दुर्गम बर्फीले इलाकों में हेलीकाप्टर से डाली जाएगी ट्रांसमिशन लाइन
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रियासत में पहली बार दुर्गम और बर्फीले इलाकों में ट्रांसमिशन लाइन डालने के लिए हेलीकाप्टर का इस्तेमाल किया जाएगा। कश्मीर घाटी के लिए नेशनल ग्रिड को वैकल्पिक मार्ग से जोड़ने के लिए 400 केवी डी/सी जालंधर-सांबा-राजौरी-श्रीनगर लाइन पर कार्य के दौरान अपनी तरह का पहला प्रयोग आगामी महीनों में हो सकता है। यह परियोजना 2017 तक पूरी होनी है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार कश्मीर घाटी को वैकल्पिक मार्ग से जोड़ने के लिए केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने निजी क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय ग्रिड ट्रांसमिशन क्षेत्र की कंपनी स्टरलाइट को कांट्रैक्ट दिया है।
सर्दियों में पनबिजली उत्पादन गिरने से कश्मीर घाटी समेत रियासत के कई इलाकों में बिजली का संकट पैदा हो जाता है। अभी तक कश्मीर को केवल जम्मू-श्रीनगर हाईवे के माध्यम से ही नेशनल ग्रिड से जोड़ा गया है।
हेलीक्रेन्स की मदद से समय से पूरी होगी योजना
चार सौ केवी डी/सी जालंधर सांबा राजौरी श्रीनगर लाइन का कार्य पूरा होने के बाद कश्मीर घाटी को वैकल्पिक मार्ग से भी नेशनल ग्रिड से जोड़ा जा सकेगा।
इसके लिए श्रीनगर के अमरगढ़ में 400/200 जीआईएस सब स्टेशन तैयार करने के अलावा मल्टी सर्किट टावरों के माध्यम से जालंधर से होते हुए सांबा राजौरी से श्रीनगर में 400 केवी डीसी की ट्रांसमिशन लाइनें डाली जाएंगी।
पहाड़ी खासतौर से बर्फीले इलाकों में ट्रांसमिशन लाइनें डालने के लिए अमेरिका में बने सिकोरस्की एस 64 ट्विन इंजन हेलीकाप्टरों का प्रयोग किया जा सकता है। हेलीक्रेन्स के माध्यम से ट्रांसमिशन लाइनें डालने से परियोजना को तय समय पर पूरा करने में भी मदद मिलेगी।