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Jammu News: अब 39 जांच के बाद मिलेगा वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र
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आधुनिक मशीनों से वाहनों की जांच करते परिवहन विभाग के अधिकारी स्रोत परिवहन विभाग
- फोटो : Archive
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- एक दशक बाद आईसीसी शुरू, परियोजना तैयार करने में लगे 14 करोड़ रुपये
- मैन्युअल सिस्टम खत्म, मशीनों से होगी पूरी जांच
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। व्यवसायिक और निजी वाहन की फिटनेस अब औपचारिकता भर नहीं होगी। फिटनेस प्रमाणपत्र लेने के लिए हर वाहन को 39 अलग-अलग वैज्ञानिक और कंप्यूटरीकृत जांच से गुजरना होगा। यह सब मुमकिन होगा विजयपुर (सांबा) में 14 करोड़ की लागत से बने ऑटोमेटेड इंस्पेक्शन एंड सर्टिफिकेशन सेंटर (आईसीसी) से जो अब पूरी तरह शुरू हो गया है।
करीब एक दशक के इंतजार के बाद शुरू हुई इस सुविधा से वाहन फिटनेस जांच अधिक पारदर्शी, सटीक और भरोसेमंद होगी। अब तक करीब तीन दर्जन वाहनों का परीक्षण कर उनके फिटनेस प्रमाणपत्र ऑटोमेटेड फिटनेस मैनेजमेंट सिस्टम (एएफएमएस) पोर्टल पर अपलोड किए गए हैं। पहले जांच मैन्युअल होती थी। अब पूरी प्रक्रिया अत्याधुनिक मशीनों से हो रही है। सुरक्षित और प्रदूषण मानकों पर खरे उतरने वाले वाहनों को ही फिटनेस प्रमाणपत्र मिल सकेगा। केंद्र में जर्मन कंपनी माहा जीएमबीएच की अत्याधुनिक मशीनें लगाई हैं। आईसीसी के लिए 2016-17 में भूमि अधिग्रहण हुआ था। विभिन्न कारणों से यह लंबे समय तक शुरू नहीं हो सका था। अब परिवहन विभाग जल्द ही इस केंद्र का औपचारिक उद्घाटन करेगा।
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इन जांच से तय होगी गाड़ी की फिटनेस
वाहन की फिटनेस कुल 39 अलग-अलग परीक्षण तय किए हैं। इनमें ब्रेक, सर्विस ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग, स्पीडोमीटर, टायर, हेडलाइट, प्रदूषण, धुआं, शोर का स्तर, साइड स्लिप, व्हील अलाइनमेंट और वाहन के निचले हिस्से की जांच जैसी कई सुरक्षा और तकनीकी कसौटियां शामिल हैं। सभी परीक्षण अत्याधुनिक मशीनों से होंगे। रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज होगी। सभी मानकों पर सफल होने के बाद ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी होगा।
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विधानसभा में उठा मुद्दा, फिर रफ्तार पकड़ी
14 करोड़ रुपये की लागत से बने इस केंद्र के शुरू न होने का मामला विधानसभा में गूंजा था। इसके बाद रामबन के एआरटीओ इंजीनियर कुलदीप सिंह को एआरटीओ आईसीसी सांबा के रूप में तैनात किया। उन्हें केंद्र चालू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। उस समय अत्याधुनिक मशीनें लंबे समय से बिना इस्तेमाल के पड़ी थीं। मशीनों की कैलिब्रेशन, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और अन्य तकनीकी कार्य पूरे कर केंद्र को संचालन के लिए तैयार किया।
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- मैन्युअल सिस्टम खत्म, मशीनों से होगी पूरी जांच
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। व्यवसायिक और निजी वाहन की फिटनेस अब औपचारिकता भर नहीं होगी। फिटनेस प्रमाणपत्र लेने के लिए हर वाहन को 39 अलग-अलग वैज्ञानिक और कंप्यूटरीकृत जांच से गुजरना होगा। यह सब मुमकिन होगा विजयपुर (सांबा) में 14 करोड़ की लागत से बने ऑटोमेटेड इंस्पेक्शन एंड सर्टिफिकेशन सेंटर (आईसीसी) से जो अब पूरी तरह शुरू हो गया है।
करीब एक दशक के इंतजार के बाद शुरू हुई इस सुविधा से वाहन फिटनेस जांच अधिक पारदर्शी, सटीक और भरोसेमंद होगी। अब तक करीब तीन दर्जन वाहनों का परीक्षण कर उनके फिटनेस प्रमाणपत्र ऑटोमेटेड फिटनेस मैनेजमेंट सिस्टम (एएफएमएस) पोर्टल पर अपलोड किए गए हैं। पहले जांच मैन्युअल होती थी। अब पूरी प्रक्रिया अत्याधुनिक मशीनों से हो रही है। सुरक्षित और प्रदूषण मानकों पर खरे उतरने वाले वाहनों को ही फिटनेस प्रमाणपत्र मिल सकेगा। केंद्र में जर्मन कंपनी माहा जीएमबीएच की अत्याधुनिक मशीनें लगाई हैं। आईसीसी के लिए 2016-17 में भूमि अधिग्रहण हुआ था। विभिन्न कारणों से यह लंबे समय तक शुरू नहीं हो सका था। अब परिवहन विभाग जल्द ही इस केंद्र का औपचारिक उद्घाटन करेगा।
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इन जांच से तय होगी गाड़ी की फिटनेस
वाहन की फिटनेस कुल 39 अलग-अलग परीक्षण तय किए हैं। इनमें ब्रेक, सर्विस ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग, स्पीडोमीटर, टायर, हेडलाइट, प्रदूषण, धुआं, शोर का स्तर, साइड स्लिप, व्हील अलाइनमेंट और वाहन के निचले हिस्से की जांच जैसी कई सुरक्षा और तकनीकी कसौटियां शामिल हैं। सभी परीक्षण अत्याधुनिक मशीनों से होंगे। रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज होगी। सभी मानकों पर सफल होने के बाद ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी होगा।
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विधानसभा में उठा मुद्दा, फिर रफ्तार पकड़ी
14 करोड़ रुपये की लागत से बने इस केंद्र के शुरू न होने का मामला विधानसभा में गूंजा था। इसके बाद रामबन के एआरटीओ इंजीनियर कुलदीप सिंह को एआरटीओ आईसीसी सांबा के रूप में तैनात किया। उन्हें केंद्र चालू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। उस समय अत्याधुनिक मशीनें लंबे समय से बिना इस्तेमाल के पड़ी थीं। मशीनों की कैलिब्रेशन, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और अन्य तकनीकी कार्य पूरे कर केंद्र को संचालन के लिए तैयार किया।