कश्मीर में पारंपरिक शिल्पों को मिलेगा बढ़ावा, युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के द्वार
जम्मू-कश्मीर में कारीगरों को मजबूत बनाने, पारंपरिक शिल्प कला को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित झेलम तवी फ्लड रिकवरी प्रोजेक्ट (जेटीएफआरपी) के तहत युवाओं को रोजगार के अवसर देने के लिए कई कलस्टर विकसित किए जा रहे हैं।
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क्र्यूवेल/ चेन स्टिच आर्टिसन कलस्टर को कारपोरेट मामले मंत्रालय भारत सरकार की निर्माता कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया है। कारीगर कलस्टर को नूरारी क्राफ्ट निर्माता कंपनी लिमिटेड नाम से मंत्रालय द्वारा प्रमाणित किया गया है। इस कलस्टर से जुड़े करीब 600 कारीगरों को अब पारंपरिक शिल्पों को बढ़ावा देने का मौका मिलेगा।
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कारीगरों के समग्र विकास के लिए जेटीएफआरपी के तहत शिल्प समूहों को इस तरह से डिजाइन किया गया है, ताकि एक छत के नीचे उनके समूह को लाया जा सके। मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेकेईआरए/जेटीएफआरपी डॉ. सैयद आबिद रशीद शाह ने कहा कि जेटीएफआरपी के तहत पारंपरिक शिल्पों में पैपर माची (जादीबल), विल्लो विकर (गांदरबल), ऊन व पश्मीना (बांदीपोरा) का भी विकास किया गया है।
कलस्टर सदस्य शहीना कहती हैं कि नूरबाग कारीगर कलस्टर में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वह अब प्रतिदिन 800-1000 कमाने में सक्षम हैं। एक अन्य कारीगर मैमुना ने कहा कि उनके उत्पादों के लिए अब सुनिश्चित बाजार समर्थन मिलेगा। जेटीएफआरपी ने नूरबाग में कलस्टर के विकास के लिए कंसल्टेंसी की सेवाएं ली हैं। इस कलस्टर में ज्यादा तर महिलाएं शामिल हैं।