महबूबा के आतंकी के घर जाने पर सियासी तूफान, उमर और महबूबा में चला ट्विटर वार
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उमर ने तंज कसते हुए कहा है कि बुरी तरीके से खराब हो चुकी छवि को अब वह साफ करने की कोशिश कर रही हैं। आपरेशन आल आउट की वह आर्किटेक्ट रही हैं। इसके चलते 2015 से अब तक सैकडों आतंकी मारे जा चुके हैं। अब वह एक आतंकी से दूसरे के घर जाकर अपनी दागदार छवि को सुधारने की कोशिश कर रही हैं।
The architect of “Operation All-out” & the overseer of the operations that killed hundreds of militants since 2015 is now going from one militant home to the next trying to rehabilitate a badly damaged reputation.
विज्ञापन विज्ञापन— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) January 3, 2019
ट्वीट किया कि उन्होंने भाजपा को खुश करने के लिए आतंकियों की मौत को मंजूरी दी। अब वह मारे जा चुके आतंकियों का इस्तेमाल कर मतदाताओं को खुश करने में जुटी हैं। जनता को वह इतनी आसानी से धोखा खाने वाला कैसे समझ सकती हैं।
इस पर महबूबा ने जवाबी टवीट कर याद दिलाया कि 1996 से 2002 तक नेकां के शासनकाल में इख्वानों के जरिये खूनी खेल खेला गया। पीडीपी अपने लोगों तक पहुंच बनाने में विश्वास करती है। पीडीपी यह जानना चाहती है कि वह महबूबा मुफ्ती को अपमानित करना चाहते हैं या फिर नेकां की राजनीति है कि मासूमों का खून बहता रहे।
It was your duty as an opposition leader to reach out to these families , just like I did during your tenure as CM. I visited families that lost members who were killed during fake encounter at Manchil , during 2010 unrest & Shopian rape and murder case .
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) January 3, 2019
इस पर उमर ने फिर ट्वीट किया कि बॉस, यदि आप अपने एक्शन को लेकर पाखंड में जीना चाहती है तो मैं अपमानित करने वाला कौन हूं। वह क्या दूध या टाफी लेने गए थे, यह क्या उनके आउटरिच का हिस्सा है।
फिर महबूबा ने ट्वीट किया कि मेरा इन परिवारों के यहां जाना आपके लिए परेशानी पैदा नहीं करेगा। हमें चाहिए कि उन तक पहुंचा जाए क्योंकि उन्हें दूसरे की दया पर नहीं छोड़ा जा सकता है।
भाजपा ने कहा, यह राजनीतिक नौटंकी
भाजपा नेता अशोक कौल ने कहा कि यह राजनीतिक नौटंकी है। 2016 में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भड़की हिंसा के दौरान कई लोगों के मारे जाने पर उन्होंने कहा था कि क्या वे टाफी या दूध लेने गए थे।
That’s the problem you only reach these people in opposition. Unlike you I prefer not to exploit their pain while in opposition only to forget all about it in power. Different horses for different courses.......
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) January 3, 2019