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सता के लिए गिरगिट की तरह बदलते रंग
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Mon, 13 Oct 2014 12:44 AM IST
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राजनीतिक व्यंग्य पर आधारिक नाटक ‘टोपियां’ का संडे थियेटर के तहत नटरंग में मंचन किया गया। नाटक में सत्ता लालची नेताओं का गिरगिट से भी तेज रंग बदलना दिखाया गया। बलवंत ठाकुर के निर्देशन में प्रस्तुत मनी मधुकर के राजनीतिक व्यंग्य टोपियां की कहानी दो पड़ोसियों से शुरू होती है जो राजनीतिक परिदृश्य को बदलने और उसका विकल्प खोजने की कसम खाते हैं।
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हर बार वे अलग-अलग लोगों से मिलते हैं, जिन्होंने अलग-अलग रंग की टोपियां पहनी होती हैं। हर बार उन्हें यही उम्मीद होती है कि सामने वाला कुछ हटकर है और उसकी कुछ अलग तरह की विचारधारा है। अंतत: उन्हें लगता है कि कुछ नहीं बदलने वाला है। कहानीकार ने बखूबी चित्रित किया है कि राजनीतिज्ञ वही हैं, वे सिर्फ अपनी टोपियां बदलकर जनता को बेवकूफ बनाते हैं।
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एक ही समय पर राजनीतिज्ञ दुश्मन और दोस्त दोनों हो सकते हैं। सत्ता के लिए उनके सिद्धांत और विचार दोनों ही बदल जाते हैं। दोनों पड़ोसियों का किरदार मोहम्मद यासीन और राजन ठकयाल ने निभाया। सुशील राना ने भी दोनों का बढ़िया साथ दिया। नाटक में लाइट्स को नीरज कांत ने डिजाइन किया।
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