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Jammu News: बाबा के मस्त-मलंग भक्तों का निराला अंदाज, हाथों में तिरंगा लेकर पहुंचा हुजूम
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। हर-हर महादेव…ऊं नमः पार्वती पतये...चलो बुलावा आया है, बाबा ने बुलाया है...बम-बम-हर-हर…, पाकिस्तान को दिखा देंगे, दहशतगर्द को हरा देंगे, वंदे मातरम और भारत माता की जय…, से भगवतीनगर का यात्री निवास बुधवार की मध्य रात्रि से ही गूंज रहा था। कोई सिर पर हैट, हाथों में त्रिशूल लिए बोल बम-बोल बम का जयकारा रहा था तो कोई ग्रुप हाथों में तिरंगा और आपरेशन सिंदूर का बैनर लिए भारत माता की जय कर रहा था। एक तरफ से आवाज थमती तो दूसरी ओर से जय-जयकार शुरू हो जाती, और देखते ही देखते डमरू और शंखनाद गूंजने लग रहा था। कुछ एेसा ही उत्साह रेलवे स्टेशन पर बने टोकन व पंजीकरण केंद्र सरस्वती धाम पर रात भर रहा। महाजन सभा, वैष्णवी धाम, पंचायत भवन में बने केंद्रों पर लोग रात से ही पहुंचने लगे थे। एक बात सभी में सामान्य दिखी, वो था पहलगाम के दहशतगर्दों के खिलाफ दिल में गुस्सा। ब्रह्ममुहूर्त शुरु होते ही मानो इंद्रदेव भी नींद से जाग कर श्रद्धालुओं पर झमाझम मेघों को बरसाने लगे हों। दुरुह तीर्थयात्रा का रोमांच और यात्रा की संवेदनशीलता के बावजूद दहशत व खौफ पर भारी भोले की भक्ति का अद्भुत संयोग जम्मू-कश्मीर की सरजमीं पर दिखाई दे रहा था। यात्री निवास पर रवानगी का उत्साह था, जबकि पंजीकरण व टोकन केंद्रों पर उत्साह के बीच कुछ गुस्सा भी था, जो सुबह होते ही विवाद में भी बदला। हालांकि बाद में हालात संभल गए।
अभिभूत सा हर कोई, मंजिल हर किसी की पवित्र गुफा तय थी। व्यवस्थाओं से खुश थे, सुविधाओं पर संतोष जता रहे थे, तभी तो कह रहे थे कि 48 घंटे तक यूं ही टोकन-पंजीकरण का इंतजार हमने नहीं किया। एक शिकायत भी कुछ लोगों के मन में थी, क्योंकि वे झेल रहे थे। उनका कहना था कि सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भरोसा था, इसलिए लोग आने लगे। जब संख्या बढ़ी तो काउंटर भी बढ़ाए जाने चाहिए। लंबा इंतजार कुछ लोगों को खला भी, इसे लेकर पुलिस व इंतजाम से जुड़े अफसरों से विवाद भी हुआ। भीड़ बेकाबू न हो, इसके लिए पुलिस को लाठियां भी फटकारनी पड़ीं।
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जम्मू। हर-हर महादेव…ऊं नमः पार्वती पतये...चलो बुलावा आया है, बाबा ने बुलाया है...बम-बम-हर-हर…, पाकिस्तान को दिखा देंगे, दहशतगर्द को हरा देंगे, वंदे मातरम और भारत माता की जय…, से भगवतीनगर का यात्री निवास बुधवार की मध्य रात्रि से ही गूंज रहा था। कोई सिर पर हैट, हाथों में त्रिशूल लिए बोल बम-बोल बम का जयकारा रहा था तो कोई ग्रुप हाथों में तिरंगा और आपरेशन सिंदूर का बैनर लिए भारत माता की जय कर रहा था। एक तरफ से आवाज थमती तो दूसरी ओर से जय-जयकार शुरू हो जाती, और देखते ही देखते डमरू और शंखनाद गूंजने लग रहा था। कुछ एेसा ही उत्साह रेलवे स्टेशन पर बने टोकन व पंजीकरण केंद्र सरस्वती धाम पर रात भर रहा। महाजन सभा, वैष्णवी धाम, पंचायत भवन में बने केंद्रों पर लोग रात से ही पहुंचने लगे थे। एक बात सभी में सामान्य दिखी, वो था पहलगाम के दहशतगर्दों के खिलाफ दिल में गुस्सा। ब्रह्ममुहूर्त शुरु होते ही मानो इंद्रदेव भी नींद से जाग कर श्रद्धालुओं पर झमाझम मेघों को बरसाने लगे हों। दुरुह तीर्थयात्रा का रोमांच और यात्रा की संवेदनशीलता के बावजूद दहशत व खौफ पर भारी भोले की भक्ति का अद्भुत संयोग जम्मू-कश्मीर की सरजमीं पर दिखाई दे रहा था। यात्री निवास पर रवानगी का उत्साह था, जबकि पंजीकरण व टोकन केंद्रों पर उत्साह के बीच कुछ गुस्सा भी था, जो सुबह होते ही विवाद में भी बदला। हालांकि बाद में हालात संभल गए।
अभिभूत सा हर कोई, मंजिल हर किसी की पवित्र गुफा तय थी। व्यवस्थाओं से खुश थे, सुविधाओं पर संतोष जता रहे थे, तभी तो कह रहे थे कि 48 घंटे तक यूं ही टोकन-पंजीकरण का इंतजार हमने नहीं किया। एक शिकायत भी कुछ लोगों के मन में थी, क्योंकि वे झेल रहे थे। उनका कहना था कि सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भरोसा था, इसलिए लोग आने लगे। जब संख्या बढ़ी तो काउंटर भी बढ़ाए जाने चाहिए। लंबा इंतजार कुछ लोगों को खला भी, इसे लेकर पुलिस व इंतजाम से जुड़े अफसरों से विवाद भी हुआ। भीड़ बेकाबू न हो, इसके लिए पुलिस को लाठियां भी फटकारनी पड़ीं।
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