन में बढ़ोतरी हो गई और फिर ज्यादा जिम्मेदारी के साथ पढ़ाना शुरू कर दिया। स्कूल को मॉडल स्कूल बनाने के लिए काम शुरू किया। आज स्कूल में लर्नर फ्रैंडली क्लास रूम हैं, बिजली व पानी की पूरी सुविधा है। लड़के-लड़कियों के लिए अलग से शौचालय मौजूद हैं।
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बाला सिद्धांत के तहत दी जा रही शिक्षा
सुनील कुमार ने बताया कि वह विद्यार्थियों को बाला (बिल्डिंग एज लर्निंग एट) सिद्धांत के साथ शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। स्कूल की दीवारों पर अंग्रेजी और गणित के विषय पर आधारित पेंटिंग बनाई गई हैं। यह कक्षाओं के अंदर और बाहर दीवारों पर बनाई गई हैं। हर समय विद्यार्थियों की नजर इन पर रहती है और विद्यार्थी हमेशा कुछ सीखता रहता है।

फंड का जरूरत के हिसाब से किया जा रहा इस्तेमाल
शिक्षा विभाग की तरफ से जारी फंड का जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किया जा रहा है। इस राशि से विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं। विद्यार्थियों को इंटरनेट के जरिए शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। लर्निंग एप से भी पढ़ाते हैं। अपने मोबाइल से ही इंटरनेट के बारे में सिखा रहे हैं।


कोरोना काल में चला रहे सामुदायिक कक्षाएं
कोरोना काल में जब स्कूल बंद हो गए तो व्हाट्सएप ग्रुप और सामुदायिक कक्षाएं चलाकर पढ़ाना शुरू कर दिया। इसके साथ वह अभिभावकों को भी अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकारी स्कूल में भेजने की मांग कर रहे हैं। वह अभिभावकों को गारंटी देते हैं कि वह बच्चों को स्कूल भेजें और वह उसको गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करेंगे।

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